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महाराष्ट्र: रेवंत रेड्डी ने फडणवीस से की मुलाकात, क्या है तुम्मिदिहट्टी परियोजना जिस पर हो रही है चर्चा?

Mon, 26 Oct 2026 01:48 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी एएनआई, मुबंई
एएनआई, मुबंई Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Mon, 26 Oct 2026 01:48 PM IST
सार

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से तुम्मिदिहट्टी परियोजना पर चर्चा की। तेलंगाना 152 मीटर एफआरएल पर बैराज बनाने की सहमति चाहता है। परियोजना का लक्ष्य उत्तरी तेलंगाना में लगभग दो लाख एकड़ जमीन की सिंचाई करना है।

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Maharashtra: Revanth Reddy meets Fadnavis; what is the Tummidihatti project that is being discussed?
फडणवीस और रेवंत रेड्डी की अहम बैठक - फोटो : एएनआई

विस्तार

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई के सह्याद्रि स्टेट गेस्ट हाउस में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इस दौरान तुम्मिदिहट्टी परियोजना पर मुख्य रूप से चर्चा हुई। इस बैठक में तेलंगाना के सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी, दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
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तेलंगाना की क्या मांग है? 
दरअसल, तेलंगाना, 152 मीटर के 'फुल रिजर्वॉयर लेवल' (एफआरएल) पर बैराज बनाने के लिए महाराष्ट्र की सहमति मांग रहा है। महाराष्ट्र पहले 148 मीटर की ऊंचाई पर सहमत हो गया था, लेकिन तेलंगाना सरकार का कहना है कि इस स्तर पर पानी की जरूरी मात्रा को दूसरी तरफ मोड़ना संभव नहीं होगा।
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पिछली समीक्षा बैठक में क्या निर्देश दिए?
23 अक्तूबर को हुई एक समीक्षा बैठक में, रेवंत रेड्डी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को जरूरी तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया। इसमें पानी की उपलब्धता, बैराज की प्रस्तावित ऊंचाई और महाराष्ट्र में पानी भरने (डूबने) से प्रभावित होने वाली जमीन के दायरे जैसी जानकारी शामिल होनी चाहिए।
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मुख्यमंत्री को जानकारी देने वाले सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 152 मीटर के एफआरएल पर बैराज बनाने से महाराष्ट्र में लगभग 2,300 एकड़ जमीन डूब जाएगी, जबकि 150 मीटर की ऊंचाई पर यह असर 1,000 एकड़ से कम होगा। अधिकारियों ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र का कोई भी गांव पानी में नहीं डूबेगा।

तेलंगाना सरकार इस प्रस्तावित बैराज का इस्तेमाल उत्तरी तेलंगाना, खास तौर पर अविभाजित आदिलाबाद जिले में सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए करना चाहती है। राज्य सरकार के अनुसार, इस परियोजना से लगभग दो लाख एकड़ जमीन पर सिंचाई की सुविधा मिलने की योजना है।

क्या है तुम्मीदिहट्टी परियोजना?
  • तुम्मीदिहट्टी प्रस्ताव मूल प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना से जुड़ा है। इस परियोजना की परिकल्पना अविभाजित आंध्र प्रदेश के बंटवारे से पहले, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में की गई थी। मूल योजना के अनुसार, प्राणहिता नदी पर एक बैराज बनाया जाना था।
  • इसका उद्देश्य मुख्य रूप से ग्रेविटी नहरों (ढलान वाली नहरों) के जरिए पानी को मोड़ना था, जिसमें पंपिंग की जरूरत बहुत कम पड़ती। इससे आदिलाबाद के कुछ हिस्सों सहित ऊंचाई वाले इलाकों में सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जाना था, और येल्लमपल्ली जलाशय के माध्यम से रंगा रेड्डी जिले के अंतिम छोर तक पानी की आपूर्ति की जानी थी।
  • पिछली बीआरएस सरकार ने इस परियोजना का स्वरूप बदलकर इसे 'कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना' बना दिया था। इसमें मेदिगड्डा, अन्नाराम और सुंडिल्ला बैराज के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पंपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) शामिल किया गया।
  • अब कांग्रेस सरकार फिर से तुम्मीदिहट्टी पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है। उनका तर्क है कि मूल स्रोत का उपयोग करने और बैराज की ऊंचाई में बदलाव करने से उत्तरी तेलंगाना में सिंचाई की जरूरतों के लिए एक दीर्घकालिक समाधान मिल सकता है।

 
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