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SC: जस्टिस वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने से इनकार करने के फैसले की हो समीक्षा, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

Tue, 19 Aug 2025 08:18 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Tue, 19 Aug 2025 08:18 PM IST
सार

तीन वकीलों और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की ओर से दायर याचिका को सात अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहकर खारिज कर दिया था कि याचिकाकर्ता एफआईआर दर्ज करने के लिए सरकार या पुलिस को दिया गया कोई अभ्यावेदन नहीं दिखा सके। अब इस फैसले की समीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

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Review of decision of refusing to register FIR against Justice Verma, petition filed in Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

घर से भारी मात्रा में नकदी बरामद होने के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर याचिका दायर की गई है। याचिका में शीर्ष अदालत के जस्टिस वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार करने के फैसले की समीक्षा की मांग की गई। 
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तीन वकीलों और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की ओर से दायर याचिका को सात अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहकर खारिज कर दिया था कि याचिकाकर्ता एफआईआर दर्ज करने के लिए सरकार या पुलिस को दिया गया कोई अभ्यावेदन नहीं दिखा सके। जस्टिस दीपांकर दत्ता और एजी मसीह की पीठ ने कहा था कि हमें यह निष्कर्ष निकालने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि याचिकाकर्ताओं ने एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए कभी भी पुलिस से संपर्क नहीं किया।
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पीठ ने कहा था कि 16 मई, 2025 का अभ्यावेदन तो दूर की बात है, जबकि इस अदालत ने पहले ही उन्हें स्वतंत्रता दे दी थी। कानून की प्रक्रिया के साथ-साथ इस अदालत के दुरुपयोग और याचिकाकर्ताओं द्वारा शपथ पर गलत बयान देने के इन दो आधारों पर हम हस्तक्षेप न करने के लिए बाध्य महसूस करते हैं।
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अब अधिवक्ता मैथ्यूज जे नेदुम्परा और अन्य द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका में कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले में रिकॉर्ड को देखते हुए स्पष्ट त्रुटि थी।

आंतरिक जांच में भी दोषी पाए गए थे जस्टिस वर्मा
14 मार्च को राष्ट्रीय राजधानी स्थित न्यायाधीश वर्मा के सरकारी आवास से भारी मात्रा में जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। हालांकि जस्टिस वर्मा ने इन नोटों से अनभिज्ञता जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जांच के लिए एक समिति गठित की, जिसने अपने रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को दोषी पाया था। 7 अगस्त 2025 को, सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने नकदी बरामदगी मामले में कदाचार का दोषी पाए जाने वाली आंतरिक जांच रिपोर्ट को अमान्य करने की मांग की थी।


लोकसभा स्पीकर ने आरोपों की जांच के लिए बनाई है कमेटी
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा में पेश हुआ था। इसे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मंजूरी दे दी। साथ ही लोकसभा स्पीकर ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया। समिति में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और कानूनविद् बी. वी. आचार्य का नाम शामिल है। जांच समिति की रिपोर्ट मिलने तक महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा में लंबित रहेगा।

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