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नीरव मोदी से बड़ा घोटाला: बाइक टैक्सी के नाम पर ठगे 15,000 करोड़, 15 के खिलाफ सीबीआई केस, कर्ताधर्ता रफूचक्कर
Mon, 01 Nov 2021 08:35 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 01 Nov 2021 08:35 PM IST
सार
आरोपी संजय भाटी ने अपनी कंपनी के जरिए 'बाइक बोट स्कीम' शुरू की। फिर निवेशकों से कहा गया कि वे इसमें निवेश कर मोटा मुनाफा कमा सकते हैं। लेकिन योजना कोरी कागजी व खयाली साबित हुई। भोले भाले निवेशकों से रुपये ऐंठ कर भाटी व उसके साथ चंपत हो गए।
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- फोटो : amar ujala
विस्तार
15 हजार करोड़ रुपये के बाइक टैक्सी घोटाले में सीबीआई ने 15 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। यूपी के इस बड़े घोटाले को गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लि. के कर्ताधर्ता संजय भाटी व 14 अन्य ने अंजाम दिया। आरोप है कि इन्होंने देशभर के हजारों निवेशकों को मोटे मुनाफे का लालच देकर हजारों करोड़ रुपये ऐंठ लिए।
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बाइक बोट नाम से शुरू की थी स्कीम
बाइक टैक्सी घोटाला हीरा कारोबारी नीरव मोदी द्वारा किए गए घोटाले से भी बड़ा बताया जा रहा है। आरोपी संजय भाटी ने अपनी कंपनी के जरिए 'बाइक बोट स्कीम' शुरू की। फिर निवेशकों से कहा गया कि वे इसमें निवेश कर मोटा मुनाफा कमा सकते हैं। उन्हें एक से लेकर सात बाइक में निवेश को कहा गया। कहा गया कि इस बाइक टैक्सी स्कीम में पैसा लगाने पर अच्छी कमाई होगी। लेकिन योजना कोरी कागजी व खयाली साबित हुई। भोले भाले निवेशकों से रुपये ऐंठ कर भाटी व उसके साथ चंपत हो गए।
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हर माह अच्छे रिटर्न का दिया था ऑफर
ठगों ने बाइक टैक्सी स्कीम के तहत लोगों को ऑफर दिया था कि वे बाइकों को खरीदने के लिए जो निवेश करेंगे, उसके बदले में उन्हें हर माह अच्छा रिटर्न मिलेगा। कंपनी ने देश के कई शहरों में अपनी फ्रेंचाइजी शुरू करने की भी बात कही थी।
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यह स्कीम न यूपी में और न अन्य कहीं कागजों से निकल कर जमीन पर आई, लेकिन नए निवेशकों को जोड़ने व उनसे रूपये ऐंठने का का सिलसिला जारी रहा। कंपनी ने 2017 से 2019 के बीच घोटाले को अंजाम दिया और लाखों लोगों से 15,000 करोड़ रुपये हड़प लिए।
कंपनी ने दो लाख लोगों को शिकार बनाया
इस घोटाले को पहले ईडी ने पकड़ा था। ईडी ने कंपनी के कर्ताधर्ताओं की 216 करोड़ की संपत्ति भी जब्त की थी। सीबीआई के अनुसार कंपनी ने दो लाख लोगों से ठगी की है। जांच में सीबीआई ने पाया कि यूपी पुलिस ने मामले में ढिलाई बरती और मामले को रफादफा करने का प्रयास किया। पुलिस ने पीड़ितों को न्याय दिलाने बजाए शिकायतों को वापस लेने के लिए उन पर दबाव डाला गया।