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Poliovirus in Sewage: कोलकाता में सीवेज के नमूने में पोलियो वायरस का दावा करने वाली रिपोर्ट गलत, विशेषज्ञों ने आशंकाओं को किया खारिज

Wed, 15 Jun 2022 10:20 PM IST
Amit Mandal एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 15 Jun 2022 10:20 PM IST
सार

पिछली बार 2018 में दिल्ली में इस तरह के वीडीपीवी (VDPV) का पता चला था। हालांकि कोलकाता में सीवेज सैंपल में पोलियो वायरस की बात गलत बताई जा रही है।  

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Reports making claims of poliovirus in sewage sample in Kolkata are incorrect 
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

कोलकाता में सीवेज के नमूने में पोलियो वायरस का दावा करने वाली रिपोर्ट गलत है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी है। पिछली बार 2018 में दिल्ली में इस तरह के वीडीपीवी (VDPV) का पता चला था। एनआईवी (NIV) मुंबई ने आनुवंशिक अनुक्रमण किया और डब्ल्यूएचओ के साथ भी इस पर चर्चा की है। यह किसी भी देश में हो सकता है जहां ओरल पोलियो टीका दिया जाता है।  
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आशंकाओं को किया दरकिनार 
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोलकाता में आठ वर्ष पहले खत्म हो चुके खतरनाक पोलियो वायरस के दोबारा पाए जाने की आशंकाओं के दरकिनार कर दिया है। विशेषज्ञों ने शहर के सीवेज में मिले वायरस का अध्ययन किया और इसे निष्क्रिय पाया है। पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि शहर के मेटियाब्रुज इलाके में सीवेज में पाया गया पोलियो वायरस एक 'वैक्सीन वायरस' है और इससे कोई खतरा नहीं है।

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उन्होंने कहा कि क्योंकि यह वाइल्ड वायरस है, इसलिए चिंता करने की कोई बात नहीं है। पोलियोमाइलाइटिस (पोलियो) एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य सेवा निदेशक (डीएचएस) डॉ. सिद्धार्थ नियोगी ने बताया कि हमने सभी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों से अपने-अपने क्षेत्रों में आवश्यक निगरानी कार्यक्रम चलाने को कहा है। 

पोलियो वायरस का पता लगाने के लिए आम शौचालय, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों की नालियों जैसे विभिन्न स्थानों पर निगरानी की जाती है। राज्य के स्वास्थ्य सेवा विभाग ने कहा कि वैक्सीन वायरस का पता लगना असामान्य नहीं है, यह काफी स्वाभाविक है। इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है। निगरानी एक सतत प्रक्रिया है और कुछ समय के लिए जारी रहेगी। अस्पतालों में नियमित निगरानी के अलावा, हमने कमजोर प्रतिरक्षा वाले बच्चों पर निगरानी रखने का एक विशेष निर्देश दिया है। 

पश्चिम बंगाल में आखिरी बार पोलियो का मामला हावड़ा जिले में 2011 में सामने आया था, जब दो साल की एक बच्ची में यह बीमारी पाई गई थी।

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