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महंगाई की मार : पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें बढ़ने के बाद भी सरकारी आंकड़ों में महंगाई कैसे कम हुई?
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आंकड़े सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वन मंत्रालय ने जारी किए हैं।
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अमर उजाला
विस्तार
देश में महंगाई बड़ा मुद्दा है। मंगलवार को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MSPI) ने कंज्यूमर प्राइज इंडेक्स (CPI) यानी खुदरा महंगाई दर और कंज्यूमर फूड प्राइज इंडेक्स (CFPI) जारी की है। इसके मुताबिक, पिछले एक साल के अंदर खुदरा महंगाई में 3.26% की गिरावट दर्ज हुई है जबकि खाने-पीने की चीजों की महंगाई 10.39% कम हुई है। मतलब साफ शब्दों में समझें तो आप अपनी घरेलू जिंदगी में खाने-पीने से लेकर जिन वस्तुओं का उपभोग करते हैं वो सब सस्ता हो गया है।अब बात पेट्रोल-डीजल और नेचुरल गैस की करते हैं। पेट्रोल-डीजल के दामों में अक्तूबर 2020 से अक्तूबर 2021 तक करीब 15 रुपए का इजाफा हुआ है। इसी तरह नेचुरल गैस यानी एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी में भी 5-15 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। अब आप सोच रहे होंगे कि जब पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ने के बाद भी महंगाई दर कैसे कम हो रही है? कानपुर के डीएवी कॉलेज के अर्थशास्त्री डॉ. मनोज श्रीवास्तव से समझिए क्या है महंगाई का पूरा खेल...
पहले जान लिजिए CPI और CFPI क्या है?
CPI यानी कंज्यूमर प्राइज इंडेक्स ओर खुदरा महंगाई दर। सरल शब्दों में समझें तो इसमें आपके घरेलू उपयोग में आने वाली हर वस्तुओं की सूची होती है और उसके घटे या बढ़े दाम होते हैं। इसी तरह CFPI यानी कंज्यूमर फूड प्राइज इंडेक्स होता है। इसमें खाने-पीने वाली हर चीजों की सूची होती है।
पिछले एक साल में CPI और CFPI में क्या बदलाव हुए?
अक्तूबर 2020 के आंकड़ों पर नजर डालें तब CPI 7.61% और CFPI 11.07% था। इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट दर्ज हो रही है।
सोर्स : सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MSPI)
| महीना | कंज्यूमर प्राइज इंडेक्स (CPI)% | कंज्यूतर फूड प्राइज इंडेक्स (CFPI) % |
| अक्तूबर 2020 | 7.61 | 11.07 |
| नवंबर 2020 | 6.39 | 9.50 |
| दिसंबर 2020 | 4.59 | 3.41 |
| जनवरी 2021 | 4.06 | 1.96 |
| फरवरी 2021 | 5.03 | 3.87 |
| मार्च 2021 | 5.52 | 4.94 |
| अप्रैल 2021 | 4.23 | 1.96 |
| मई 2021 | 6.30 | 5.01 |
| जून 2021 | 6.26 | 5.15 |
| जुलाई 2021 | 5.59 | 3.96 |
| अगस्त 2021 | 5.30 | 3.11 |
| सितंबर 2021 | 4.32 | 0.68 |
पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम कैसे बढ़े?
बुधवार यानी आज देश के ज्यादातर शहरों में पेट्रोल की कीमतें 100-110 रुपए के बीच है। इसी तरह डीजल के दाम 90 से 101 रुपए के बीच है। पिछले साल अक्तूबर में पेट्रोल की कीमतें 81-95 रुपए तक थी और डीजल 70 से 75 रुपए तक थीं।
महंगाई दर में गिरावट कैसे ?
डीएवी कॉलेज के प्रोफेसर और अर्थशास्त्री डॉ. मनोज श्रीवास्तव बताते हैं कि कंज्यूमर प्राइज इंडेक्स और कंज्यूमर फूड प्राइज इंडेक्स एक तरह की टोकरी होती है। इसमें खाने-पीने से लेकर घरेलू उपयोग में लाई जाने वाली हर वस्तुओं की सूची होती है और उसके घटते-बढ़ते दाम।
अभी सरकार ने जो इंडेक्स रिपोर्ट जारी की है उसमें केवल ओवरऑल डेटा दिया गया है। ये नहीं बताया गया है कि इस टोकरी में कौन-कौन सी चीजें शामिल हैं। अभी लॉकडाउन के दौरान बहुत सी चीजों का उपयोग घट गया था। अब उन चीजों का स्टॉक बढ़ गया है और विक्रेता उसे हर हालत में बेचना चाहता है। ऐसी चीजों के दाम तेजी से घटते हैं, क्योंकि उस वस्तु की डिमांड कम होती है, जबकि स्टॉक ज्यादा रहता है। हालांकि इसकी संख्या कम होती है। लॉकडाउन के बाद मार्केट में तेजी आई है। सारे बंद उद्योग और बाजार खुल गए हैं। इसलिए भी महंगाई में कमी देखने को मिल रही है।
अभी सरकार ने जो इंडेक्स रिपोर्ट जारी की है उसमें केवल ओवरऑल डेटा दिया गया है। ये नहीं बताया गया है कि इस टोकरी में कौन-कौन सी चीजें शामिल हैं। अभी लॉकडाउन के दौरान बहुत सी चीजों का उपयोग घट गया था। अब उन चीजों का स्टॉक बढ़ गया है और विक्रेता उसे हर हालत में बेचना चाहता है। ऐसी चीजों के दाम तेजी से घटते हैं, क्योंकि उस वस्तु की डिमांड कम होती है, जबकि स्टॉक ज्यादा रहता है। हालांकि इसकी संख्या कम होती है। लॉकडाउन के बाद मार्केट में तेजी आई है। सारे बंद उद्योग और बाजार खुल गए हैं। इसलिए भी महंगाई में कमी देखने को मिल रही है।