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रामलिंगम हत्याकांड: NIA ने PFI के चार सदस्यों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट, अपराधियों को पनाह देने का आरोप
Sat, 06 Jun 2026 08:14 PM IST
निर्मल कांत
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 06 Jun 2026 08:14 PM IST
सार
एनआईए ने रामलिंगम हत्याकांड में पीएफआई के चार पूर्व सदस्यों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिन पर आरोपियों को पनाह देने का आरोप है। जांच में सामने आया कि उन्होंने हत्या में शामिल लोगों को वर्षों तक शरण दी और यह एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था। इससे पहले इस मामले में कई अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। पढ़िए रिपोर्ट-
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NIA court
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चार पूर्व सदस्यों के खिलाफ रामलिंगम हत्याकांड में शामिल घोषित अपराधियों (पीओ) को पनाह देने के आरोप में आरोपपत्र दाखिल किया है। शनिवार को चेन्नई (तमिलनाडु) के पूनमल्ली स्थित विशेष एनआईए कोर्ट में दायर आरोपपत्र में के. मोहिदीन, मोहम्मद इमरान, थमीम अंसारी और असमत को नामजद किया गया है। इन पर तिरुभुवनम में रामलिंगम पर हुए घातक हमले में शामिल हमलावरों और साजिशकर्ताओं को जानबूझकर पनाह देने का आरोप है।
यह हमला सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और आतंक फैलाने के उद्देश्य से रची गई एक बड़ी साजिश का हिस्सा था। उन पर बीएनएस अधिनियम की धारा 61(2) और बीएनएस अधिनियम की धारा 249 (संधि अधिनियम के साथ) के तहत आरोप लगाए गए हैं। पांच फरवरी 2019 को पक्कु विनायकम थोप्पू के पास जबरन धर्म परिवर्तन कराने से रोकने की कोशिश करने पर पीएफआई सदस्यों ने रामलिंगम की बेरहमी से हत्या कर दी थी। दोनों के बीच कहासुनी हुई थी।
गुर्गों को छह साल पनाह दी
एनआईए की जांच (मामला आरसी-06/2019/एनआईए/डीएलआई) में पता चला कि चारों आरोपियों ने मोहम्मद बुरहानुद्दीन और मोहम्मद नबील हसन नाम के दो जबरन धर्म परिवर्तन कराने वाले गुर्गों को लगभग छह साल तक पनाह दी थी। इन चारों आरोपियों को यह मालूम था कि बुरहानुद्दीन और नबील हसन, रामलिंगम की हत्या में शामिल हैं।
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ये भी पढ़ें: बंगाल: मोहम्मद अजमल सिद्दीकी ने टीएमसी से दिया इस्तीफा, बोले-अभिषेक बनर्जी के साथ काम करना मुश्किल
पहले 18 आरोपियों के खिलाफ दायर किया आरोपपत्र
इससे पहले, एनआईए ने इस मामले में छह फरार जबरन धर्म परिवर्तन कराने वाले गुर्गों समेत 18 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। बाद में एनआईए ने चार गुर्गों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में दो अन्य पनाह देने वालों, मोहम्मद अली जिन्ना और इम्तथुल्ला को भी गिरफ्तार कर लिया गया। उनके खिलाफ मई 2025 और फरवरी 2026 में आरोपपत्र दायर किए गए थे।
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यह हमला सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और आतंक फैलाने के उद्देश्य से रची गई एक बड़ी साजिश का हिस्सा था। उन पर बीएनएस अधिनियम की धारा 61(2) और बीएनएस अधिनियम की धारा 249 (संधि अधिनियम के साथ) के तहत आरोप लगाए गए हैं। पांच फरवरी 2019 को पक्कु विनायकम थोप्पू के पास जबरन धर्म परिवर्तन कराने से रोकने की कोशिश करने पर पीएफआई सदस्यों ने रामलिंगम की बेरहमी से हत्या कर दी थी। दोनों के बीच कहासुनी हुई थी।
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गुर्गों को छह साल पनाह दी
एनआईए की जांच (मामला आरसी-06/2019/एनआईए/डीएलआई) में पता चला कि चारों आरोपियों ने मोहम्मद बुरहानुद्दीन और मोहम्मद नबील हसन नाम के दो जबरन धर्म परिवर्तन कराने वाले गुर्गों को लगभग छह साल तक पनाह दी थी। इन चारों आरोपियों को यह मालूम था कि बुरहानुद्दीन और नबील हसन, रामलिंगम की हत्या में शामिल हैं।
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पहले 18 आरोपियों के खिलाफ दायर किया आरोपपत्र
इससे पहले, एनआईए ने इस मामले में छह फरार जबरन धर्म परिवर्तन कराने वाले गुर्गों समेत 18 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। बाद में एनआईए ने चार गुर्गों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में दो अन्य पनाह देने वालों, मोहम्मद अली जिन्ना और इम्तथुल्ला को भी गिरफ्तार कर लिया गया। उनके खिलाफ मई 2025 और फरवरी 2026 में आरोपपत्र दायर किए गए थे।