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Hindi News ›   India News ›   Rashtrapati Bhavan Dinner For EU leaders A glimpse of India traditional heritage featuring Himalayan flavors

राष्ट्रपति भवन में EU नेताओं के लिए रात्रि भोज: भारत के पारंपरिक विरासत की झलक, ऐसे हिमालयी स्वाद से सजी दावत

Tue, 27 Jan 2026 10:14 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 27 Jan 2026 10:14 PM IST
सार

कूटनीति के मंच पर भारत ने स्वाद के जरिए अपनी सांस्कृतिक विरासत का संदेश दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं के सम्मान में विशेष भोज दिया, जिसमें हिमालयी क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजन आधुनिक अंदाज में परोसे गए। इस दावत के जरिए भारत ने अपनी विविधता और आत्मीयता को वैश्विक मंच पर अनोखे ढंग से प्रस्तुत किया।

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Rashtrapati Bhavan Dinner For EU leaders A glimpse of India traditional heritage featuring Himalayan flavors
राष्ट्रपति भवन में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन - फोटो : एक्स@rashtrapatibhvn

विस्तार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं के सम्मान में एक भव्य भोज का आयोजन किया। इस खास दावत में भारत के हिमालयी क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजनों को आधुनिक अंदाज में परोसा गया, ताकि भारत की समृद्ध पाक संस्कृति को दुनिया के सामने रखा जा सके। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। दोनों नेता भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में भी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

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राष्ट्रपति भवन में परोसा गया यह विशेष मेन्यू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर भारत के पारंपरिक स्वादों से प्रेरित था। इसमें स्थानीय सामग्री और पुराने पकाने के तरीकों को अपनाते हुए व्यंजनों को फाइन डाइनिंग शैली में पेश किया गया।

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जखिला आलू और हरी टमाटर की चटनी से हुई भोज की शुरुआत
बता दें कि भोज की शुरुआत जखिया आलू और हरी टमाटर की चटनी से हुई, साथ ही झंगोरा की खीर परोसी गई, जिसमें पहाड़ी नमक और व्हाइट चॉकलेट का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद सूप के रूप में उत्तराखंड की सुंदरकला थिचोनी, यानी कुट्टू की नूडल्स वाली डिश परोसी गई, जिस पर तिब्बती खाने का असर दिखा। मुख्य व्यंजनों से पहले परोसे गए साइड डिश में याक चीज कस्टर्ड, भांग की मठरी, बिच्छू बूटी की पत्तियां, लौकी और सर्दियों की गाजर की कढ़ी शामिल थीं।

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मुख्य भोजन में मेज पर सजा खास मशरूम
मुख्य भोजन में गुच्छी मशरूम और सोलन मशरूम को खास तौर पर पेश किया गया, जिन्हें खसखस, जली हुई टमाटर की चटनी और हिमाचली स्वर्णू चावल के साथ परोसा गया। इसके साथ राई के पत्ते, कश्मीरी अखरोट, भुने टमाटर और अखुनी से बनी अलग-अलग चटनियां दी गईं।

मीठे में हिमालयी रागी के साथ और क्या-क्या?
मीठे में हिमालयी रागी और कश्मीरी सेब का केक, तिमरू और सी बकथॉर्न क्रीम, खजूर और कच्चे कोको से बनी कॉफी कस्टर्ड और हिमालयी शहद में सजी पर्सिमन (फल) शामिल थी। इस खास मेन्यू को शेफ प्रतीक साधु और शेफ कमलेश नेगी के साथ मिलकर तैयार किया गया। इसका उद्देश्य भारत की पारंपरिक खान-पान की विरासत को सम्मान देना और उसे वैश्विक मंच पर पेश करना था।



अब समझिए यूरोपीयन नेताओं का भारत दौरा क्यों खास?
यह दौरा इसलिए भी खास रहा क्योंकि पहली बार यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेता एक साथ भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बने। इसी दिन भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भी हुआ, जिसे अधिकारियों ने 'मदर ऑफ ऑल डील्स' बताया। इस समझौते से भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, रक्षा और वैश्विक सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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