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दिशा-निर्देश जारी: रेमडेसिविर से नहीं होगा बच्चों में कोरोना संक्रमण का इलाज
Thu, 10 Jun 2021 05:28 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 10 Jun 2021 05:28 AM IST
सार
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किए नए दिशानिर्देश, सीटी स्कैन के भी तर्कसंगत उपयोग की सलाह
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
कोरोना महामारी की तीसरी लहर में बच्चों के इस जानलेवा संक्रमण की चपेट में आने की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने उनके इलाज के लिए खास दिशानिर्देश जारी किए हैं। सरकार ने साफतौर पर कहा है कि बच्चों के इलाज में रेमडेसिविर इंजेक्शन का इस्तेमाल नहीं किया जाए। साथ ही बच्चों के सीने में संक्रमण की जांच के लिए सीटी स्कैन का भी तर्कसंगत तरीके से उपयोग किया जाए।
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बच्चों के इलाज के लिए विस्तृत दिशानिर्देश केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत आने वाले स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) की ओर से जारी किए गए हैं।
डीजीएचएस ने बच्चों में लक्षण रहित और मध्यम संक्रमण वाले मामलों में स्टेरॉयड के इस्तेमाल को भी बेहद हानिकारक बताया है। डीजीएचएस ने अस्पताल में भर्ती गंभीर और मध्यम संक्रमण से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में ही स्टेरॉयड का उपयोग करने के लिए कहा है ताकि इसका सही समय पर, सही मात्रा में और पर्याप्त खुराक का ही उपयोग किया जाए।
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रेमडेसेविर इंजेक्शन के इस्तेमाल के लिए डीजीएचएस ने स्पष्ट कहा है कि 3 साल से 18 साल के आयुवर्ग में इसके इस्तेमाल से सफलता मिलने के पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में बच्चों में रेमडेसिविर का इस्तेमाल न किया जाए।
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हाई रेजोल्यूशन सीटी (एचआरसीटी) स्कैन के तर्कसंगत उपयोग की सलाह देते हुए डीजीएचएस ने कहा है कि सीने के स्कैन से उपचार में बेहद कम मदद मिलती है। ऐसे में चिकित्सकों को चुनिंदा मामलों में ही कोविड-19 मरीजों में एचआरसीटी कराने का निर्णय लेना चाहिए।
डीजीएचएस ने कोविड-19 को एक वायरल संक्रमण बताते हुए कहा है कि हल्की बीमारी के मामले में एंटीमाइक्रोबायल्स से इसकी रोकथाम या उपचार में कोई मदद नहीं मिलती है।
इसलिए हल्के संकमण वाले बच्चे या बड़े, सभी को कोई दवाई लेने के बजाय मास्क लगाने, हाथ धोने, सामाजिक दूरी बनाने जैसे उचित कोविड व्यवहार के प्रोटोकॉल का उपयोग करना चाहिए। साथ ही पोषक तत्वों को खाने में शामिल करना चाहिए। ऐसे मरीज 10 मिलीग्राम की पैरासीटामोल की खुराक हर 4 से 6 घंटे पर ले सकते हैं और गर्म पानी पीने, गरारे करने चाहिए।
बच्चों का छह मिनट वॉक टेस्ट लेते रहें अभिभावक
दिशानिर्देशों में अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों का अपनी निगरानी में छह मिनट तक घूमने वाला परीक्षण करते रहें। इसके बाद ऑक्सीमीटर के उपयोग से उनके शरीर में ऑक्सीजन की कमी और अन्य श्वसन संबंधी दिक्कतों का समय पर पता लग सकेगा।