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Maharashtra: बॉम्बे HC से कांग्रेस नेता रश्मि को राहत, जांच समिति देगी जाति प्रमाण पत्र और एक लाख का जुर्माना

Tue, 24 Sep 2024 10:53 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: बशु जैन Updated Tue, 24 Sep 2024 10:53 PM IST
सार

लोकसभा चुनाव के दौरान जाति जांच समिति ने रश्मि बर्वे के जाति प्रमाण पत्र को अवैध बताया था। इसके बाद वह रामटेक संसदीय सीट से चुनाव नहीं लड़ सकी थीं। 

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Relief to Congress leader Rashmi from Bombay HC, committee will give caste certificate and fine one lakh
Bombay High court - फोटो : ANI

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने कांग्रेस नेता रश्मि वर्बे को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने जाति जांच समिति (सीएससी) को कांग्रेस नेता को एक सप्ताह में अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र देने का आदेश दिया है। साथ ही जांच समिति पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया है। लोकसभा चुनाव के दौरान जाति जांच समिति ने रश्मि बर्वे के जाति प्रमाण पत्र को अवैध बताया था। इसके बाद वह रामटेक संसदीय सीट से चुनाव नहीं लड़ सकी थीं। 

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उन्होंने जाति जांच समिति के फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले में न्यायमूर्ति अविनाश घरोटे और एमएस जावलकर की खंडपीठ ने जाति जांच समिति की प्रशासन के पिछलग्गू के तौर पर काम करने की आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि जाति जांच समिति ने राज्य के अवर सचिव के पत्र और प्राप्त शिकायतों से प्रभावित होकर प्रमाण पत्र को अवैध करार दिया था। समिति स्वतंत्र दिमाग लगाने के बजाय शिकायतकर्ता और प्रशासन की धुन पर नाच रही है। 
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कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के जाति के दावे को खारिज करने ताकि वह चुनाव न लड़ सके, के लिए समिति ने उचित अवसर प्रदान करने के प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को भी हवा में फेंक दिया। ऐसे निर्णयों को टिके रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। सतर्कता सेल की स्वतंत्र जांच में सामने आया है कि याचिकाकर्ता का जाति का दावा वास्तविक है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि हम सीएससी के आचरण की कड़ी निंदा करते हैं। इसने स्वतंत्र, निष्पक्षता और जाति प्रमाणपत्र अधिनियम के भीतर कार्य करने के बजाय इस तरीके से जांच की है, जो कि देश की कोई भी अदालत इसे स्वीकार नहीं कर सकती। इसने केवल प्रशासन के पिछलग्गू के रूप में काम किया है। सीएससी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाता है ताकि भविष्य में वह अपने वैधानिक कार्यों को करने के बजाय किसी और की धुन पर नाचने की बजाय कानून के दायरे में रहकर काम करने के बारे में सोचे। 


पीठ ने आदेश दिया कि हम जाति जांच समिति के फैसले को रद्द करते हैं और निर्देश देते हैं कि वह एक सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता रश्मि वर्बे को अनुसूचित जाति का वैधता प्रमाण पत्र जारी करेगी। साथ ही एक लाख रुपये का भुगतान करेगी। कोर्ट ने कहा कि सीएससी के निर्णय के अनुसरण में की गई सभी कार्रवाइयों को नॉन एस्ट माना जाएगा। 

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