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शक्ति परीक्षण: अभी तो कर्नाटक विधानसभा में असली स्क्रीन प्ले बाकी है

Mon, 22 Jul 2019 07:59 PM IST
गौरव द्विवेदी शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Mon, 22 Jul 2019 07:59 PM IST
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Real screen play is left in Karnataka assembly
के आर रमेश कुमार, कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष - फोटो : सोशल मीडिया

विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार सदन में शक्ति परीक्षण को आज (22 जुलाई) पूरा कराने की दृढ़ता दिखा रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष सदन की कार्यवाही को देर रात तक जारी रखने के प्रति अडिग हैं, लेकिन कांग्रेस और भाजपा के रणनीतिकारों की निगाह कई विकल्पों पर टिकी है। सदन में विश्वासमत के बाबत कांग्रेस ने व्हिप जारी किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने कमान संभाल रखी है। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी कांग्रेस के नेताओं से मंत्रणा करके आखिरी दांव में जुट गए हैं। दूसरी तरफ भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व मुख्यमंत्री और सरकार गिरने की दशा में भावी मुख्यमंत्री के दावेदार बीएस येदियुरप्पा कोई चूक नहीं होने देना चाहते।

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साबित कर लेंगे बहुमत


एचडी कुमारस्वामी को बहुमत साबित कर लेने का पूरा भरोसा है। कुमारस्वामी का यह भरोसा कांग्रेस पार्टी के सहयोगियों से मिल रहे आश्वासन के बाद है। जद(एस) के एक सूत्र का कहना है कि इंतजार कीजिए और आखिरी घंटे में बहुत कुछ सीन बदल सकता है। इसी तरह का संकते कांग्रेस के नेता भी कर रहे हैं। पूर्व कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद बीके हरिप्रसाद का कहना है कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना तय है कि बागी विधायकों में से हमारे पांच विधायक लौटकर आएंगे। वह सरकार के पक्ष में मतदान करेंगे। एक विधायक बसपा का सरकार के पक्ष में मतदान करेगा। सरकार बहुमत साबित कर देगी। बीके हरिप्रसाद का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा है कि वह बागी विधायकों पर सदन की कार्यवाही में भाग लेने या न लेने का दबाव नहीं डाल सकते, लेकिन उच्चतम न्यायालय का यह निर्णय कांग्रेस पार्टी पर लागू नहीं होता। 

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विधानसभा अध्यक्ष व्हिप जारी करने के कांग्रेस पार्टी के अधिकार से उसे (कांग्रेस) रोक नहीं सकता और वैधानिक प्रावधानों के तहत जो विधायक व्हिप की अवहेलना करेंगे, उन्हें विधानसभा अध्यक्ष को अयोग्य घोषित करना होगा। हरिप्रसाद का कहना है कि अभी इंतजार कीजिए। असल का स्क्रीन प्ले होना बाकी है। निगाह विधानसभा अध्यक्ष द्वारा व्यवस्था देने पर टिकी है।

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राज्यपाल से सीएम ने नहीं मांगा समय


मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के कार्यालय ने राज्यपाल से मिलने का समय लिए जाने की खबरों को खारिज कर दिया है। इस खबर से यह अंदाज लगाया जा रहा था कि एचडी कुमार स्वामी बहुमत साबित करने के लिए मतदान की स्थिति आने से पहले पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इससे पहले कयासों के बाजार ने तब जोर पकड़ा जब डीके शिवकुमार ने कहा कि एचडी कुमारस्वामी जरूरत पड़ी तो त्याग करने के लिए तैयार हैं। डीके ने कहा कि अगला मुख्यमंत्री कांग्रेस का हो सकता है। डीके शिवकुमार के इस बयान की चर्चा संसद के गलियारे में सांसदों के बीच भी सुनी गई। बताते हैं येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा ने भी इसे काफी गंभीरता से लिया।

भाजपा खुला तो छोड़े विधायक


13+3 बागी विधायक को छोड़कर सदन में बहुमत भाजपा के पक्ष में है। भाजपा के पास 105 अपने विधायक हैं। उसे दो निर्दल भी समर्थन देने की बात कह रहे हैं। कांग्रेस-जद(एस) की सरकार के पास 100 विधायकों का समर्थन है। एक बसपा सुप्रीमो मायावती की घोषणा के बाद बसपा का एक विधायक समर्थन दे सकता है। इस तरह से सरकार के पक्ष में 101 विधायक की संभावना दिखाई दे रही है। कांग्रेस के रणनीतिकारों की बात सच मान लें तो सरकार के पक्ष में 106 विधायक का संख्याबल संभव है। इस पर कांग्रेस पार्टी और जद(एस) के रणनीतिकार एक दावा और कर रहे हैं। उनका कहना है कि 4-5 भाजपा के विधायक अपनी पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि अभी यह पर्दा उठना बाकी है। पहले भाजपा अपने विधायकों को खुल्ला तो छोड़े। वरिष्ट नेताओं का कहना है कि इसी डर से भाजपा लगातार अपने विधायकों को रिसार्ट में रख रही है।

दिल्ली सावधान है


चाहे कांग्रेस हो या भाजपा दोनों दलों की केंद्रीय ईकाई काफी फूंक-फूंककर कदम रख रही है। भाजपा के एक नेता का कहना है कि पहले कर्नाटक में कुछ तो हो। फिलहाल वहां लोकतंत्र की मर्यादा तार-तार हो रही है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि जो हो रहा है, उसकी जिम्मेदार भाजपा और उसके नेता बीएस येदियुरप्पा हैं। कांग्रेस नेताओं के यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है, लेकिन हो रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेताओं का मानना है कि राज्य में सत्ता को लेकर मचे इस घमासान को स्थानीय स्तर पर ही रहने देना ठीक है। बताते हैं शायद यही वजह है कि दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों का केंद्रीय नेतृत्व सावधान है।

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