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Tribute to Shankar Suhail: देश के मौजूदा हालात से चिंतित रहते थे जाने माने रंगकर्मी शंकर सुहैल

Wed, 05 Apr 2023 06:49 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 05 Apr 2023 06:49 PM IST
सार

Tribute to Shankar Suhail: निशांत नाट्य मंच के संस्थापक शमसुल इस्लाम और नीलिमा शर्मा ने शंकर सुहैल के निधन को तरक्कीपसंद रंगमंच की धारा के लिए एक बड़ा नुकसान बताया है और कहा है कि सुहैल ने आखिरी वक्त तक खुद को रंगकर्म के प्रति समर्पित रखा और थिएटर को जनता से जोड़ने के पक्षधर रहे...

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Renowned artist Shankar Suhail used to be worried about the current situation in the country
Shankar Suhail - फोटो : Agency

विस्तार

जाने-माने रंगकर्मी, फिल्मकार और समाजवादी आंदोलन के सक्रिय संस्कृतिकर्मी शंकर सुहैल नहीं रहे। दिल्ली के एक अस्पताल में 85 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। सुहैल भारत सरकार के फिल्म और ड्रामा प्रभाग के निदेशक थे और उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार ने उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा देते हुए उत्तर प्रदेश संस्कृत आयोग का अध्यक्ष बनाया था। समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र के बेहद करीबी रहे शंकर सुहैल ने दूरदर्शन के लिए तमाम चर्चित और साहित्यिक धारावाहिक बनाए, साथ ही मशहूर फिल्मकार बिमल राय और प्रकाश मेहरा के साथ भी उन्होंने कई फिल्मों के लिए काम किया। बाद में फिल्मों की दुनिया उन्हें रास नहीं आई और दिल्ली औऱ उत्तर प्रदेश में उन्होंने रंगमंच के लिए काफी काम किया। कई मशहूर नाटकों का मंचन करते हुए उन्होंने रंगमंच को समृद्ध करने में खासा योगदान दिया।

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निशांत नाट्य मंच के संस्थापक शमसुल इस्लाम और नीलिमा शर्मा ने शंकर सुहैल के निधन को तरक्कीपसंद रंगमंच की धारा के लिए एक बड़ा नुकसान बताया है और कहा है कि सुहैल ने आखिरी वक्त तक खुद को रंगकर्म के प्रति समर्पित रखा और थिएटर को जनता से जोड़ने के पक्षधर रहे।

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राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के शुरुआती दौर में इब्राहिम अल्काजी के साथ उन्होंने रंगमंच की बारीकियां सीखीं और फिर लंबे समय तक रंगमंच की दुनिया से जुड़े रहे। सोशल मीडिया के इस ज़माने में भी इन मंचों पर बहुत सक्रिय तो नहीं रहते थे, लेकिन देश के हालात पर उनकी चिंता अकसर नज़र आ जाती थी। हाल ही में रामनवमी के दौरान हुई हिंसा पर उन्होंने कुछ पोस्ट शेयर किए थे और चिंता जताई थी कि आखिर आजकल ये क्या हो रहा है। रामनवमी या ऐसे मौकों पर निकलने वाली शोभायात्राओं पर भी उनकी टिप्पणी होती थी कि अब देश में ऐसी यात्राओं का नया रिवाज़ चल गया है। नफरत की राजनीति पर शंकर सुहैल अपनी चिंता जताते रहते थे।

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9 मार्च 1942 को जन्मे शंकर सुहैल इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए डॉ. जनेश्वर मिश्र के काफी करीब रहे। शुरुआत में कम्युनिस्ट और उसके बाद समाजवादी विचारधारा ने उन्हें काफी प्रभावित किया। डीडी उर्दू के लिए उन्होंने सफ़र नाम का धारावाहिक बनाया था, जो देश के जाने-माने लेखकों की उत्कृष्ट कहानियों पर आधारित था। मनोहर सिंह औऱ राजेन्द्र गुप्ता समेत एनएसडी के तमाम कलाकारों के साथ उन्होंने दूरदर्शन के लिए कई धारावाहिक बनाए और राज बब्बर सरीखे कलाकारों को भी आगे लाने में उनकी अहम भूमिका रही।

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