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रहें सतर्क: टी बैग की हर चुस्की में माइक्रोप्लास्टिक के लाखों कण, आंत-रक्त के जरिये अन्य अंगों तक पहुंचते हैं

Thu, 02 Jan 2025 04:57 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 02 Jan 2025 04:57 AM IST
सार

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन माइक्रोप्लास्टिक के कणों का आकार एक माइक्रोमीटर से पांच मिलीमीटर के बीच होता है। इन महीन कणों में जहरीले प्रदूषक और केमिकल होते हैं जो सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक हैं। प्लास्टिक के ये टी-बैग आमतौर पर नायलॉन-6, पॉलीप्रोपाइलीन और सेल्यूलोज जैसी चीजों से बने होते हैं। 

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Report Every sip of tea made from tea bag contains millions of microplastic particles
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik.com

विस्तार

टी बैग से बनी चाय सेहत के लिए सुरक्षित नहीं है। इसकी हर चुस्की में माइक्रोप्लास्टिक के लाखों कण हो सकते हैं। ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी ऑफ बार्सिलोना (यूएबी) से जुड़े वैज्ञानिकों के अध्ययन में सामने आया है कि पॉलिमर बेस्ड टी बैग गर्म पानी में डालने के बाद माइक्रो और नैनोप्लास्टिक्स (एमएनपीएल) के लाखों कण छोड़ते हैं जो आंत और रक्त के जरिये शरीर के अन्य अंगों तक पैठ बना सकते हैं। अध्ययन के नतीजे जर्नल केमोस्फीयर में प्रकाशित हुए हैं।

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शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन माइक्रोप्लास्टिक के कणों का आकार एक माइक्रोमीटर से पांच मिलीमीटर के बीच होता है। इन महीन कणों में जहरीले प्रदूषक और केमिकल होते हैं जो सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक हैं। प्लास्टिक के ये टी-बैग आमतौर पर नायलॉन-6, पॉलीप्रोपाइलीन और सेल्यूलोज जैसी चीजों से बने होते हैं। इस अध्ययन में अलग-अलग तरह के टी-बैग में मौजूद प्लास्टिक के इन महीन कणों की पहचान की गई है।
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पॉलीप्रोपाइलीन टी-बैग से निकलते हैं 120 करोड़ तक कण
पॉलीप्रोपाइलीन के बने टी बैग से प्रति मिलीलीटर 120 करोड़ कण निकलते हैं। इनका औसत आकार करीब 137 नैनोमीटर होता है, जबकि सेल्यूलोज से बने टी बैग से प्रति मिलीलीटर 13.5 करोड़ कण मुक्त हुए और इनका औसत आकर 244 नैनोमीटर होता है।

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  • इसी तरह नायलॉन-6 से बने टी बैग्स से प्रति मिलीलीटर 81.8 लाख कण निकले और यह आकार में औसत 138 नैनोमीटर के थे। परीक्षण से पता चला कि बलगम बनाने वाली कोशिकाओं ने सबसे अधिक सूक्ष्म कणों और नैनोप्लास्टिक को अवशोषित किया। कुछ कण तो कोशिका के नाभिक तक भी पहुंच गए।

पूरे शरीर में फैल सकते हैं
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह पहला मौका है जब इस बात की पुष्टि हुई है कि टी बैग से छोड़े प्लास्टिक के महीन कणों को आंतों की कोशिकाएं अवशोषित करती हैं और ये कण रक्त में प्रवेश कर सकते हैं। इस तरह यह पूरे शरीर में फैल सकते हैं। इन कणों को अवशोषित करने में इंटेस्टाइनल म्यूकस की भी भूमिका होती है, जो पाचन में मदद करता है।



समय रहते सतर्क होने की जरूरत
इससे पहले वैज्ञानिकों को इन्सानी रक्त, नसों, फेफड़ों, गर्भनाल और अन्य अंगों के साथ-साथ दिमाग में भी माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी के सबूत मिल चुके हैं मिले हैं। इन्सानी अंगों के साथ दूध, सीमन और यूरिन में भी इनकी उपस्थिति पाई गई है। अगर समय रहते सतर्क न हुआ गया तो भविष्य में और भी बहुत बड़ी परेशानी पैदा करेंगे।

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