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सोनिया के 'इस पार या उस पार' वाले बयान पर भाजपा- ये कौन सी भाषा और कैसा राजधर्म?

Fri, 28 Feb 2020 02:21 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Fri, 28 Feb 2020 02:21 PM IST
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Ravishankar slam sonia over her statement, ask why did she provoke people, kapil sibal, pm modi
रविशंकर प्रसाद - फोटो : Twitter

दिल्ली हिंसा की पृष्ठभूमि में सरकार को राजधर्म का पालन करने की सोनिया गांधी की नसीहत पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास वोट बैंक की राजनीति के लिए अधिकारों का दमन करने, अपनी बात से पलटने का रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राजधर्म पर उपदेश न दें।

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भाजपा ने रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के भाषण को उद्धृत करते हुए उन पर उत्तेजना फैलाने का भी आरोप लगाया। केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा, 'कांग्रेस पार्टी कल राष्ट्रपति जी के यहां गई थी और हमें राजधर्म के बारे में बताया जा रहा है। आज मुझे राजधर्म के बारे में कांग्रेस पार्टी और सोनिया जी से कुछ सवाल करने हैं।'
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उन्होंने कहा कि सोनिया जी आप अपनी टिप्पणी को देखिए जहां आपने रामलीला मैदान में ‘इस पार या उस पार’ की बात कही थी। ये कौन सी भाषा है? प्रसाद ने सवाल किया, 'ये उत्तेजना नहीं है तो क्या है? ‘इस पार या उस पार' का मतलब है संवैधानिक रास्ते से अलग। ये कौन सा राजधर्म है सोनिया जी? आपने लोगों में उत्तेजना क्यों फैलाई?'
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये समय शांति के लिए हाथ बढ़ाने का है। ये समय उत्तेजना फैलाने का नहीं है। लेकिन कांग्रेस पार्टी का स्वर जो दिसंबर में आर-पार का था वही स्वर आज भी है। इसका कारण यह है कि कांग्रेस अपनी हार नहीं भूल पाती है। प्रसाद ने कहा कि दिल्ली में शांति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपील की, गृह मंत्री जी ने सर्वदलीय बैठक बुलाई।

राजधर्म के नाम पर देश में उत्तेजना फैला रही है कांग्रेस

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि दिल्ली में शांति चाहिए और कांग्रेस राजधर्म के नाम पर देश में उत्तेजना फैलाने की कोशिश कर रही है। बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुवाई में पार्टी के शिष्टमंडल ने गुरुवार को दिल्ली हिंसा मामले पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर आग्रह किया कि वह केंद्र सरकार से राजधर्म का पालन कराने और गृह मंत्री अमित शाह को हटाने के लिए कदम उठाएं।

भाजपा नेता ने कहा कि सोनिया गांधी आप यह बताइए कि जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के विस्थापित हैं, जिनको उनकी आस्था के आधार पर प्रताड़ित किया जा रहा है, उसको लेकर आपकी पार्टी की एक सोच रही है। आपकी पार्टी के नेताओं ने बार-बार खुलकर इस पर स्टैंड लिया था।

प्रसाद ने कहा कि इंदिरा जी ने युगांडा के विस्थापितों की मदद की थी, राजीव गांधी जी ने तमिल लोगों की मदद की थी, मनमोहन जी ने कहा था कि नागरिकता मिलनी चाहिए और अशोक गहलोत ने तो शिवराज पाटिल और आडवाणी जी को पत्र लिखा था कि नागरिकता मिलनी चाहिए। भाजपा नेता ने सवाल किया कि सोनिया जी आपको इसका जवाब देना पड़ेगा कि क्या मनमोहन जी ने जो किया था वो गलत था? क्या जो इंदिरा जी और राजीव जी ने काम किया था वो गलत था।

यह कौन सा राजधर्म है सोनिया जी?

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने पूछा कि यह कौन सा राजधर्म है कि आज सब पलट गए। उन्होंने पूछा कि लोगों को उकसाया जाए, यह कौन सा राजधर्म है सोनिया जी? आपातकाल का जिक्र करते हुए प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास वोट बैंक की राजनीति के लिए अधिकारों का उल्लंघन करने, अपनी बात से पलटने का रहा है और कांग्रेस अध्यक्ष राजधर्म पर उपदेश न दें।

रविशंकर प्रसाद ने शाहीन बाग में बच्चों को प्रधानमंत्री के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उस वक्त आप (सोनिया गांधी) खामोश थीं। क्या आपकी पार्टी ने ये भी नहीं कहने की जरूरत नहीं समझी कि हम इसका समर्थन नहीं करते हैं? क्या ये है आपका राजधर्म? भाजपा नेता कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा के विवादास्पद बयानों के बारे में एक सवाल पर मंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती।

सरकार व्यक्तिगत, न्यायिक और मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर प्रतिबद्ध

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि न्यायपालिका, मीडिया और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर प्रतिबद्धता मोदी सरकार के मूल में है और उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश के स्थानांतरण को लेकर हो रही आलोचना को खारिज करते हुए पार्टी के नेताओं द्वारा आपातकाल के खिलाफ लड़ाई लड़े जाने का उल्लेख किया। 

न्यायमूर्ति एस मुरलीधर के स्थानांतरण को लेकर कांग्रेस द्वारा सरकार पर किए जा रहे हमले के संदर्भ में पूछे जाने पर प्रसाद ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि उसकी सरकार ने 1970 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को नजरंदाज कर दिया था और इस कदम को न्यायिक स्वतंत्रता पर हमले के तौर पर देखा गया था।

मंत्री ने कहा कि मुरलीधर के स्थानांतरण का किसी भी मामले से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम द्वारा पहले ही अनुशंसा की जा चुकी थी और न्यायधीश ने भी अपनी सहमति दे दी थी। प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा कि यह (स्थानांतरण) प्रक्रिया का हिस्सा है। इसी प्रक्रिया से दर्जनों न्यायाधीशों का स्थानांतरण हुआ है। 

कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि दिल्ली हिंसा मामले में भाजपा नेताओं को बचाने के लिए सरकार ने मुरलीधर का स्थानांतरण किया क्योंकि वे हिंसा से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इस सरकार के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों समेत वह खुद भी व्यक्तिगत, न्यायिक और मीडिया की आजादी के लिये आपातकाल के खिलाफ लड़े थे। उन्होंने कहा कि इन स्वतंत्रताओं को लेकर प्रतिबद्धता हमारे (सरकार के) मूल में है। 

69 घंटे बाद जागे प्रधानमंत्री

वहीं दिल्ली हिंसा को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी 69 घंटे बाद जागे और उन्होंने दिल्ली में शांति और स्थिरता की अपील की है। उन्हें यह पहले करना चाहिए था। लेकिन गृह मंत्री अमित शाह ने ऐसी कोई अपील नहीं की। गृह मंत्री को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करना चाहिए।'

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