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वनवास के दौरान 200 से ज्यादा जगहों पर ठहरे थे श्रीराम, 17 जगहों पर बनेगा कॉरिडोर

Sat, 01 Aug 2020 08:16 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 01 Aug 2020 08:16 PM IST
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PM Modi will lay foundation stone of ram temple during exile Rama stayed at more than 200 places corridor
राम वन गमन पथ - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

पांच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि पूजन व शिलान्यास करेंगे। अयोध्या में भूमि पूजन से जुड़ी तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को अयोध्या जाएंगे। जहां वे अफसरों और संतों के साथ बैठक कर पूरे आयोजन की तैयारियों की समीक्षा करेंगे।

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इसी बीच इतिहासकारों ने 200 से ज्यादा स्थानों का पता लगाया है जहां राम, सीता और लक्ष्मण अपने 14 साल के वनवास के दौरान ठहरे थे। केंद्र सरकार ने ऐसे 17 बड़े स्मारकों की पहचान की है जिन्हें कॉरिडोर के तौर पर विकसित किया जा सकता है। आज हम आपको उन्हीं कॉरिडोर के बारे में बताते हैं।

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  • तमसा नदी- यह स्थान अयोध्या से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर श्रीराम ने नाव के जरिए नदी पार की थी।
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  • श्रृंगवेरपुर तीर्थ- यह स्थान प्रयागराज से 20-22 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां श्रीराम ने केवट से गंगा पार कराने को कहा था। वर्तमान में इस स्थल को सिंगरौर कहा जाता है। श्रृंग्वेरपुर प्रयागराज के आस-पास के प्रमुख भ्रमण स्थलों में से एक है। रामायण में इसका उल्लेख निशादराज के राज्य की राजधानी के रूप में किया गया है।
  • कुरई- सिंगरौर में गंगा पार करके श्रीराम कुरई में रुके थे।
  • प्रयाग- कुरई से श्रीराम प्रयाग पहुंचे थे।
  • चित्रकूट-  मंदाकिनी नदी के किनारे पर बसा चित्रकूट भारत के सबसे प्राचीन तीर्थस्थलों में एक है। प्रयाग के बाद श्रीराम चित्रकूट पहुंचे थे। यहीं श्रीराम को अयोध्या वापस ले जाने के लिए भरत पहुंचे थे। इसे श्रीराम की तपोभूमि भी कहा जाता है। यहां श्रीराम ने वनवास काल के दौरान अपने पिता दशरथ का एक घाट पर पिंडदान किया था। जिसे कि दशरथ घाट के नाम से जाना जाता है।
  • सतना- यहां अत्रि ऋषि का आश्रम था। यहां पर श्रीराम ने कुछ समय व्यतीत किया था। यहीं पर ऋषि अत्रि की पत्नी अनुसूइया के तपबल से भागीरथी गंगा की पवित्र धारा निकली थी जिसे की मंदाकिनी के नाम से जाना जाता है। 
  • दंडकारण्य- चित्रकूट से निकलने के बाद श्रीराम दंडकारण्य पहुंचे। दंडकारण्य मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और आंध्रप्रदेश के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर बना है। यहां श्रीराम ने वनवास के 10 साल व्यतीत किए थे।
  • पंचवटी नासिक- दंडकारण्य में रहने के बाद श्रीराम अगस्त्य मुनि के आश्रम गए थे। यह आश्रम नासिक के पास पंचवटी क्षेत्र में स्थित है जो गोदावरी नदी के किनारे बसा हुआ है। यहीं पर श्रीराम ने शूर्पणखा की नाक काटी थी। ऋषि ने उन्हें अग्निशाला में बनाए गए शस्त्र भी यहीं पर भेंट किए थे।
  • सर्वतीर्थ- नासिक क्षेत्र में ही रावण ने सीता का हरण किया था। रास्ते में रावण का जटायु से युद्ध हुआ था और रावण ने जटायु का वध कर दिया था।
  • पर्णशाला- आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले के भद्राचलम में स्थित है पर्णशाला। रामालय से करीब एक घंटे की दूरी पर स्थित पर्णशाला को पनसाला के नाम से भी जाना जाता है। 
  • तुंगभद्रा- तुंगभद्रा और कावेरी नदी के क्षेत्रों के अनेक स्थलों पर श्रीराम सीताजी की खोज में गए थे। 
  • शबरी आश्रम- रास्ते में श्रीराम पंपा नदी के पास स्थित शबरी आश्रम गए थे। जो कर्नाटक में स्थित है।
  • ऋष्यमूक पर्वत- मलय पर्वत और चंदन वनों को पार करते हुए श्रीराम ऋष्यमूक पर्वत की तरफ बढ़े थे। सीता की खोज में निकले श्रीराम की हनुमान और सुग्रीव से यहीं पर मुलाकात हुई थी। यहीं उन्होंने बाली का भी वध किया था।
  • कोडीकरई- यहीं पर राम की वानर सेना ने पड़ाव डालकर रामेश्वर की तरफ कूच किया था।
  • रामेश्वरम- राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले यहां भगवान शिव की पूजा की थी। रामेश्वरम में श्रीराम ने शिवलिंग भी स्थापित किया था। इसे रामेश्वर ज्योतिर्लिंग के तौर पर जना जाता है।
  • धनुषकोडी से रामसेतु- श्रीराम रामेश्वर के आगे धनुषकोडी पहुंचे। यहां पर उन्होंने रामसेतु का निर्माण किया। रामसेतु को अंग्रेजी में एडम्स ब्रिज कहा जाता है। यह समुद्र का वह स्थान था जहां से सुगमतापूर्वक श्रीलंका पहुंचा जा सकता है।
  • नुवारा एलिया पर्वत- श्रीराम रामसेतु बनाकर श्रीलंका पहुंचे थे। श्रीलंका में इस पर्वत पर ही रावण फॉल, रावण गुफाएं, अशोक वाटिका, विभीषण महल आदि स्थित हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार नुवारा एलिया पहाड़ियों से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर बांद्रवेला की ओर रावण का महल था।
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