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Covid Labs: पहली बार कोविड लैब की गुणवत्ता को लेकर किया गया अध्ययन, 93% का काम अच्छा
Tue, 20 Sep 2022 06:01 AM IST
निर्मल कांत
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 20 Sep 2022 06:01 AM IST
सार
अधिकांश प्रयोगशालाएं गुणवत्ता के सभी पैमानों पर पूरी तरह से खरी उतरी हैं। अध्ययन के दौरान लगभग एक समान लैब में आरएनए निष्कर्षण मैनुअल और अत्याधुनिक मशीनों के जरिये होता पाया गया।
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कोविड टेस्ट लैब (सांकेतिक)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कोरोना महामारी के चलते 20 माह में देश में एक से तीन हजार तक पहुंचीं कोविड प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता रिपोर्ट अब सामने आई है। नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के विशेषज्ञों ने इन सभी प्रयोगशालाओं की बाहरी गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम (ईक्यूए) पैमाने के आधार पर जांच की, जिनमें सरकारी और निजी दोनों तरह की प्रयोगशालाएं शामिल हैं। तीन हजार में से 953 की जांच की गई।
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इसमें पाया कि 93% (891) प्रयोगशालाओं ने 80% या इससे अधिक का ईक्यूए स्कोर किया, जबकि सात फीसदी लैब का स्कोर कम मिला है, जिसके आधार पर आईसीएमआर ने इनकी गुणवत्ता में तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं।
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अध्ययन के दौरान आईसीएमआर ने सभी प्रयोगशालाओं को एक-एक प्रश्नावली भेजी थी। इसके आधार पर इनकी क्षमता के साथ-साथ कमियों पर भी चर्चा की है। इस अध्ययन की एक रिपोर्ट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भी सौंपी गई है।
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इस तरह बढ़ी संख्या
आईसीएमआर के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा, 2020 में जब कोरोना महामारी आई तब देश में केवल एक लैब पुणे एनआईवी के रूप में थी। इसके बाद सितंबर, 2021 तक इन प्रयोगशालाओं की संख्या 2951 तक पहुंच गई थी, जहां आरटी पीसीआर सैंपल की जांच हो रही है। महज 20 महीने में इतनी लैब खुलने का एक मतलब कमजोर गुणवत्ता को जोड़कर भी देखा जा रहा था। इसी का पता लगाने के लिए आईसीएमआर ने यह अध्ययन पूरा किया है जो इससे पहले कभी नहीं हुआ था।
अच्छी स्थिति में अधिकांश प्रयोगशालाएं
एक अधिकारी ने कहा, अधिकांश प्रयोगशालाएं गुणवत्ता के सभी पैमानों पर पूरी तरह से खरी उतरी हैं। अध्ययन के दौरान लगभग एक समान लैब में आरएनए निष्कर्षण मैनुअल और अत्याधुनिक मशीनों के जरिये होता पाया गया।
अध्ययन के दौरान, आईसीएमआर ने प्रत्येक लैब को पांच-पांच सैंपल जांच के लिए भेजे थे। इस दौरान 641 (67.3%) प्रयोगशालाओं ने सभी सैंपल की जांच सही तरह से पूरी की जबकि 250 (26.2%) प्रयोगशालाओं में एक से चार सैंपल तक ही जांच हो पाई। इनके अलावा 62 (6.5%) प्रयोगशालाओं में एक, दो या तीसरे सैंपल की जांच भी सही तरह से नहीं हो सकी।