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Hindi News ›   India News ›   River sand mining: NGT directs CPCB, MoEF&CC to clarify categorisation red or orange category within 2 months

नदी रेत खनन: NGT ने CPCB, वन-जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को दिए निर्देश, कहा- स्पष्ट करें रेड और ऑरेंज श्रेणी

Tue, 04 Jul 2023 10:04 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 04 Jul 2023 10:04 PM IST
सार

River Sand Mining: न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा, 'सीपीसीबी और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को निर्देश दिया जाता है कि वे नदी तल से रेत के उत्खनन (मैनुअल खुदाई को छोड़कर) को लाल या नारंगी श्रेणी में श्रेणीबद्ध करने के मामले को देखें।

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River sand mining: NGT directs CPCB, MoEF&CC to clarify categorisation red or orange category within 2 months
ngt - फोटो : ngt

विस्तार

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वे नदी तल से रेत खनन को लाल या नारंगी श्रेणी में श्रेणीबद्ध करें और दो महीने के भीतर उचित अधिसूचना जारी करें।

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सीपीसीबी उद्योगों को उनके प्रदूषण सूचकांक स्कोर के आधार पर लाल और नारंगी सहित विभिन्न रंगों में वर्गीकृत करता है। 60 और उससे अधिक स्कोर वाले उद्योगों को लाल श्रेणी में रखा गया है, जबकि 41 और 59 के बीच स्कोर वाले उद्योगों को नारंगी श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
 

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लाल श्रेणी के उद्योगों को पांच साल के लिए संचालित करने के लिए आवश्यक सहमति प्रदान की जाती है, जबकि नारंगी श्रेणी के उद्योगों के लिए सहमति की वैधता 10 साल के लिए होती है। एनजीटी उत्तर प्रदेश के कानपुर और उन्नाव क्षेत्र में अवैध रेत खनन का दावा करने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
 

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न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा, 'सीपीसीबी और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को निर्देश दिया जाता है कि वे नदी तल से रेत के उत्खनन (मैनुअल खुदाई को छोड़कर) को लाल या नारंगी श्रेणी में श्रेणीबद्ध करने के मामले को देखें और इस तरह की अधिसूचना जारी होने तक दो महीने की अवधि के भीतर इसके वर्गीकरण को स्पष्ट करते हुए उचित अधिसूचना जारी करें।  नदी रेत खनन को लाल श्रेणी में माना जाता रहेगा।'
 

इसमें कहा गया है कि एक सितंबर से पूरे देश में सहमति के बिना नदी रेत खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी। पीठ ने कहा, ''पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को यह भी निर्देश दिया जाता है कि वह इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से दो महीने की अवधि के भीतर उचित दिशा-निर्देश जारी करे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संबंधित एसपीसीबी/पीसीसी से सीटीई/सीटीओ प्राप्त करने की आवश्यकता पूरे भारत में सभी नदी तल रेत खनन परियोजनाओं पर समान रूप से लागू हो।'
 

इसमें कहा गया है कि मौजूदा मामले में पीपी नागेंद्र सिंह को पट्टे की पांच साल की अवधि के दौरान वैधानिक सहमति के बिना खनन गतिविधि करने की अनुमति दी गई थी। पीठ ने कहा, ''वर्तमान मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से पता चलता है कि पीपी नागेंद्र सिंह ने पर्यावरण कानूनों/मानदंडों का गंभीर उल्लंघन किया है और भूविज्ञान एवं खनन विभाग तथा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संबंधित अधिकारियों ने कर्तव्य का निर्वहन किया है।' पीठ ने कहा, अवैध खनन से सख्ती से निपटा जाना चाहिए और किसी नरमी के सभी परिणाम भुगतने होंगे।

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