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कोरोना काल में रेमडेसिवीर दवा की कालाबाजारी रुकेगी, शुरू होगी निगरानी

Wed, 08 Jul 2020 12:01 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 08 Jul 2020 12:01 AM IST
सार

  • कोरोना वायरस के उपचार में शामिल है रेमडेसिवीर दवा
  • देश भर में दवा की आपूर्ति कम होने से बढ़ी कालाबाजारी
  • अमर उजाला ने सात जुलाई को प्रकाशित किया था मामला

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Remdesivir drug will not be black marketed, Indian government decides, Drugs Controller General said in a letter
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कोरोना वायरस के उपचार में शामिल रेडमेसिवीर दवा की कालाबाजारी के खिलाफ भारत सरकार ने सख्त फैसला लिया है। सभी राज्यों को आदेश दिया है कि इस दवा की कालाबाजारी को लेकर विभागीय टीमों को तैनात किया जाए। देश भर में दवा की आपूर्ति कम होने की वजह से लगातार कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही थीं।

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बता दें कि सात जुलाई को अमर उजाला ने अपने पाठकों तक रेमडेसिवीर सहित कई दवाओं की दिल्ली, मुंबई, चैन्ने जैसे महानगरों में कालाबाजारी बढ़ने का खुलासा भी किया था। वहीं ऑनलाइन लोकल सर्वे में 93 फीसदी लोगों ने इस कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाने की अपील की थी।
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करीब 8,340 लोगों से पूछताछ के दौरान सर्वे में यह पाया गया था कि उन्हें दवा की मौजूदा कीमतों से कई गुना ज्यादा राशि का भुगतान करना पड़ा। अस्पताल से दवा लाने की सलाह मिलने के बाद वे कई दिन तक इधर उधर भटकते रहे और बाद में उन्हें 5,400 रुपये की कीमत का एक इंजेक्शन 16 हजार रुपये तक की कीमत में मिला। 
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश मिलने के बाद सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने सभी राज्य व केंद्र शासित राज्यों को पत्र लिखते हुए तत्काल स्थानीय स्तर पर कालाबाजारी की विजिलेंस शुरू की जाए ताकि कोरोना काल में धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। 

बता दें कि रेमडेसिवीर दवा अभी तक भारत में नहीं बनाई जाती है लेकिन कोरोना काल के चलते भारत सरकार ने सिपला, हेटेरो और मायलेन लैबोरेटरी कंपनी को इसके निर्माण की अनुमति दी है। इस दवा को केवल कोरोना के गंभीर मरीजों के उपचार में इस्तेमाल किया जा सकता है।


लेकिन उसके लिए अस्पताल को परिवार की अनुमति लेना आवश्यक है। इसके बाद दवा के परिणाम सरकार से साझा भी किए जाने का आदेश है। ताकि इसके परिणामों पर समीक्षा के बाद भविष्य की नीति तैयार की जा सके।

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