मनी लांड्रिंग: गिरफ्तारी से बचने के लिए रॉबर्ट वाड्रा ने कोर्ट में डाली अग्रिम जमानत याचिका
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Robert Vadra has filed anticipatory bail plea in Delhi's Patiala House court in a money laundering case. Hearing will be held tomorrow. pic.twitter.com/zLOw1luDJn
— ANI (@ANI) February 1, 2019विज्ञापन
इस मामले को लेकर वाड्रा आज दिल्ली के पटियाला हाउस पहुंचे हैं, उनका का कहना है कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और उन पर झूठा मुकदमा चलाया जा रहा है, इसमें उन्हें राजनीतिक का शिकार बनाया जा रहा है, पर मैं डरने वालो में से नहीं हूँ और मैं कानून का पालन करने वाला नागरिक हूँ।
Grounds on which Robert Vadra is seeking anticipatory bail in Delhi's Patiala House Court- Vadra says he is being targeted and is being subjected to false prosecution which has a colour of political witch hunt & that he is a law abiding citizen (file pic) pic.twitter.com/vHaNKURKPc
— ANI (@ANI) February 2, 2019
मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला वाड्रा के करीबी सहयोगी मनोज अरोड़ा से जुड़ा हुआ है। इसी मामले में वाड्रा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट का रुख किया है। दरसअल वाड्रा के करीबी सहयोगी कहे जाने वाले मनोज अरोड़ा के खिलाफ ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। इस मामले में अरोड़ा को कोर्ट से 6 फरवरी तक के लिए गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिल चुकी है।
इससे पहले कोर्ट ने मनोज अरोड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) से दो दिन में जवाब मांगा था। याचिका में मनोज अरोड़ा ने आरोप लगाया था कि ईडी इस मामले में उस पर नियोक्ता राबर्ट वाड्रा का नाम लेने का दबाव डाल रहा है।
पटियाला हाउस अदालत के विशेष सीबीआई जज अरविंद कुमार ने मनोज अरोड़ा के खिलाफ बेमियादी गैरजमानती वारंट जारी करने के आवेदन पर भी सुनवाई 11 जनवरी को तय की है।
लंदन में 19 लाख पौंड की संपत्ति वाड्रा की: ईडी
यह मामला लंदन के 12, ब्रायनस्टन स्कवायर स्थित 19 लाख पाउंड (करीब 17 करोड़ रुपये) की एक प्रॉपर्टी की खरीदारी में कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। ईडी का दावा है कि इस संपत्ति के असल मालिक वाड्रा हैं और इसकी खरीद के लिए पैसे की व्यवस्था अरोड़ा ने की थी।यह संपत्ति फरार आर्म्स डीलर संजीव भंडारी की दुबई स्थित कंपनी के खाते से भुगतान करके खरीदी गई थी। इसके कुछ समय बाद स्काई लाइट ने भंडारी की कंपनी को करीब 19 लाख पौंड का भुगतान किया था।