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Report: भारत में लोगों ने डाटा चोरी से इस साल झेला 22 करोड़ का नुकसान, दुनिया में सबसे अधिक
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : amar ujala
भारत में इस साल डाटा उल्लंघन के कारण नुकसान 13 फीसदी बढ़कर 22 करोड़ रुपये हो गई है। आईबीएम की बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल पहले यह 19.5 करोड़ रुपये थी।
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आईबीएम की रिपोर्ट में कहा गया है कि लागत में वृद्धि के बावजूद, कृत्रिम बुद्धिमत्ता में सुरक्षा की अभी कमी है। व्यक्तिगत जानकारी निकालने के लिए सबसे ज्यादा फिशिंग या धोखाधड़ी वाले संचार भेजने जैसे साधन का इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल 18 फीसदी डाटा चोरी में किया जाता है। इसके बाद तीसरे पक्ष के वेंडर और आपूर्ति शृंखला के वादे के जरिये 17 फीसदी डाटा चोरी होती है। आईबीएम इंडिया और दक्षिण एशिया के प्रौद्योगिकी उपाध्यक्ष विश्वनाथ रामास्वामी ने कहा, हालांकि एआई तेज़ी से व्यावसायिक कार्यों में शामिल हो रहा है लेकिन सुरक्षा और गवर्नेंस पीछे छूट रहे हैं। एक्सेस कंट्रोल और एआई गवर्नेंस टूल्स का अभाव सिर्फ एक तकनीकी चूक नहीं बल्कि एक रणनीतिक कमजोरी है। कंपनी दो दशक से डाटा उल्लंघन की लागत रिपोर्ट तैयार कर रही है और इसके लिए लगभग 6,500 डेटा उल्लंघनों की जाच कर चुकी है।
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अनुसंधान क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान
भारत में अनुसंधान क्षेत्र को डाटा उल्लंघनों का सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ा, जिसकी औसत लागत 28.9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके बाद परिवहन उद्योग में 28.8 करोड़ रुपये और औद्योगिक क्षेत्र में 26.4 करोड़ रुपये का स्थान रहा।
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60% संगठनों के पास एआई नीति नहीं : रिपोर्ट में कहा, एआई उपयोग के बीच, डाटा उल्लंघन का शिकार हुए 60% संगठनों के पास एआई गवर्नेंस नीति नहीं है। संगठन इसे दरकिनार कर अभी करो एआई को अपना रहे हैं