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Ram Mandir: अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद मंदिर की सुरक्षा से हट जाएगी CRPF, फिर कौन करेगा हिफाजत?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 02 Jan 2024 06:53 PM IST
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सार
केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की सुरक्षा, राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। वहां पर लंबे समय से सीआरपीएफ तैनात है। सर्वोच्च अदालत के निर्देश पर मंदिर परिसर में सीआरपीएफ को तैनात किया गया था। इसके अलावा यूपी पुलिस व पीएसी को भी मंदिर परिसर में लगाया गया है...
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Ram Mandir: CRPF will be removed from the security of the temple after the inauguration ceremony in Ayodhya
Ram Mandir Security - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

अयोध्या में 70 एकड़ जमीन पर बनाए जा रहे राम मंदिर में 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं। मंदिर परिसर की सुरक्षा को अभेद बनाया जा रहा है। राम मंदिर परिसर में आतंकियों द्वारा हमला करने की धमकी आती रहती हैं। मंदिर परिसर, पूरी तरह से 'नो-फ्लाइंग जोन' घोषित हो चुका है। ड्रोन, हवाई जहाज या चॉपर, यहां से नहीं गुजर सकेंगे। फिदायीन अटैक और डार्क नेट जैसे खतरों से राम मंदिर की बेजोड़ सुरक्षा व्यवस्था की गई है। अभी इस मंदिर परिसर की सुरक्षा को 'सीआरपीएफ' संभाल रही है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपन्न होने के बाद मंदिर की सुरक्षा, उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (यूपीएसएसएफ) को सौंप दी जाएगी।

केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की सुरक्षा, राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। वहां पर लंबे समय से सीआरपीएफ तैनात है। सर्वोच्च अदालत के निर्देश पर मंदिर परिसर में सीआरपीएफ को तैनात किया गया था। इसके अलावा यूपी पुलिस व पीएसी को भी मंदिर परिसर में लगाया गया है। यूपीएसएसएफ का गठन केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की तर्ज पर किया गया है। इसे सीआरपीएफ, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सीआईएसएफ द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। मंदिर की सुरक्षा के लिए यूपीएसएसएफ की एक समर्पित बटालियन तैयार की गई है। हालांकि 22 जनवरी से शुरू होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह में सीआरपीएफ, मुख्य बल के तौर पर मंदिर परिसर की सुरक्षा करेगी। इसके बाद इस बल को वहां से हटा लिया जाएगा। मंदिर परिसर के छह स्तरीय सुरक्षा घेरे में सेंध लगाना आसान नहीं है। सुरक्षा बलों को 'जी20' शिखर सम्मेलन की तरह विशेष पास जारी किए जा रहे हैं, ताकि कोई भी सुरक्षा कर्मी अपनी ड्यूटी से इधर-उधर न हो सकें। मंदिर परिसर और उसके आसपास लगभग 600 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से लैस सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। अयोध्या में सीआरपीएफ, यूपीएसएसएफ, पीएसी और सिविल पुलिस चप्पे-चप्पे पर मौजूद है।

'पुलिस और फौज' की वर्दी में आ सकते हैं आतंकी

कई बार ऐसे इनपुट मिलते रहे हैं कि राम मंदिर के सुरक्षा घेरे को तोड़ने के लिए विदेशी आतंकी समूह सक्रिय हैं। इनमें अफगानिस्तान और पाकिस्तान के आतंकी समूह शामिल हैं। ये समूह, नेपाल सीमा के जरिए मंदिर पर हमला करने की रणनीति बनाते रहते हैं। मंदिर पर फिदायीन अटैक का भी एक बड़ा खतरा रहा है। इस तरह के इनपुट में ऐसी संभावना जताई गई है कि मंदिर में 'पुलिस और फौज' की वर्दी पहनकर आतंकी हमला हो सकता है। पहले ब्लास्ट और उसके बाद फायरिंग, हमले के लिए आतंकी कुछ इसी तरह की प्लानिंग करते हैं। ऐसे संभावित हमलों के मद्देनजर मंदिर परिसर की सुरक्षा को पुख्ता बनाया गया है। मंदिर की सुरक्षा में सीआरपीएफ, यूपीएसएसएफ, पीएसी और लोकल पुलिस तैनात है। अब यूपीएसएसएफ को स्थायी तौर पर मंदिर की सुरक्षा की जिम्मेदारी मिल सकती है, इसके मद्देनजर ही इस फोर्स के जवानों को प्रशिक्षिण दिया गया है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह से एक सप्ताह पहले मंदिर परिसर और उसके आसपास, एक विशेष सिक्योरिटी घेरा बना दिया जाएगा।

हर समय मंदिर में तैनात रहता है बमरोधी दस्ता

सीआईएसएफ ने मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं। यूपी सरकार, ने उन सुझावों पर अमल किया है। इस बल के शीर्ष अफसरों ने मंदिर परिसर का दौरा किया था। इंटेलिजेंस इनपुट जुटाने के लिए अलग से एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंदिर के 6 स्तरीय सुरक्षा घेरे में सटीक खुफिया जानकारी जुटाने के लिए आईबी, आईएलयू 'खुफिया संपर्क इकाई' और सीआरपीएफ की इंटेलिजेंस विंग, को विशेष टॉस्क दिया गया है। मंदिर परिसर की सुरक्षा को तीन भागों में बांटा गया है। रेड जोन में मंदिर परिसर के अंदर वाला हिस्सा शामिल है। येलो जोन में आसपास के वे सभी रास्ते शामिल किए गए हैं, जो मंदिर परिसर की तरफ जाते हैं। ग्रीन जोन का दायरा इससे कुछ ज्यादा होता है। यूपी पुलिस, पीएसी और सीआरपीएफ की एक बटालियन, 24 घंटे मंदिर परिसर की चौकसी करती है। ये बल सभी तरह के हमलों का जवाब देने में पारंगत हैं। अगर कोई आतंकी हमला होता है या विस्फोट के जरिए कोई व्यक्ति/समूह, मंदिर को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करता है, तो उसे पहले ही नेस्तानाबूद कर दिया जाता है। जो इनपुट मिले हैं, उनमें मंदिर परिसर को नुकसान पहुंचाने के लिए आसपास कोई दंगा कराया जा सकता है। बम फेंकने व सशस्त्र हमले से निपटने का भी पूरा इंतजाम है। बमरोधी दस्ता हर समय मंदिर में तैनात रहता है।

मंदिर को नुकसान पहुंचाने के लिए 'डार्क नेट' की मदद

राम मंदिर तक पहुंचने के मार्ग भी सुरक्षा के हिसाब से तय किए गए हैं। एक स्पेशल मार्ग है, जहां पर तीन जगह चेकिंग होती है। ऐसा नहीं है कि कोई व्यक्ति किसी भी मार्ग से मुख्य मंदिर तक पहुंच सकता है। उसके लिए एक मार्ग निश्चित किया गया है। मंदिर में कुछ भी लाना वर्जित है। कुछ महीने पहले ही एक व्यक्ति ने डार्क नेट का इस्तेमाल कर मंदिर को उड़ाने की धमकी दी थी। पुलिस की तत्परता से वह व्यक्ति पकड़ा गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर है। डार्क नेट और इंटरनेट के जरिए अपराध को अंजाम देने वाले दूसरे तौर तरीकों पर भी नजर रखी जा रही है। मंदिर की सुरक्षा के लिए आसपास के इलाके में भी गहन जांच पड़ताल होती है। स्थानीय निवासियों के यहां पर कौन आ रहा है, ये सब बताना पड़ता है। इसका एक रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। किसी व्यक्ति के यहां कोई समारोह है, तो बाकायदा उस पर इंटेलिजेंस इकाई की नजर रहती है। यह देखा जाता है कि वहां कोई अपराधी, मंदिर को नुकसान पहुंचाने की साजिश तो नहीं रच रहे। मंदिर के आसपास के इलाके में किसी को मैपिंग करने की इजाजत नहीं है।

मंदिर की सुरक्षा होगी यूपीएसएसएफ के हवाले

मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद यहां की सुरक्षा यूपीएसएसएफ को सौंपे जाने की तैयारी है। इस बाबत औपचारिक निर्णय हो चुका है। यूपी पुलिस की स्पेशल सर्विस यूनिट में पीएसी के जवानों को शामिल किया गया है। मंदिर में एनएसजी की टीम भी आती रहती है। मंदिर के आसपास आठ मस्जिद हैं। वहां तैनात सुरक्षा बलों को यह ट्रेनिंग दी गई है कि हमले की स्थिति में किसकी क्या जिम्मेदारी रहेगी। सर्विलांस के लिए अयोध्या में ही लगभग 2500 से अधिक कैमरे लगाए गए हैं। वाहनों को एक तय दूरी पर रोका जा रहा है। अगर कोई खास मेहमान है, तो उसके लिए पास जारी होता है। इसके बाद भी सुरक्षा कर्मी, उसे अकेला नहीं छोड़ते। बतौर गाइड, वे उसके साथ रहते हैं। मंदिर परिसर की सुरक्षा को लेकर विशेष समीक्षा रिपोर्ट तैयार होती रहती है। इस काम को समय समय पर विभिन्न एजेंसियां अंजाम देती हैं। सिक्योरिटी सर्वे होता रहता है।

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