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Ram Mandir: डिजिटल भुगतान राम मंदिर के निर्माण से लेकर हर क्षेत्र में निभा रहा है 'नल और नील' की भूमिका

Sat, 23 Dec 2023 07:05 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Sat, 23 Dec 2023 07:05 PM IST
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सार
डिजिटल इंडिया से जुड़े और भारत विकास यात्रा में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक 2017-18 में यूपीआई के जरिए भुगतान का आकार बहुत ही छोटा था। तब से आज देखएिगा, तो अब लोगबाग इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल करने लगे हैं...
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Ram Mandir: Digital payment is playing important role in every field right from the construction of Ram Temple
Ram Mandir - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अयोध्या से लौटकर, 23 दिसंबर। '9 रुपये खुले नहीं हैं। क्यूआर कोड दीजिए, पे कर देता हूं।' सरयू नदी के किनारे फूल माला, दीया, धूप, बत्ती बेच रहे रामधन यादव ने इतना कहकर अपने मोबाइल का स्कैनर भुगतान के लिए तैयार कर लिया। निगाह गई तो उनके छाते पर क्यूआर कोड चस्पा मिला। सरयू नदी के किनारे ही शिवलिंग स्थापित था। पत्थर पर क्यूआर कोड चिपका था। पूछने पर पता चला कि एक पुजारी के खाते में इसका चढ़ावा जाता है। रामधन ने ही बताया कि कई श्रद्धालु ऐसे आते हैं, जिनके पासे खुले पैसे नहीं होते तो ऑनलाइन चढ़ावा या दक्षिणा दे देते हैं। सच में यह डिजिटल इंडिया है। धीरे-धीरे और अब तो तेजी से लेन-देन का भारत बदल रहा है।

वहां से बढ़े तो श्रीकनक भवन मंदिर आए। क्यू आर कोड चस्पा मिला। संदेश भी, सेवा की राशि देने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करें। दसवीं सदी के बने हनुमान गढ़ी मंदिर परिसर में एक संन्यासी पुजारी ने बताया कि इससे तमाम झंझट अब खत्म हो गए हैं। मंदिर में ताला वाला दान पात्र लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। अयोध्या में यह खूब चलता है। मंदिर से नीचे उतरिए और बाजार में आइए लड्डू, फूल, माला, प्रसाद और अन्य की खरीददारी के लिए अब आपको जेब में कैश रखने की जरूरत नहीं। अयोध्या शहर में घूमने के दौरान डिजिटल इंडिया, यूपीआई पेमेंट और क्यूआर कोड स्कैन का गजब का प्रयोग दिखाई दिया। हनुमान गढ़ी के एक साधु ने फोन पर बताया कि अब बाहर से भी लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार आसानी से दान कर देते हैं। राम लला मार्ग पर दही में जलेबी को मिलाकर कुल्हड़ में बेचते मौर्या जी बड़ी आसानी से कह देते हैं कि आप जैसे चाहें पेमेंट कर दें। समोसे की चाट और दही जलेबी बेचने वाले मौर्या जी कहते हैं कि यूपीआई पेमेंट में गिनने की जरूरत नहीं पड़ती। समय बचता है। बाकी सब ठीक है। शायद कुछ यही वजहें हैं, जिसने देश में यूपीआई पेमेंट के जरिए होने वाले भुगतान के आंकड़े को 8.5 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंचा दिया है।

राम मंदिर निर्माण और तीर्थ क्षेत्र के विकास में ऑनलाइन पेमेंट की जबरदस्त भूमिका

रामसेवक पुरम और कार सेवक पुरम में भी लोगों से बातचीत में यूपीआई के जरिए होने वाले भुगतान की झलक दिखाई दी। अरविंद गुप्ता ने कहा कि सही माने में यह अच्छी चीज है। सुरक्षित भी है और सब कुछ रिकार्ड में है। राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र विकास से जुड़े सूत्र भी बताते हैं कि यूपीआई के जरिए मंदिर निर्माण में लोगों का भारी सहयोग मिल रहा है। देश लोग राम मंदिर निर्माण के क्षेत्र में खुलकर योगदान दे रहे हैं। यहां तक कि विदेशों से भी राम मंदिर निर्माण और क्षेत्र के विकास के लिए रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को बहुत बड़ी मात्रा में धनराशि की प्राप्ति हो रही है। अयोध्या में बन रहे हवाई अड्डे का निरीक्षण करने गए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारी ने बताया कि पहले टैक्सी के बिल या भोजनालय पर भोजन, चाय नाश्ते के लिए बिल लेने में समस्या आती थी। वह बताते हैं कि जब एयरपोर्ट की रूपरेखा तैयार करने का काम चल रहा था, तब उनके लिए यह एक समस्या थी, लेकिन यूपीआई से भुगतान करने के बाद बिल लेने का झंझट खत्म हो जाता है।

डिजिटल इंडिया से जुड़े और भारत विकास यात्रा में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक 2017-18 में यूपीआई के जरिए भुगतान का आकार बहुत ही छोटा था। तब से आज देखएिगा, तो अब लोगबाग इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल करने लगे हैं। सूत्र का कहना है कि सही मायने में डिजिटल भुगतान को देखना हो, तो छोटे-छोटे शहरों के छोटे-छोटे बाजार में जाइए। वह कहते हैं कि राम मंदिर निर्माण में देश के भुगतान के अन्य माध्यम अपनी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। इसमें यूपीआई के जरिए होने वाला डिजिटल भुगतान भी गिलहरी की तरह अपनी सेवाएं दे रहा है।

सरकार भी जन-जन तक पहुंचा रही है डिजिटल इंडिया और जनता के अधिकार की सूचना

इस समय पूरे देश में भारत विकास संकल्प यात्रा चल रही है। इस विकास यात्रा का संदेश देने के लिए बड़ी, बड़ी स्क्रीन और कैनोपी के साथ गाडिय़ां देश के कोने-कोने में और गांव-गांव तक जा रही हैं। अयोध्या के सदर बाजार में भी इसका नजारा देखने को मिला। विकास यात्रा का यह रथ तमाम लोगों को आयुष्मान भारत, यूपीआई, आधार कार्ड, प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री आवास निधि, डायरेक्ट बैनिफिट ट्रांसफर, उज्ज्वला योजना समेत तमाम केंद्र सरकार के योजनाओं की जानकारी देता है। प्रधानमंत्री मोदी खुद देश की जनता से विभिन्न योजनाओं की जानकारी और उसका लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित करते नजर आते हैं। सदर बाजार के रहने वाले मोहम्मद राशिद कहते हैं कि कई चीजें बड़ी अच्छी हो गई हैं। अब आपको तकादा (पैसा लेने के लिए जाना) करने नहीं जाना पड़ता। अब मोबाइल फोन पर ही बात कर लीजिए और लोग पेटीएम कर देते हैं। इतना ही नहीं सब्जी लेने गए और पैसा लेकर जाना भूल गए, तो मोबाइल फोन से आप भुगतान करके आ सकते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि नकद पैसा लेकर चलने पर गिरने या किसी के छीनने का खतरा रहता है। अब इस चिंता से भी मुक्ति मिल रही है। 35 साल की रंजीता चौहान ब्यूटीशियन हैं। रंजीता के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी आपको हर कोने में मिलेंगे। रंजीता कहती हैं कि आयुष्मान भारत ने काफी बड़ी सहूलियत दी है। अब आपको पांच लाख रुपये तक के इलाज के लिए किसी का मुंह ताकने की जरूरत नहीं है। पहले तो हम इस खर्च से डरते थे और सरकारी अस्पताल में ही हमें लंबी लाइन से जूझना पड़ता था पर अब ऐसा नहीं है।

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