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चंदे का खेल: वर्ष 2019-20 में क्षेत्रीय दलों ने अज्ञात स्रोतों से बटोरे 445 करोड़, एडीआर की रिपोर्ट में दावा
Thu, 11 Nov 2021 05:38 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 11 Nov 2021 05:38 PM IST
सार
एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें से 95.616 प्रतिशत या 426.233 करोड़ रुपये चुनावी बांड से आए और क्षेत्रीय दलों ने स्वैच्छिक योगदान से 4.976 करोड़ रुपये एकत्र किए।
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- फोटो : social media
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विस्तार
देश में सियासी चंदे का धंधा भी कमजोर नहीं है। चुनावों व राजनीतिक दलों पर नजर रखने वाली संस्था एसोसिशएन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019-20 में क्षेत्रीय दलों ने अज्ञात स्रोतों से 445.774 करोड़ रुपये जुटाए। यह चंदा इस वर्ष के दौरान उन्हें हुई कुल कमाई को 55.50 फीसदी है।
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एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें से 95.616 प्रतिशत या 426.233 करोड़ रुपये चुनावी बांड से आए और क्षेत्रीय दलों ने स्वैच्छिक योगदान से 4.976 करोड़ रुपये एकत्र किए। चुनाव आयोग में क्षेत्रीय दलों द्वारा दायर उनके आयकर रिटर्न और दान विवरण के विश्लेषण से यह जानकारी मिली है। इससे पता चलता है कि उन्हें मिले चंदे के स्रोत काफी हद तक अज्ञात हैं।
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चुनाव नियमों के अनुसार वर्तमान में राजनीतिक दलों को 20,000 रुपये से कम देने वाले व्यक्तियों या संगठनों के नाम का खुलासा करने की अनिवार्यता नहीं है। इस कारण बड़ी मात्रा में उन्हें मिले धन के स्रोत का पता नहीं लगाया जा सकता है, यह स्रोत अज्ञात ही रहते हैं।
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एडीआर के अनुसार आप, मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और लोजपा को मिले चंदे की रिपोर्ट चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। लेकिन इन दलों के चंदे के आंकड़े वित्त वर्ष 2019-20 की उनकी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट और चंदा रिपोर्ट (20,000 रुपये से अधिक के दान) में विसंगतियों को दर्शाते हैं।
कुछ शीर्ष क्षेत्रीय दलों ने सर्वाधिक अज्ञात आय प्राप्त होने की सूचना दी है। टीआरएस को 89.159, टीडीपी को 81.694 करोड़, वाईएसआर कांग्रेस को 74.75 करोड़, बीजद को 50.586 करोड़ और डीएमके को 45.50 करोड़ रुपये अज्ञात स्रोतों से मिले हैं।
चुनाव आयोग को सौंपी गई चंदे की रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्रीय दलों को समीक्षाधीन वर्ष में ज्ञात स्रोतों से 184.623 करोड़ रुपये मिले हैं। यह राशि उनकी कुल कमाई का 22.98 फीसदी है। इन दलों की अन्य आय में सदस्यता शुल्क, बैंक ब्याज, प्रकाशन सामग्री के विक्रय आदि से 172.84 करोड़ रुपये या 21.52 फीसदी राशि शामिल हैं।
बंगाल में तृणमूल को हराने के लिए प्रचार में भाजपा ने खर्चे 151 करोड़
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से हटाने की नाकाम कोशिश में भाजपा ने प्रचार पर 151 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। यह राशि इस वर्ष पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में प्रचार पर खर्च हुए कुल 252 करोड़ रुपये की 60 फीसदी है। इस वर्ष असम, पुड्डुचेरी, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल में विधानसभा चुनाव हुए हैं। भाजपा ने निर्वाचन आयोग को दिए चुनाव खर्च विवरण में बताया कि इस वर्ष पार्टी ने चुनाव प्रचार पर कुल 252,02,71,753 रुपये खर्च किये हैं।
इनमें असम में 43.81 करोड़ और पुड्डुचेरी में 4.79 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं तमिलनाडु में जहां भाजपा को महज 2.6 फीसदी वोट मिले, पार्टी ने प्रचार पर 22.79 करोड़ रुपये खर्च किए थे। केरल में भाजपा ने 29.24 करोड़ रुपये खर्च किये। तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल चुनाव में 154.84 करोड़ रुपये खर्च किए थे। तृणमूल को विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत मिला था।