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राम मंदिर:'अदालत का काम समझौता कराना नहीं'

Tue, 21 Mar 2017 03:41 PM IST
बीबीसी हिंदी. कॉम के लिए
बीबीसी हिंदी. कॉम के लिए Updated Tue, 21 Mar 2017 03:41 PM IST
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Ram temple: 'Do not compromise the court work'
अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की ताजा सलाह बाबरी मस्जिद एक्शन समिति ने ठुकरा दी है। वहीं कानून मंत्री और विश्व हिन्दू परिषद् ने इस सलाह का स्वागत किया है। सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर पर सुनवाई के दौरान कहा है कि दोनों पक्ष मसले को बातचीत के जरिए सुलझाएं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये धर्म और आस्था से जुड़ा मामला है और संवेदनशील मसलों का हल आपसी बातचीत से हो।
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लेकिन इस पर बाबरी मस्जिद एक्शन समिति का कहना है कि बातचीत के कई राउंड्स पहले ही हो चुके हैं लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। बाबरी मस्जिद एक्शन समिति के एक सदस्य सैयद कासिम रसूल इल्यास कहते हैं, "बात-चीत का मतलब है सरेंडर"।
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उन्होंने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, "इलाहाबाद हाईकोर्ट (2010 का फैसला) का फैसला आने से पहले, प्रधानमंत्री वीपी सिंह के जमाने में विश्व हिन्दू परिषद के साथ कई राउंड्स की बातचीत हुई लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला।"
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अदालत फैसला करने से कतरा रही है

Ram temple: 'Do not compromise the court work'
इल्यास आगे कहते हैं, "दूसरी बात ये है कि जब दूसरी पार्टी ने ये कह दिया है कि राम जन्म भूमि है। ये हमारी आस्था से जुडी है। इसको आप छोड़ दीजिए तो हम आगे क्या बात करें?" कासिम रसूल इल्यास के अनुसार अदालत फैसला करने से कतरा रही है। उन्होंने कहा,"अदालत के पास मामला समझौता कराने के लिए नहीं गया है।

मामले पर फैसला करने के लिए गया है। अदालत का काम इन्साफ करना है, समझौता कराना नहीं है।"कासिम रसूल इल्यास का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला हो उन्हें मंजूर है। भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट में अयोध्या मामले की तुरंत सुनवाई के लिए याचिका दायर की हुई है। 

राम मंदिर आस्था का मामला:सुब्रमण्यम स्वामी 

Ram temple: 'Do not compromise the court work'
सुब्रमण्यम स्वामी ने हाल ही में बीबीसी से किए फेसबुक लाइव में कहा था कि अयोध्या में दो साल के भीतर वो राम मंदिर बनवाएंगे और वहीं बनवाएंगे जहां वो पहले से मौजूद है। उन्होंने कहा था, "हम कहीं और राम मंदिर नहीं बना सकते क्योंकि ये आस्था का मामला है।"

1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ढाह दिया गया था। 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ पीठ ने बहुमत से यह फैसला दिया था कि जिस जगह पर राम की मूर्ति स्थापित है वहाँ मूर्ति ही रहेगी और शेष जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बाँटा जाएगा। इसमें से एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने का फैसला किया गया था।
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