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'राम जन्मस्थली का धार्मिक महत्व, दूसरी जगह नहीं किया जा सकता शिफ्ट'

Fri, 18 May 2018 01:01 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 18 May 2018 01:01 AM IST
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'Religious significance of Ram Janmbhumi, can not be shifted to another place'
सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले की सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षकारों ने कहा है कि बाबरी मस्जिद के लिए विशेष स्थान और जगह का महत्व नहीं है। लेकिन हिंदुओं के लिए राम जन्मस्थली का धार्मिक महत्व है। उसे दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ के समक्ष रामलला विराजमान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील के परासरन ने कहा, मस्जिद के लिए विशेष जगह की कोई धार्मिक महत्ता नहीं है। मुस्लिम नमाज पढ़ने के लिए और कहीं भी जा सकते हैं। 
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'इस्माइल फारुखी मामले का इस केस से लेनादेना नहीं'

अयोध्या विवाद 2.77 एकड़ जमीन का है। यह जगह हिंदुओं के लिए खास महत्व रखती है, क्योंकि यह भगवान राम की जन्मस्थली है। जिस तरह से मुस्लिमों के मक्का और मदीना का विशेष महत्व है, उसी तरह हिंदुओं में राम जन्मभूमि का विशेष महत्व है। अगली सुनवाई छह जुलाई को होगी। परासरन ने कहा, यह मसला जमीन के मालिकाना हक को लेकर है। इसका इस्माइल फारुखी फैसले से कोई लेनादेना नहीं है। इस मामले को संवैधानिक बेंच के पास भेजने का कोई मतलब नहीं है। 
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मुस्लिम पक्षकारों की ओर से दलील दी गई थी कि इस्माइल फारुखी के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है। ऐसे में इस फैसले का दोबारा परीक्षण की जरूरत है। इसी कारण पहले मामले को संवैधानिक बेंच को भेजा जाना चाहिए। परासन ने कहा कि फारुखी फैसले में कहा गया कि नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है। लेकिन मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं माना गया। ये व्याख्या मस्जिद की जमीन के अधिग्रहण से संबंधित वाद में दी गई थी। इसमें मुद्दा था कि जहां मस्जिद है, वहां की जमीन का अधिग्रहण हो सकता है या नहीं। 
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ऐसे में इस्माइल फारुखी केस में जो व्यवस्था दी गई थी उसका मौजूदा मामले से लेनादेना नहीं है। यह मसला साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर तय हो सकता है। ऐसे में तीन जजों की पीठ मामले का निपटारा कर सकती है। मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा था कि फारुखी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले में आदेश दिया था। उनका कहना था कि पहले इस पर निर्णय लिया जाए कि इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं। उसके बाद ही भूमि विवाद मामले की सुनवाई की जाए।  
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