रोहिणी कोर्ट में शूटआउट: भारी पड़ी वकीलों की दबंगई, सुप्रीम कोर्ट से सीखते तो न होता जितेंद्र गोगी हत्याकांड
रोहिणी जिला अदालत के एक कर्मचारी के अनुसार अदालतों की सुरक्षा पर वकीलों की 'दबंगई' भारी पड़ी है। अदालतों के वकील अदालत परिसर में प्रवेश के समय होने वाली चेकिंग को अपनी शान के विरूद्ध समझते हैं। चेकिंग करने वाले कर्मचारियों से अकसर उनकी बहस हो जाती है। यही कारण है कि सुरक्षा कर्मचारी भी वकीलों को ठीक से चेक करने से बचते हैं...
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देश की राजधानी दिल्ली की एक जिला अदालत में जज के सामने 35 से 40 राउंड गोलीबारी हुई। इस गोलीबारी में छह लाख का ईनामी बदमाश जितेंद्र गोगी मारा गया, तो पुलिस ने उसके हमलावरों को भी मार गिराया। लेकिन जिस तरह दिल्ली की अदालत में खुलेआम फायरिंग हुई है, उससे राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस यूनिट की योग्यता पर भी गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़े हो गए हैं। हालांकि, इसे वकीलों की दबंगई का परिणाम भी माना जा रहा है क्योंकि वकील सुरक्षा जांच को अपनी शान के खिलाफ समझते हैं और जांच से बचते हैं और आज वकीलों के वेश में आए हमलावरों ने जितेंद्र गोगी को अदालत में जज के सामने भून डाला।
यह घटना इस मामले में और ज्यादा गंभीर है कि इस समय दिल्ली की सुरक्षा हाई अलर्ट पर है। चंद दिनों पहले ही एक आतंकी गुट के छह आतंकियों को सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किया गया था। बताया गया था कि ये आतंकी त्योहारों के सीजन में सार्वजनिक स्थलों को निशाना बनाने वाले हैं। पुलिस ने आतंकियों के अन्य मॉड्यूल के होने की संभावना को लेकर हाई अलर्ट जारी किया था। ऐसे हाई अलर्ट के बीच एक अदालत में इस तरह का हमला होना सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रोहिणी जिला अदालत के एक कर्मचारी के अनुसार अदालतों की सुरक्षा पर वकीलों की 'दबंगई' भारी पड़ी है। अदालतों के वकील अदालत परिसर में प्रवेश के समय होने वाली चेकिंग को अपनी शान के विरूद्ध समझते हैं। चेकिंग करने वाले कर्मचारियों से अकसर उनकी बहस हो जाती है। यही कारण है कि सुरक्षा कर्मचारी भी वकीलों को ठीक से चेक करने से बचते हैं। आज वकीलों की यही दबंगई अदालत की सुरक्षा पर भारी पड़ी और तीन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
रोहिणी कोर्ट में इसके पहले 2015 में भी इसी तरह का एक हमला किया गया था। उस मामले में भी हमलावर ने जज के सामने अपने दुश्मन को गोली मार दी थी। उस समय भी रोहिणी की अदालत की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए थे, लेकिन उसके बाद यह बात आई गई हो गई।
इसके पहले 2011 में सज्जन कुमार को दिल्ली की एक जिला अदालत में पेश किए जाने के दौरान उड़ाने की साजिश रची गई थी। हालांकि, पुलिस ने समय रहते इस मामले में खालिस्तानी गैंग के कुछ आतंकियों को आरडीएक्स के साथ अंबाला से गिरफ्तार कर लिया था।
वकीलों और पुलिस में मारपीट
अदालत परिसर में वकील अपने सामने पुलिस के जवानों की सुरक्षा संबंधी सलाह भी नहीं सुनते। इस बात में कई बार वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच टकराव हो चुका है। इसके पहले राजधानी दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट और कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में इसी तरह के मुद्दे पर वकीलों और पुलिसकर्मियों में भारी टकराव हो चुका है। अंत में उच्च स्तरीय पुलिस अधिकारियों के बीच-बचाव के बाद दोनों पक्षों के बीच मामला शांत कराया गया था। इन घटनाओं का असर यही हुआ है कि सुरक्षाकर्मी केवल वकील ही नहीं, बल्कि उनके साथ आने वाले अन्य लोगों की चेकिंग भी सही ढंग से नहीं करते।
सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था अपनाते तो न होती ये घटना
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विनी कुमार दुबे ने अमर उजाला को बताया कि सर्वोच्च अदालत परिसर में प्रवेश करने से पहले हर वकील को चेकिंग से होकर गुजरना पड़ता है। वह कितना भी बड़ा वकील क्यों न हो, सभी को सुरक्षा व्यवस्था से गुजरना अनिवार्य है। वकीलों के पास आने वाले लोगों को भी वकील के द्वारा पास बनाकर दिए जाने के बाद पास की जांच करने के बाद ही लोगों को अदालत परिसर में प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में सुरक्षा में चूक होने की कोई संभावना नहीं बचती और सुरक्षा बनी रहती है। अश्विनी कुमार दुबे ने कहा कि यदि निचली अदालतों में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई जाए तो जितेंद्र गोगी हत्याकांड जैसी घटनाओं को टाला जा सकता था।
हाईकोर्ट में भी सुरक्षा कड़ी
दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ता दर्शन शर्मा ने बताया कि दिल्ली की उच्च न्यायालय में भी लगभग सुप्रीम कोर्ट की तरह की सुरक्षा व्यवस्था है। यहां प्रवेश करने वाले सभी वकीलों को मेटल डिटेक्टर से होकर गुजरना पड़ता है। वकीलों के पास आने वाले लोगों को भी बिना वकील के द्वारा पास जारी किए अदालत परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाता। वकीलों या अन्य लोगों को अपने साथ लाए सामान को भी सुरक्षा जांच पास करना पड़ता है जिससे सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं होती। दिल्ली हाईकोर्ट में भी यह सुरक्षा हाईकोर्ट के पास हुए एक बम ब्लास्ट के बाद अपनाई गई थी।
वकीलों ने किया विरोध
हालांकि, रोहिणी कोर्ट के वकीलों ने इसे कमजोर सुरक्षा का परिणाम बताया है। कहा जा रहा है कि अदालत परिसर में प्रवेश करने वाले द्वार पर लगा मेटल डिटेक्टर काम नहीं कर रहा था, जिससे वकीलों के वेश में छिपे हमलावर हथियार लेकर अदालत तक पहुंचने में सफल रहे। जिला अदालतों के वकीलों ने शनिवार को काम के बहिष्कार का एलान किया है।