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ई-कॉमर्स कंपनियों को नहीं पसंद जीएसटी ड्राफ्ट मॉडल

Fri, 10 Feb 2017 06:38 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 10 Feb 2017 06:38 AM IST
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Rival ecommerce firms together oppose model GST law
सांकेतिक चित्र

ई-कॉमर्स कंपनियों को वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) कानून का ड्राफ्ट मॉडल रास नहीं आ रहा। इस मॉडल का विरोध करने के लिए आपस में एक दूसरे से जबरदस्त प्रतियोगिता रखने वाली तीन सबसे बड़ी ई-कंपनियां अमेजॉन, स्नैपडील व फ्लिपकार्ट बृहस्पतिवार को एक मंच पर नजर आईं।

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जीएसटी के ड्राफ्ट मॉडल में टैक्स कलेक्शन एट सोर्स, यानी, बिक्री के वक्त टैक्स लेने का प्रावधान किया गया है, जो ई-कॉमर्स कंपनियां नहीं चाहती हैं। उनका कहना है कि इस प्रावधान के लागू होने पर ई-कॉमर्स कंपनियों का कारोबार प्रभावित होगा।
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स्नैपडील के सह-संस्थापक व सीईओ कुणाल बहल ने कहा कि जीएसटी देश के लिए भी अच्छा है और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए भी, लेकिन टैक्स एट सोर्स प्रावधान को अनिवार्य करने पर हमारी दिक्कतें बढ़ जाएंगी। इससे हमारी जिम्मेदारी बढ़ जाएंगी और इसका हमारे कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव होगा।
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गलाकट मुकाबला करने वाली कंपनियां विरोध करने आईं एक मंच पर

Rival ecommerce firms together oppose model GST law
सांकेतिक चित्र

फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक व कार्यकारी चेयरमैन सचिन बंसल ने बताया कि ई-कॉमर्स के तहत होने वाले कारोबार पूरी तरह से डिजिटल हैं, जहां पूरी पारदर्शिता है। ऐसे में सरकार उन आंकड़ों के सहारे आसानी से विक्रेताओं से टैक्स वसूल सकती है।

ई-कॉमर्स कंपनियां सरकार से बिक्री के सभी आंकड़ों को साझा करने के लिए तैयार हैं और तीन राज्यों में तो ऐसा शुरू भी हो गया है। ऐसे में सरकार को टैक्स वसूली करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। औद्योगिक संगठन फिक्की के साथ इस मामले में ई-कॉमर्स कंपनियों ने सरकार को अपनी चिंता से वाकिफ करा दिया है। विशेषज्ञों को मुताबिक ई-कॉमर्स कंपनियों को इस बात की चिंता सता रही है कि टैक्स का चक्कर पड़ने पर विक्रेता ई-कॉमर्स से कतराने लगेंगे।

विक्रेताओं के 400 करोड़ रुपये फंस जाएंगे

Rival ecommerce firms together oppose model GST law
सांकेतिक चित्र

क्या है टैक्स एट सोर्स?
टैक्स एट सोर्स प्रावधान के मुताबिक जीएसटी लागू होने पर ई-कॉमर्स कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर आने वाली विक्रेता कंपनियों से उन्हें दो फीसदी का टैक्स लेना होगा और विक्रेता कंपनियों को भुगतान उस दो फीसदी टैक्स को काटकर देना होगा। ई-कॉमर्स कंपनियों का मानना है कि पूरी प्रक्रिया से उनका काम बढ़ेगा और टैक्स की गणना करने पर ज्यादा खर्च करने से उनकी लागत बढ़ जाएगी।

फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक व कार्यकारी चेयरमैन सचिन बंसल ने बताया कि टैक्स एट सोर्स के तहत दो फीसदी की टैक्स कटौती करने पर एक अनुमान के मुताबिक विक्रेता कंपनियों के 400 करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी फंस जाएगी जिसका असर उनके कारोबार पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि टैक्स के प्रावधान होने पर विक्रेता कंपनियां ई-कॉमर्स कंपनियों के प्लेटफॉर्म पर आने से कतराने लगेंगी।

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