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Report: चिकित्सकीय पागलपन आरोपी को बरी करने का आधार नहीं, संसदीय समिति की सिफारिश

Sun, 12 Nov 2023 04:56 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Sun, 12 Nov 2023 04:56 AM IST
सार

भाजपा सांसद बृजलाल की अध्यक्षता वाली समिति ने यह भी सिफारिश की है कि नए आपराधिक कानून में ‘मानसिक बीमारी’ शब्द ‘विक्षिप्त दिमाग’ में बदल दिया जाए। प्रस्तावित तीन नए आपराधिक कानूनों की जांच के बाद तैयार रिपोर्ट में सिमति ने ये टिप्पणियां की हैं।

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Report: Clinical insanity is not a ground for acquitting the accused, recommends parliamentary committee
पूर्व डीजीपी और भाजपा सांसद बृजलाल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गृह मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने कहा है कि महज चिकित्सकीय पागलपन किसी आरोपी को बरी करने का आधार नहीं हो सकता। वैध बचाव का दावा करने के लिए कानूनी पागलपन साबित करना जरूरी है।

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भाजपा सांसद बृजलाल की अध्यक्षता वाली समिति ने यह भी सिफारिश की है कि नए आपराधिक कानून में ‘मानसिक बीमारी’ शब्द ‘विक्षिप्त दिमाग’ में बदल दिया जाए। प्रस्तावित तीन नए आपराधिक कानूनों की जांच के बाद तैयार रिपोर्ट में सिमति ने ये टिप्पणियां की हैं। समिति ने पाया कि भादसं में विकृत दिमाग का व्यक्ति, न्यायिक मिसालों के अनुसार प्रतिबंधित व्याख्या है और आरोपी के लिए बचाव के रूप में मौजूद है। ब्यूरो
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मानसिक बीमारी शब्द का अर्थ ज्यादा व्यापक
संसदीय समिति ने कहा कि मानसिक बीमारी शब्द अस्वस्थ दिमाग की तुलना में अपने अर्थ में बहुत व्यापक है, क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि इसके दायरे में मूड स्विंग या स्वैच्छिक नशा भी शामिल है।

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