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Tamil Nadu: अन्नामलाई और BJP में 18 माह से थे मतभेद, इस्तीफे की इनसाइड स्टोरी आई सामने; भाजपा ने क्या कहा?
Fri, 05 Jun 2026 03:30 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Fri, 05 Jun 2026 03:30 PM IST
सार
Reason Of K Annamalai Resignation: पूर्व तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भाजपा छोड़कर नई राजनीतिक पार्टी बनाने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि वह नई और समावेशी राजनीति शुरू करना चाहते हैं। अन्नामलाई के पिछले 18 महीनों से पार्टी नेतृत्व से मतभेद थे। भाजपा ने उनके जाने को बड़ा नुकसान मानने से इनकार किया है। आइए, इस्तीफे की इनसाइड स्टोरी को समझते हैं...
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अन्नामलाई ने क्यों दिया इस्तीफा?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
तमिलनाडु भाजपा में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान आखिरकार खुलकर सामने आ गई। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर नई राजनीतिक पार्टी बनाने का एलान कर दिया। हालांकि उनके इस्तीफे के पीछे सिर्फ एक दिन या एक फैसला जिम्मेदार नहीं था। पार्टी सूत्रों और अन्नामलाई के बयानों से साफ है कि पिछले करीब 18 महीनों से भाजपा नेतृत्व और अन्नामलाई के बीच मतभेद लगातार बढ़ रहे थे। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि एआईएडीएमके के साथ भाजपा का दोबारा गठबंधन इस पूरे विवाद में ताबूत की आखिरी कील साबित हुआ।
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अन्नामलाई और भाजपा नेतृत्व के बीच मतभेद क्यों बढ़े?
अन्नामलाई ने खुद स्वीकार किया कि वह पिछले डेढ़ साल से पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने दिसंबर 2025 में ही भाजपा नेतृत्व को पार्टी छोड़ने की इच्छा बता दी थी। हालांकि पार्टी ने उनसे विधानसभा चुनाव की तैयारियां पूरी करने को कहा था। अन्नामलाई का मानना था कि तमिलनाडु में भाजपा को स्वतंत्र ताकत के रूप में आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन पार्टी नेतृत्व की रणनीति अलग दिखाई दी। यही कारण था कि समय के साथ उनके और केंद्रीय नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ती चली गई।
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एआईएडीएमके से गठबंधन कैसे बना आखिरी वजह?
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि एआईएडीएमके और भाजपा के बीच दोबारा गठबंधन बनने के बाद अन्नामलाई की नाराजगी और गहरी हो गई थी। अन्नामलाई अपने कार्यकाल के दौरान डीएमके के साथ-साथ एआईएडीएमके पर भी खुलकर हमला बोलते रहे थे। जयललिता को लेकर उनकी टिप्पणी से दोनों दलों के रिश्तों में तनाव आ गया था। बाद में सितंबर 2023 में एआईएडीएमके ने भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया था। लेकिन 2026 विधानसभा चुनाव से पहले जब दोनों दल फिर साथ आए, तो इसे अन्नामलाई की राजनीतिक लाइन के खिलाफ माना गया। इसके बाद अप्रैल 2025 में नैनार नागेंद्रन को तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष बनाया गया और अन्नामलाई संगठन के शीर्ष पद से बाहर हो गए।
क्या अन्नामलाई नई राजनीति की तैयारी में हैं?
इस्तीफे के बाद अन्नामलाई ने साफ कहा कि अब वह नई और समावेशी राजनीति शुरू करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि नई पार्टी आम लोगों की राजनीति करेगी और नए नेताओं को तैयार करेगी। अन्नामलाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति सम्मान जताया, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया कि उनका राजनीतिक रास्ता अब अलग होगा। उनके समर्थकों ने इस्तीफे के बाद पटाखे फोड़े और मिठाइयां बांटी। इससे साफ संकेत मिला कि अन्नामलाई अपनी अलग राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुट चुके हैं।
भाजपा और दूसरे दलों की प्रतिक्रिया क्या रही?
तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने कहा कि अन्नामलाई के जाने से भाजपा को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है और उसकी राजनीति किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं करती। वहीं डीएमके नेताओं ने दावा किया कि अन्नामलाई भविष्य में भी भाजपा की विचारधारा के करीब रहेंगे। दूसरी ओर एमडीएमके नेता दुरई वाइको ने अन्नामलाई के फैसले का स्वागत किया। अब तमिलनाडु की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अन्नामलाई अपनी नई पार्टी के जरिए भाजपा और द्रविड़ दलों दोनों को चुनौती दे पाएंगे।