रामजन्मभूमि, देवों की नगरी, मोक्षदायिनी: अयोध्या के बारे में कितना जानते हैं आप
- अयोध्या अर्थात ऐसा स्थान जहां कभी युद्ध न होता हो
- सूर्य के पुत्र वैवस्वत मनु ने की थी अयोध्या की स्थापना
- अथर्ववेद में अयोध्या को कहा गया है देवताओं की नगरी
- जैन धर्म के 14 तीर्थंकरों में से पांच का जन्म यहीं हुआ
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अयोध्या के बारे में ये तो सब जानते हैं कि यह भगवान राम की नगरी है और हिंदुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। सालों तक विवादों का केंद्र रही अयोध्या अब मंदिर के भूमि पूजन को लेकर एक बार फिर चर्चा में है। तीन दिन बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का शंखनाद हो जाएगा। इस बीच हम आपको बताने जा रहे हैं अयोध्या के बारे में कुछ ऐसी जानकारियां जो शायद आप नहीं जानते होंगे...
अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की जन्मभूमि और रघुवंशी राजाओं की राजधानी थी। अयोध्या का अर्थ है ऐसा स्थान जहां कभी युद्ध न होता हो। कहा जाता है कि यह कौशल क्षेत्र की राजधानी थी इसलिए इसे कौशल देश भी कहा जाता था। वाल्मीकि रामायण के पांचवें सर्ग में अयोध्या का विस्तार से वर्णन किया गया है।
पवित्र सप्तपुरियों में पहले स्थान पर है अयोध्या
हिंदू मान्यताओं में सात पवित्र नगरों या तीर्थों की बात कही गई है। पुराणों में कहा गया है कि ये सात नगर या तीर्थ मोक्षदायक हैं। अर्थात् इन तीर्थों की यात्रा करने वाला व्यक्ति अंत में जीवन-मरण के बंधन से मुक्त होकर भगवान की शरण में पहुंच जाता है और उसका कल्याण होता है। अयोध्या इन सात नगरों में पहले स्थान पर है।
अयोध्या मथुरा माया काशी काञ्ची अवन्तिका।
पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिका:॥
इन सात पवित्र नगरों में क्रमश: अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांची (कांचीपुरम), अवंतिका, उज्जैन और द्वारिका शामिल हैं। इन सात नगरों को सप्तपुरी भी कहा जाता है। अयोध्या के धार्मिक महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनल प्राचीन सप्तपुरियों में पहला स्थान अयोध्या को दिया गया है।
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वैवस्वत मनु महाराज ने की थी अयोध्या की स्थापना
रामायण में सरयू नगर के तट पर बसी अयोध्या की स्थापना के बारे में कहा गया है कि विवस्वान (सूर्य) के पुत्र वैवस्वत मनु महाराज ने यह नगरी बसाई थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा की संतान मरीचि थे, मरीचि की संतान कश्यप, कश्यप की संतान विवस्वान और उनके पुत्र वैवस्वत थे।
वैवस्वत के 10 पुत्र थे:
- इल
- इक्ष्वाकु
- कुशनाम
- अरिष्ट
- धृष्ट
- नरिष्यंत
- करुष
- महाबली
- शर्याति
- प्रषध
इन दसों में सबसे ज्यादा विस्तार इक्ष्वाकु के कुल का हुआ। इसी वंश के दशरथ अयोध्या के 63वें शासक और भगवान राम के पिता थे। कहते हैं कि महाभारत काल तक इस वंश का शासन रहा।
भगवान विष्णु के चक्र पर विराजमान है अयोध्या
स्कंदपुराण में अयोध्या के बारे में एक रोचक बात कही गई है। इसके अनुसार अयोध्या भगवान विष्णु के चक्र पर विराजमान है। कहते हैं कि जब मनु ने ब्रह्मा से अपने लिए एक नगर बसाने की बात कही तो ब्रह्मा उन्हें भगवान विष्णु के पास ले गए। विष्णु ने साकेत धाम (अयोध्या) में स्थान बताया, जहां विश्वकर्मा ने नगर निर्माण किया।
अयोध्या का मामला जब सुप्रीम कोर्ट में था तो अदालत ने अपने फैसले में स्कंदपुराण का भी उल्लेख किया था। अदालत ने कहा था कि हिंदुओं का यह विश्वास कि अयोध्या ही भगवान राम की जन्मभूमि है, वह ‘वाल्मीकि रामायण’ और ‘स्कंद पुराण’ जैसी पवित्र पुस्तकों से आई है और उन्हें आधारहीन नहीं मान सकते।
अथर्ववेद में अयोध्या की स्वर्ग से की गई है तुलना
चार वेदों में से एक अथर्ववेद में अयोध्या को स्वर्ग के बराबर बताया गया है। अथर्ववेद में कहा गया है 'अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या' अर्थात 'आठ चक्र और नौ द्वारों वाली अयोध्या देवताओं की नगरी है'। कहते हैं कि सरयू के तट पर अयोध्या 12 योजन (करीब 144 किमी) लंबाई व तीन योजन (लगभग 36 किमी) चौड़ाई में बसी थी।
जैन धर्म के पांच तीर्थंकरों की जन्मस्थली है अयोध्या
जैन धर्म के अनुसार 24 जैन तीर्थंकरों में से पांच का जन्म अयोध्या में हुआ था। इनमें जैन धर्म के पहले तीर्थंकर ऋषभनाथ, दूसरे अजितनाथ, चौथे अभिनंदननाथ, पांचवें सुमितनाथ और 14वें तीर्थंकर अनंतनाथ का जन्म अयोध्या में हुआ था। जैन धर्म के सभी तीर्थंकरों को भगवान राम के इक्ष्वाकु वंश का ही माना जाता है।