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सेहत: शौचालय में बैठकर चलाते हैं फोन तो सावधान हो जाएं; बढ़ रहा बवासीर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा

Mon, 24 Feb 2025 04:50 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Mon, 24 Feb 2025 04:50 AM IST
सार

एक वर्ष में बवासीर और फिस्टुला के 500 से अधिक मामले सामने आए हैं। उन्होंने खराब जीवनशैली की आदतों, जैसे कम पानी पीना, जंक फूड का अत्यधिक सेवन और शौचालय में अधिक समय बिताने को इसके प्रमुख कारण बताया।

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Risk of serious diseases increasing due to use of phone in toilet
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला/एजेंसी

विस्तार

अगर आप भी शौचालय में बैठकर देर तक मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं तो सावधान हो जाएं। डॉक्टरों का कहना है कि इस आदत के चलते बवासीर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि इस आदत के साथ निष्क्रिय जीवनशैली और खराब आहार के कारण मलाशय की नसों पर अधिक दबाव पड़ता है। इसके चलते मलाशय क्षेत्र में दर्द होने लगता है। इस वजह से हैमरॉयड्स यानी पाइल्स यानी बवासीर होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में अक्सर तुरंत चिकित्सा की जरूरत पड़ती है। मुंबई के ग्लेनईगल्स अस्पताल के वरिष्ठ रोबोटिक और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. जिग्नेश गांधी ने इस समस्या को निष्क्रिय जीवनशैली और शौचालय में अत्यधिक फोन के इस्तेमाल से जोड़ा है। डॉ. गांधी ने ओखला में ईएसआईसी अस्पताल में विस्तार से इस समस्या की तरफ ध्यान दिलाया।  

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एक वर्ष में 500 से ज्यादा मामले
ईएसआईसी अस्पताल के सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. रवि रंजन ने बताया कि एक वर्ष में बवासीर और फिस्टुला के 500 से अधिक मामले सामने आए हैं। उन्होंने खराब जीवनशैली की आदतों, जैसे कम पानी पीना, जंक फूड का अत्यधिक सेवन और शौचालय में अधिक समय बिताने को इसके प्रमुख कारण बताया।
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अस्पतालों में बढ़ रहा दबाव
मारेंगो एशिया अस्पताल के सर्जन डॉ. बीरबल ने बताया, खराब आहार से होने वाला पुराना कब्ज और शौचालय में लंबे समय तक बैठे रहने से एक दुष्चक्र बन जाता है। विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या से सरकारी अस्पतालों पर दबाव बढ़ रहा है।
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उपचार में रेडियोफ्रीक्वेंसी प्रक्रिया बेहद कारगर
विशेषज्ञों ने बीमारी की चपेट में आने पर उपचार के लिए स्थानीय एनेस्थीसिया (राफेलो) के तहत बवासीर के रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन जैसी न्यूनतम प्रक्रियाओं को भी उपयोगी बताया। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से अनुमोदित व ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा में व्यापक रूप से इस्तेमाल राफेलो प्रक्रिया, पारंपरिक शल्य चिकित्सा पद्धतियों की तुलना में काफी कारगर है।

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