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Cabinet Meeting: सरकार ने हटाए जाने वाले 71 पुराने कानूनों को किया खत्म, संसद में भी आएगा नया विधेयक

Fri, 12 Dec 2025 07:55 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Fri, 12 Dec 2025 07:55 PM IST
सार

Cabinet Nod to Repeal 71 Laws: केंद्र सरकार ने देश के कानूनी ढांचे को सरल बनाने के लिए 71 पुराने और बेकार हो चुके कानूनों को हटाने वाला विधेयक मंजूर किया है। इनमें 65 संशोधन कानून और 6 मूल कानून शामिल हैं, जिनका अब कोई उपयोग नहीं है।
 

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Repeal old laws India Cabinet decision obsolete acts amendment removal principal acts legal reform
कानून (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStoke

विस्तार

केंद्र सरकार ने देश के कानूनी ढांचे को सरल और अपडेटेड बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उन कानूनों को हटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिनका अब कोई उपयोग नहीं रह गया है। सरकार ने कुल 71 पुराने कानूनों को खत्म करने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दी है। इनमें ऐसे कानून भी शामिल हैं जो दशकों पहले के हैं और अब किसी काम के नहीं हैं।

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सरकार की जानकारी के अनुसार, कुल 71 कानूनों में से 65 कानून सिर्फ पुराने संशोधन (अमेंडमेंट) हैं, जिन्हें पहले ही मूल कानून में शामिल किया जा चुका है। इसके अलावा 6 मूल कानून (प्रिंसिपल एक्ट) भी खत्म किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, इन हटाए जाने वाले कानूनों में से कम से कम एक ब्रिटिश काल का पुराना कानून भी शामिल है। इनका अब किसी प्रकार का प्रशासनिक या कानूनी उपयोग नहीं है।
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क्यों जरूरी थी पुरानी कानूनों की सफाई
सरकार का कहना है कि जब संसद कोई संशोधन पास कर देती है, तो वह मूल कानून में शामिल हो जाता है। इसके बावजूद वह संशोधन अलग से भी रिकॉर्ड में बना रहता है, जिससे कानूनों की सूची में अनावश्यक भीड़ हो जाती है। इससे सरकारी सिस्टम में भ्रम बढ़ता है और आम लोगों के लिए कानूनों को समझना मुश्किल होता है।
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हटाए जाने वाले कानूनों की असल वजह
कानून मंत्रालय के अनुसार, जिन कानूनों को हटाया जा रहा है वे अब "उपयोगहीन" हैं। न तो उनका उपयोग अदालतों में हो रहा है और न ही किसी सरकारी कामकाज में। अधिकारियों ने साफ किया है कि यह कदम औपनिवेशिक कानूनों को हटाने का अभियान नहीं है, बल्कि उन कानूनों को हटाने का है जो अब भारत के प्रशासनिक ढांचे के लिए जरूरी नहीं रहे।

सरकार ने पिछले वर्षों में भी बहुत पुराने और बेकार हो चुके कानूनों को हटाने की प्रक्रिया लगातार जारी रखी है। अब तक 1,562 पुराने कानूनों को पहले ही खत्म किया जा चुका है। सरकार ने बताया कि देश के कानूनों को आधुनिक बनाने और उन्हें सरल बनाकर जनता के लिए समझ में आने योग्य बनाने की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

अधिकारियों ने क्या कहा?
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुराने संशोधन कानून रखने का कोई मतलब नहीं रह जाता है। उन्होंने स्पष्ट कहा—“जब संशोधन मूल कानून में शामिल हो जाता है, तो पुराना एक्ट फाइलों में पड़ा सिर्फ कानूनों की संख्या बढ़ाता है। इससे रिकॉर्ड क्लटर होता है और कानूनों को लेकर भ्रम बढ़ता है।” इसलिए इसे हटाना जरूरी था।

संसद में आएगा नया विधेयक
सरकार अब इन 71 कानूनों को हटाने के लिए संसद में नया विधेयक पेश करेगी। विधेयक पास होते ही ये सभी कानून स्टैच्यूट बुक से हट जाएंगे। इससे देश का कानूनी ढांचा और साफ-सुथरा व सरल बनेगा। सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक गति और न्यायिक प्रक्रिया दोनों को तेजी मिलेगी।


कानून व्यवस्था पर क्या असर होगा
पुराने कानूनों की सफाई का असर अदालतों और सरकारी दफ्तरों में भी दिखेगा। नए और जरूरत के अनुसार सुधारित कानूनों पर काम आसान होगा। वकीलों, छात्रों और आम लोगों के लिए कानूनों को समझना भी सरल हो जाएगा। सरकार का कहना है कि साफ और अपडेटेड कानूनों से शासन की पारदर्शिता बढ़ेगी।

केंद्र सरकार लंबे समय से कानून व्यवस्था को आधुनिक तकनीक और जरूरतों के अनुसार बेहतर बनाने पर जोर दे रही है। इस फैसले को उसी दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में भी ऐसे बेकार कानूनों की पहचान कर उन्हें हटाया जाता रहेगा।


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