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कश्मीर में मोहर्रम पर दंगा कराने की साजिश नाकाम, पाकिस्तान के स्लीपर सेल को आसानी से ढूंढा जा सकेगा

Tue, 10 Sep 2019 11:44 AM IST
शिल्पा ठाकुर जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली  Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Tue, 10 Sep 2019 11:44 AM IST
सार

  • कश्मीर में मोहर्रम पर दंगा कराने की पाकिस्तानी साजिश बेनकाब हुई।
  • स्लीपर सेल के जरिए घटना को अंजाम देने की थी साजिश।
  • सुरक्षा बलों ने कश्मीर घाटी में छिपे पाकिस्तान के कई स्लीपर सेल खोज निकाले।
  • तीन दिनों के दौरान दो दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया।

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Riot Conspiracy of Pakistan during Moharram in Kashmir failed 
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : बासित असगर

विस्तार

कश्मीर में स्लीपर सेल के जरिए मोहर्रम पर दंगा कराने की पाकिस्तानी साजिश बेनकाब हो गई है। सेना, इंटेलीजेंस एजेंसियां, अर्धसैनिक बल और जम्मू कश्मीर पुलिस, सभी ने मिलकर कश्मीर घाटी में छिपे पाकिस्तान के कई स्लीपर सेल खोज निकाले हैं। एजेंसियों के सूत्र बताते हैं कि पिछले तीन दिनों के दौरान करीब दो दर्जन से अधिक ऐसे लोगों को हिरासत में लिया गया है जो 10 सितंबर को मोहर्रम के दिन घाटी में दंगा फसाद कराने की साजिश रच रहे थे।

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इंटेलीजेंस एजेंसियों को फोन इंटरसेप्ट के जरिए पाकिस्तान के स्लीपर सेल का पता चला है। सुरक्षा बलों ने अब जो रणनीति बनाई है, उसके जरिए पाकिस्तान के गुर्गों को अब पाताल से भी ढूंढ निकाला जाएगा।
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सैन्य बलों के सूत्रों के अनुसार, ये स्लीपर सेल कश्मीर, गांदरबल, बांदीपोरा, बनिहाल, पुलवामा और अनंतनाग से हिरासत में लिए गए हैं। कई दिनों से इनके लैंड लाइन और मोबाइल फोन सर्विलांस पर लगे थे। अपने गुर्गों को मैसेज भेजने के लिए पाकिस्तान के आतंकी संगठनों ने इंटरनेट सर्विस का भी इस्तेमाल किया था। इनकी योजना थी कि मोहर्रम के दिन कश्मीर सहित घाटी के दूसरे इलाकों में मस्जिदों एवं जियारत (श्राइन) वाले दूसरे स्थानों पर हिंसा फैलाकर माहौल खराब कर दिया जाए।
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बताया जा रहा है कि स्लीपर सेल को शिया और सुन्नी समुदाय के बीच झड़प कराने का भी निर्देश मिला था। स्लीपर सेल से कहा गया था कि जैसे ही किसी इलाके में मोहर्रम पर सुरक्षा पाबंदियां हटें, तो वहीं हमले को अंजाम दे दिया जाए। स्लीपर सेल को हिरासत में लेने के बाद ही जम्मू कश्मीर प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि मोहर्रम के अवसर पर वहां किसी भी तरह की कोई छूट नहीं मिलेगी।

इसके अलावा घाटी में चार स्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया है। इसमें पहले नंबर पर सेना, दूसरे पर अर्धसैनिक बल और तीसरे पर जम्मू कश्मीर पुलिस रहेगी। इनके अलावा सुरक्षा के चौथे घेरे के रूप में एसपीओ की तैनाती की गई है। इन्हें गांवों और कस्बों पर नजर रखने की जिम्मेदारी मिली है। रॉ, आईबी, आर्मी इंटेलीजेंस और जेएंडके पुलिस की खुफिया यूनिट के लोग भी चप्पे चप्पे पर नजर रखे हैं। सुरक्षा के लिहाज से मंगलवार को मोहर्रम पर संचार सेवाएं बंद रहेंगी। इंटरनेट सेवा भी 24 घंटे के लिए बंद कर दी गई है।

पााकिस्तान के गुर्गों को अब पाताल से भी ढूंढ निकालेंगे सैन्य बल

इंटेलीजेंस एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि कश्मीर और घाटी के दूसरे इलाकों में पाकिस्तान के गुर्गें यानी स्लीपर सेल सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। पिछले एक माह के दौरान चार बार जब मोबाइल इंटरनेट की टूजी सेवा चालू की गई थी तो कुछ ही देर में उसके गंभीर परिणाम देखने को मिले थे। इंटरनेट चालू होने के चंद सेकेंड में ही सीमा पार से स्लीपर सेल के पास मैसेज आने लगे थे। इससे एजेंसियों को यह पता लगा था कि घाटी में कितने स्लीपर सेल पूरी तरह सक्रिय हैं।

इस बात की पूरी आशंका थी कि जैसे ही घाटी में मोबाइल इंटरनेट की सुविधा मिलेगी, तो ये सेल घाटी का माहौल खराब करना शुरु कर देंगे। स्लीपर सेल में राजस्व, वन, शिक्षा एवं खेल, परिवहन, दूरसंचार और लोक निर्माण आदि महकमों के स्थायी अस्थायी कर्मी भी शामिल हैं। आतंकियों को धन और दूसरी तरह की मदद पहुंचाना, पत्थरबाजों को तैयार करना, हैंड ग्रेनेड फेंकने के लिए स्कूल-कालेजों के छात्रों को बरगलाना और विभिन्न अवसरों पर नारेबाजी एवं प्रदर्शन करना, ये सभी कार्य स्लीपर सेल को सौंपे जाते हैं।

एनआईए और दूसरी इंटेलीजेंस एजेंसियों ने अब इनके ऐसे नेटवर्क का पता लगा लिया है कि ये स्लीपर सेल जब भी सीमा पार के किसी व्यक्ति से बातचीत करेंगे तो वह जानकारी छिपी नहीं रहेगी। कश्मीर में तैनात सुरक्षा बलों के सूत्रों का कहना है कि ये स्लीपर सेल देश या विदेश में जिस टेलीग्राम चैनल के जरिए बातचीत करते हैं, उसका पता लगा लिया गया है। एनआईए और आईबी ने ऐसे कई चैनलों का पता लगाया है।

आतंकी संगठन अल कायदा द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाला कोशुर कोकूर नाम के टेलीग्राम चैनल सहित कई ऐसे ही दूसरे चैनलों की जानकारी भारतीय एजेंसियों को मिली है। सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल किन उपकरणों के सहारे किया जाता था, उसकी नेटवर्किंग कहां तक फैली थी, सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी पता लगा लिया है।

जम्मू कश्मीर पुलिस, अर्धसैनिक बल और इंटेलीजेंस एजेंसियों ने इन स्लीपर सेल को ढूंढ निकालने के लिए अब एक संयुक्त आॅपरेशन भी शुरु कर दिया है। एजेंसियों का कहना है कि अब स्लीपर सेल अगर पाताल में भी छिपे होंगे तो उन्हें बाहर निकाल लिया जाएगा।
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