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रेंट पर गरबा पार्टनर विज्ञापन पर बवाल: भाजपा विधायक ने मुंबई पुलिस से की शिकायत; ठगी-ब्लैकमेलिंग की जताई आशंका
Tue, 22 Sep 2026 04:46 PM IST
सुनील मेहरोत्रा
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: सुनील मेहरोत्रा
Updated Tue, 22 Sep 2026 04:46 PM IST
सार
मुंबई में रेंट पर गरबा पार्टनर विज्ञापन को लेकर विवाद बढ़ गया है। भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने पुलिस आयुक्त देवेन भारती से शिकायत कर जांच की मांग की है। विज्ञापन में अलग-अलग पैकेज का दावा है। आखिर मामला क्या है? आइए, जानते हैं...
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‘रेंट पर गरबा पार्टनर’ विज्ञापन के पीछे कौन?
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
नवरात्रि शुरू होने से पहले सोशल मीडिया पर सामने आए 'रेंट पर गरबा पार्टनर' विज्ञापन को लेकर मुंबई में विवाद खड़ा हो गया है। विज्ञापन में पैसे लेकर गरबा खेलने के लिए पार्टनर उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। मामले को गंभीर बताते हुए भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती से शिकायत कर जांच की मांग की है। विधायक ने आशंका जताई है कि विज्ञापन की आड़ में लोगों के साथ ठगी, ब्लैकमेलिंग या जिस्मफरोशी जैसी आपराधिक गतिविधि को अंजाम दिया जा सकता है।
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सोशल मीडिया पर चल रहा विज्ञापन
बोरीवली स्थित सेवालय कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में संजय उपाध्याय ने बताया कि इंस्टाग्राम पर 'रेंट अ गरबा पार्टनर' नाम से एक विज्ञापन प्रसारित हो रहा है। उनके मुताबिक, विज्ञापन में अलग-अलग समय और पैकेज के हिसाब से रकम तय की गई है।
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विधायक के अनुसार, विज्ञापन में एक घंटे के लिए सिल्वर श्रेणी के गरबा पार्टनर की कीमत 1000 रुपये बताई गई है। वहीं गोल्ड और प्लेटिनम के लिए 1500 और 2000 रुपये के पैकेज का दावा किया गया है। विज्ञापन में दो-तीन घंटे से लेकर 24 घंटे तक पार्टनर उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।
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24 घंटे तक पार्टनर उपलब्ध कराने पर उठाए सवाल
संजय उपाध्याय ने सवाल उठाया कि आखिर किस तरह के गरबा आयोजन में पैसे देकर पार्टनर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने खास तौर पर 24 घंटे तक पार्टनर उपलब्ध कराने के दावे पर सवाल खड़े किए।
विधायक के मुताबिक, विज्ञापन में इस्तेमाल की गई भाषा लोगों को आकर्षित कर किसी संभावित जाल में फंसाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, इन आशंकाओं की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
ठगी और ब्लैकमेलिंग की आशंका
भाजपा विधायक ने आशंका जताई कि विज्ञापन के पीछे कोई गिरोह सक्रिय हो सकता है। उनके मुताबिक, लोगों को पहले आकर्षित किया जा सकता है और बाद में उनके साथ पैसे की ठगी, ब्लैकमेलिंग या जिस्मफरोशी जैसी आपराधिक गतिविधियां की जा सकती हैं। उन्होंने पुलिस से विज्ञापन चलाने वाले लोगों और इससे जुड़े अन्य व्यक्तियों की पहचान करने की मांग की है। साथ ही पूरे मामले की साइबर जांच कराने की अपील की है।
मोबाइल नंबर और पैसों के लेन-देन की जांच की मांग
उपाध्याय ने पुलिस और साइबर सेल से विज्ञापन के स्रोत की जांच करने को कहा है। उन्होंने इससे जुड़े मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और पैसों के संभावित लेन-देन की भी जांच की मांग की है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि हिंदू समाज का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दौरान परिवारों के साथ बच्चे और बुजुर्ग भी बड़ी संख्या में गरबा आयोजनों और देवी दर्शन के लिए निकलते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर इस तरह के विज्ञापन सामने आने को लेकर उन्होंने चिंता जताई। विधायक ने मांग की है कि जांच के दौरान यदि किसी तरह की आपराधिक गतिविधि सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए।