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क्या TMC के बागियों में पड़ी दरार?: मंगल मिलन बैठक से रहे नदारद, NCPI के तीन मुस्लिम सांसदों ने बनाई दूरी

Tue, 04 Aug 2026 08:13 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 04 Aug 2026 08:13 PM IST
सार

एनडीए की 'मंगल मिलन' बैठक से एनसीपीआई के तीन सांसदों की लगातार दूसरी बार गैरमौजूदगी ने टीएमसी से अलग हुए 20 सांसदों के समूह में मतभेद की अटकलों को हवा दे दी है। तीनों सांसदों ने भाजपा और एनडीए से दूरी बनाए रखने की बात कही, जबकि समूह के अन्य नेता एकजुटता का दावा कर रहे हैं। 

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Rift among breakaway TMC MP Absent from Mangal Milan meeting three Muslim MPs kept their distance
TMC के बागी सांसद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और एनडीए के सहयोगी दलों के नेताओं ने मंगलवार को संसद परिसर में आयोजित सत्तारूढ़ गठबंधन की साप्ताहिक संसदीय बैठक 'मंगल मिलन' में हिस्सा लिया। हालांकि, इस बैठक में एनसीपीआई के तीन सांसदों खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान और यूसुफ पठान की अनुपस्थिति सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रही। टीएमसी से अलग हुए 20 सांसदों के इस समूह के भीतर एनडीए के साथ रिश्तों को लेकर मतभेद के संकेत भी सामने आ रहे हैं। इससे पहले 28 जून को हुई पहली 'मंगल मिलन' बैठक में भी ये तीनों सांसद शामिल नहीं हुए थे।

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क्या बोले अबू ताहेर खान, क्यों बनाई NDA से दूरी?
संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अबू ताहेर खान ने साफ कहा कि हम एनडीए के साथ नहीं हैं और न ही भाजपा में जा रहे हैं। आज भी एनडीए की बैठक थी, लेकिन हम तीनों उसमें शामिल नहीं हुए। हालांकि मुख्यमंत्री (सुवेंदु अधिकारी) द्वारा बुलाई गई बैठक में जरूर जाएंगे क्योंकि वह मेरे संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों से जुड़ी है। साथ ही हम मुसलमानों के खिलाफ किसी भी कदम का समर्थन नहीं करेंगे। 
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शुभेंदु अधिकारी के संसद पहुंचने के क्या मायने हैं?
मंगलवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी संसद भवन पहुंचे। हालांकि उनके दौरे को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई, लेकिन इसे राजनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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क्या मुस्लिम बहुल सीटों का दबाव बना वजह?
सूत्रों के अनुसार, जंगीपुर, मुर्शिदाबाद और बहारामपुर जैसे मुस्लिम बहुल लोकसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन तीन सांसदों ने अपने मतदाताओं की नाराजगी को देखते हुए एनडीए की बैठक से दूरी बनाए रखी। मतदाताओं के बीच भाजपा के साथ उनकी कथित नजदीकी को लेकर सवाल उठ रहे थे।
इन तीन सांसदों की अनुपस्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि लोकसभा में 20 सदस्यीय एनसीपीआई समूह को अभी तक स्पीकर ओम बिरला से आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है।

दल-बदल कानून के तहत क्या चुनौती सामने है?
यदि यह अलग हुआ समूह दल-बदल विरोधी कानून के तहत संरक्षण चाहता है, तो उसे टीएमसी के मूल 28 लोकसभा सांसदों में से कम से कम दो-तिहाई यानी आवश्यक संख्या अपने साथ होने का दावा साबित करना होगा। ऐसे में किसी भी तरह की अंदरूनी असहमति उनके लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है।

क्या बोले फ्लोर लीडर सुदीप बंद्योपाध्याय?
एनसीपीआई के फ्लोर लीडर सुदीप बंद्योपाध्याय भी मंगलवार को पहली बार एनडीए संसदीय दल की बैठक में शामिल हुए। वे 28 जून की बैठक में मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा कि मैं देश के सबसे वरिष्ठ सांसदों में से एक हूं। एनसीपीआई पूरी तरह एकजुट है। यह एक अच्छा अनुभव रहा। उन्होंने बागी सांसदों के बीच मतभेद की अटकलों को खारिज करने की कोशिश की।


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बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के साथ कौन-कौन रहा मौजूद?
संसद परिसर में आयोजित बैठक में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बगल में बैठे नजर आए। बैठक में जदयू, जेडीएस, एनसीपी, शिवसेना सहित एनडीए के अन्य सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री बैठक में उपस्थित रहे।  

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