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Recruitment Fraud: सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी, फर्जी रेलवे भर्ती गिरोह का सरगना मुंबई में गिरफ्तार
Tue, 06 Feb 2024 06:52 AM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 06 Feb 2024 06:52 AM IST
सार
सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का सरगना गिरफ्तार हुआ है। 300 से अधिक लोगों से 21 करोड़ रुपये ठगने का आरोपी मुंबई पुलिस के हत्थे चढ़ा है।फर्जी रेलवे भर्ती गिरोह के सरगना को गिरफ्तार करना मुंबई पुलिस क बड़ी सफलता है।
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फर्जी रेलवे भर्ती गिरोह का सरगना मुंबई में गिरफ्तार
- फोटो : ANI
विस्तार
पश्चिम रेलवे की सतर्कता टीम ने फर्जी रेलवे भर्ती रैकेट के मास्टरमाइंड हरताली प्रसाद रोहिदास को गिरफ्तार कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। सतर्कता टीम तीन महीने से उसका तलाश कर रही थी। आरोप है कि उसने 300 से अधिक उम्मीदवारों को नौकरी देने के लिए से लगभग 21 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। उसे मुंबई सेंट्रल से गिरफ्तार कर लिया गया।
मुंबई सेंट्रल स्टेशन के पोर्च से गिरफ्तारी
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित ठाकुर के अनुसार, एक बाहरी व्यक्ति और दो प्रॉक्सी उम्मीदवारों की मदद से आरोपी को पकड़ने के लिए एक जाल बिछाया गया, जिसमें गूगल पे के माध्यम से आरोपी को 20,000 रुपये ट्रांसफर किए गए। शेष किस्त के भुगतान के लिए मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर आरोपी से मिलने की योजना बनाई गई। उसे 2 फरवरी को दोपहर दो बजे मुंबई सेंट्रल स्टेशन के पोर्च से पकड़ लिया गया।
10 लाख तक वसूले
छताछ के दौरान आरोपी ने खुलासा किया कि उसने प्रति अभ्यर्थी 9-10 लाख रुपये वसूल किए थे। वह कोलकाता के एक व्यक्ति की मदद से फर्जी दस्तावेज बना रहा था। आरोपी ने उन लोगों के नंबर ब्लॉक कर दिए थे, जिनसे मोटी रकम वसूल की थी।
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मुंबई सेंट्रल स्टेशन के पोर्च से गिरफ्तारी
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित ठाकुर के अनुसार, एक बाहरी व्यक्ति और दो प्रॉक्सी उम्मीदवारों की मदद से आरोपी को पकड़ने के लिए एक जाल बिछाया गया, जिसमें गूगल पे के माध्यम से आरोपी को 20,000 रुपये ट्रांसफर किए गए। शेष किस्त के भुगतान के लिए मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर आरोपी से मिलने की योजना बनाई गई। उसे 2 फरवरी को दोपहर दो बजे मुंबई सेंट्रल स्टेशन के पोर्च से पकड़ लिया गया।
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10 लाख तक वसूले
छताछ के दौरान आरोपी ने खुलासा किया कि उसने प्रति अभ्यर्थी 9-10 लाख रुपये वसूल किए थे। वह कोलकाता के एक व्यक्ति की मदद से फर्जी दस्तावेज बना रहा था। आरोपी ने उन लोगों के नंबर ब्लॉक कर दिए थे, जिनसे मोटी रकम वसूल की थी।
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