{"_id":"5a1a93bd4f1c1bd1408b9246","slug":"remember-every-second-of-that-day-9-years-after-26-11-attacks","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"26\/11 अटैक को पूरे हुए 9 साल, पीड़ित बोले- उस पल को याद कर कांप जाती है रूह","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
26/11 अटैक को पूरे हुए 9 साल, पीड़ित बोले- उस पल को याद कर कांप जाती है रूह
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 26 Nov 2017 03:49 PM IST
विज्ञापन
mumbai attack
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुंबई में हुए 26/11 हमले को आज 9 साल हो गए हैं, लेकिन प्रत्यक्षदर्शी आज भी वहां जो कुछ हुआ उसके बारे में प्रत्येक सेकेंड का हाल बता रहे हैं। उस दिन को याद करते हुए देविका रोतावान बताती हैं कि जब वह उस दिन को याद करती हैं तो रूह कांप जाती है। आज भी उन्हें उस अटैक का एक एक पल याद है। जब अटैक हुआ तब वह छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर थीं।
अचानक शुरू हुई गोलाबारी से वह काफी डर गईं थी। इस दौरान उनके पैर में गोली भी लगी थी। लेकिन किस्मत अच्छी थी कि वह इसके बावजूद वह गईं। उन्होंने बताया कि आतंकी अजमल कसाब लोगों पर गोलीबारी कर रहा था।
पढ़ें- मुंबई हमले के 9 साल, कसाब के जिंदा पकड़े जाने से बिगड़ा हाफिज का खेल
बता दें कि 26 नवंबर 2008 को लश्कर ए तैयबा के कुछ आतंकी समुंद्र के रास्ते मुंबई में घुस आए थे। इस दौरान आतंकियों ने लोगों पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में आतंकियों ने 166 लोगों को मार गिराया था जबकि काफी संख्या में लोग घायल हो गए थे।
विज्ञापन
अचानक शुरू हुई गोलाबारी से वह काफी डर गईं थी। इस दौरान उनके पैर में गोली भी लगी थी। लेकिन किस्मत अच्छी थी कि वह इसके बावजूद वह गईं। उन्होंने बताया कि आतंकी अजमल कसाब लोगों पर गोलीबारी कर रहा था।
विज्ञापन
To the 166 lives lost...to over 239 injured...to the innumerable memories etched on the firmament forever & to Mumbai, the city which picked up its pieces & started stronger than ever - A Salute & A Bow of Gratitude from Mumbai Police! pic.twitter.com/TQrGHjewbp
विज्ञापन विज्ञापन— Mumbai Police (@MumbaiPolice) November 26, 2017
पढ़ें- मुंबई हमले के 9 साल, कसाब के जिंदा पकड़े जाने से बिगड़ा हाफिज का खेल
बता दें कि 26 नवंबर 2008 को लश्कर ए तैयबा के कुछ आतंकी समुंद्र के रास्ते मुंबई में घुस आए थे। इस दौरान आतंकियों ने लोगों पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में आतंकियों ने 166 लोगों को मार गिराया था जबकि काफी संख्या में लोग घायल हो गए थे।
वह डर गए और सिर्फ प्रार्थना करने लगे
मुंबई अटैक
वहीं एक और प्रत्यक्षदर्शी दिलीप मेहता बताते हैं कि उस दिन वह मुंबई के ताजमहल होटल में एक कॉन्फ्रेंस के लिए पहुंचे थे। उस समय रात के करीब 9 बजे थे। तभी उन्हें जानकारी मिली की होटल में आतंकियों ने अटैक कर दिया है। वह बताते हैं कि कुछ ही देर में बम फटने की आवाजें आने लगीं। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह काफी डर गए और सिर्फ ईश्वर से प्रार्थना करने लगे।
वह होटल के 21वें तल पर फंसे थे। आतंकी प्रथम तल पर गोलीबारी कर रहे थे। यह उनके लिए बहुत मुश्किल था। वह बताते हैं कि आज भी उन्हें उस दिन का एक एक पल याद है। लेकिन वह ईश्वर की कृपा से बच नकले। उन्होंने कहा कि अब वह खुश हैं कि पहले से हालात काफी सुधर गए हैं। सिक्योरिटी के हिसाब से अब काफी सुरक्षित महसूस करते हैं।
वह होटल के 21वें तल पर फंसे थे। आतंकी प्रथम तल पर गोलीबारी कर रहे थे। यह उनके लिए बहुत मुश्किल था। वह बताते हैं कि आज भी उन्हें उस दिन का एक एक पल याद है। लेकिन वह ईश्वर की कृपा से बच नकले। उन्होंने कहा कि अब वह खुश हैं कि पहले से हालात काफी सुधर गए हैं। सिक्योरिटी के हिसाब से अब काफी सुरक्षित महसूस करते हैं।