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एनडीपीएस एक्ट में बदलाव : कम मात्रा में ड्रग्स मिलने पर नहीं भेजा जाए जेल, अपराध की श्रेणी से हटाने की सिफारिश

Mon, 25 Oct 2021 03:15 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 25 Oct 2021 03:15 AM IST
सार

मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि निजी इस्तेमाल के लिए कम मात्रा में नशीले पदार्थ के साथ पकड़े जाने पर व्यक्ति को जेल भेजे जाने के बजाय सरकारी केंद्रों में अनिवार्य उपचार के लिए भेजा जाना चाहिए।

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Recommendation to remove small quantities of drugs from the category of crime
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

विस्तार

शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान पर चल रहे केस को लेकर एनडीपीएस एक्ट और इसके सख्त प्रावधानों पर चर्चा के बीच सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस) में बदलाव करना चाहता है।

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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने राजस्व विभाग को सौंपे गए नशीली दवा एवं मादक पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम की समीक्षा में निजी इस्तेमाल के लिए कम मात्रा में मादक पदार्थ (ड्रग्स) रखने को अपराध की श्रेणी से हटाने की सिफारिश की है।
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वर्तमान में एनडीपीएस अधिनियम के तहत राहत या छूट का कोई प्रावधान नहीं है और अधिनियम के तहत आरोपी कारावास से तभी बच सकता है यदि वह स्वत: पुनर्वास केंद्र जाने की इच्छा जताता हैं।
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अधिकारियों ने बताया कि पिछले हफ्ते राजस्व विभाग के साथ साझा की गई अपनी सिफारिशों में मंत्रालय ने निजी इस्तेमाल के लिए कम मात्रा में मादक पदार्थ के पाए जाने पर उसे अपराध की श्रेणी से हटाने का सुझाव दिया।

एक अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि निजी इस्तेमाल के लिए कम मात्रा में नशीले पदार्थ के साथ पकड़े जाने पर व्यक्ति को जेल भेजे जाने के बजाय सरकारी केंद्रों में अनिवार्य उपचार के लिए भेजा जाना चाहिए।


भारत में मादक पदार्थ रखना अपराध है और एनडीपीएस अधिनियम की धारा 27 में मादक पदार्थ के सेवन के लिए एक साल तक की कैद या 20,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है। अभिनेता शाहरुख के बेटे आर्यन को इसी अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है।

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