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उपराष्ट्रपति चुनाव: शीत सत्र से बदला नजर आएगा राज्यसभा का नजारा 

Sat, 05 Aug 2017 07:17 PM IST
संजय मिश्र,नई दिल्ली
संजय मिश्र,नई दिल्ली Updated Sat, 05 Aug 2017 07:17 PM IST
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Rajya Sabha views from the Parliament's Winter Session will change
rajya sabha
संसद के आगामी शीत सत्र से राज्यसभा का नजारा बदला नजर आएगा। एक ओर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के रूप में भाजपा का अपना नेता सभापति के रूप में विराजमान रहेगा। तो दूसरी ओर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी राज्यसभा में सदस्य के नाते मौजूद रहेंगे।
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उपराष्ट्रपति पद पर नायडू की उपस्थिति से ज्यादा शाह के राज्यसभा में मौजूदगी को लेकर सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। वह भी ऐसे में जब शाह ने खुद से स्पष्ट कर दिया है कि वे पीएम मोदी की कैबिनेट में शामिल नहीं होंगे। शुरू में इस बात की अटकलों ने जोर पकड़ लिया था कि मोदी कैबिनेट में शामिल होने की खातिर शाह को राज्यसभा में लाया जा रहा है। 
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नायडू और शाह से कैसे बदलेगी राज्यसभा की सियासत

Rajya Sabha views from the Parliament's Winter Session will change
venkaiah naidu

पूरे संवैधानिक संस्थानों में केवल एक राज्यसभा ही ऐसी संस्था है जहां मोदी सरकार कमजोर है। संवैधानिक पद होने के बावजूद वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति बनने से राज्यसभा में सरकार की रणनीति को आधार मिलेगा। तो शाह की उपस्थिति से भाजपा के मनोबल पर सीधा असर नजर आएगा।

पीएम मोदी के बाद भाजपा अध्यक्ष शाह ऐसे नेता हैं जोकि कार्यकर्ता से लेकर अपने नेता तक का मनोबल बढ़ाने का माद्दा रखते हैं। उनकी उपस्थिति मात्र से ही भाजपा खेमे में आक्रामकता दिखेगी तो विपक्ष के हौसले कमजोर पड़ते नजर आएंगे। संख्याबल के मामले में कांग्रेस को पछाड कर भाजपा राज्यसभा में भी बेशक नंबर वन की पार्टी हो गई है। मगर विपक्ष के मुकाबले उसका आंकड़ा अभी नीचे है।

ऐसे में उच्च सदन में शाह की उपस्थिति पार्टी के तेवरों में और आक्रामकता भरेगी। इस बात के संकेत खुद पीएम मोदी ने भी दिए हैं। शुक्रवार को सांसदों के भोज में पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह पहला मौका है जब राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष सरीखे संवैधानिक पदों पर बैठे लोग एक ही कुनबे के हैं। उनका इशारा स्पष्ट था कि सभी की पृष्ठभूमि संघ से जुडी हुई है। हालांकि पीएम ने चुनौतियों का भी जिक्र किया जिनका सामना आने वाले दिनों में भाजपा को करना पडेगा। पीएम मोदी ने कहा है कि संसद की गरिमा को बढ़ाने की जिम्मेदारी हमारे उपर है। वरना समय माफ नहीं करेगा। 


रणनीति के तहत ही हुआ नायडू का चयन 
सूत्र बताते हैं कि उपराष्ट्रपति के पद पर पीएम मोदी ने अपने विश्वासपात्र नायडू का चयन रणनीति के तहत ही किया है। राज्यसभा में अब तक सरकार के प्रबंधन की जिम्मेदारी वित्त मंत्री अरूण जेटली और मुख्त्तार अब्बास नकवी के जिम्मे थी। मगर उच्चसदन में कई अवसरों पर विपक्ष के मुकाबले सरकार की रणनीति फेल रही है।

कई अहम मौकों पर विपक्ष, सरकार को पटकनी देने में कामयाब रहा है। ताजा मौका पीएम मोदी के स्वपनिल ओबीसी विधेयक का है। जिसमें विपक्ष अपने संशोधन मनवाने में कामयाब रहा है। नायडू के उपराष्ट्रपति बनने से सरकार को रणनीतिक रूप से बढ़त हासिल हो जाएगी। उपराष्ट्रपति हामिद अंशारी पर विपक्ष के हाथों खेलने का आरोप लगता रहा है। क्योंकि उनका चयन यूपीए शासन काल में हुआ था।

अमित शाह के राज्यसभा में पहुंचने के मायने 

Rajya Sabha views from the Parliament's Winter Session will change
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह - फोटो : amar ujala
देश की वर्तमान राजनीति में कद्दावर नेताओं के मामले में पीएम मोदी के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को गिना जाता है। अमित शाह पहली दफे राज्यसभा पहुंच रहे हैं। राज्यसभा में उनकी एंट्री को शुरू में केंद्रीय कै​बिनेट में शामिल होने के रूप में देखा जा रहा था।

मगर शाह ने खुद से इस बात का खंडन किया है कि वे पीएम मोदी की कैबिनेट में शामिल नहीं होंगे। बल्कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी का कार्य करते रहेंगे। इसके साथ ही राज्यसभा में उनकी मौजूदगी को राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे हैं। कहा जा रहा है कि शाह के आने से राज्यसभा में भाजपा की आक्रामकता तो बढ़ेगी ही। साथ में इस अवसर को शाह अपनी राजनीतिक छवि को उदार बनाने की रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। 

विरोधी दलों से संबंध बनाने का शाह को मिलेगा 
भाजपा का अध्यक्ष होने के नाते शाह को विरोधी दलों के नेताओं से मिलने का सीधा अवसर बहुत ही कम मिलता है। मगर राज्यसभा में आने से उनके लिए ऐसे अवसर सहज मिलने लगेंगे जब वे विपक्षी दलों के नेताओं को समझ और परख सकें। संख्या बल के मामले में राज्यसभा में बहुमत तक पहुंचने में भाजपा को 2018 तक इंतजार करना पडेगा।

जबकि सरकार को तेजी से विकास योजनाओं को बढाना है। ऐसे में राज्यसभा की सदश्यता का लाभ उठाते हुए शाह अन्य दलों के नेताओं से भी संपर्क बढा सकते हैं। पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि शाह को भाजपा अध्यक्ष के अलावा पीएम मोदी का खास माना जाता है ऐसे में दूसरे दलों के कई नेता खुद से ही चाहेंगे कि वे किसी न किसी बहाने शाह से अपना संपर्क सीधा बनाएं। दोनों ही हालातों में भाजपा को फायदा होने वाला है। यही वजह है कि संसद के शीत सत्र से राज्यसभा का नजारा बदला नजर आएगा। एक पोल के रूप में शाह की मौजूदगी भी देखने लायक रहेगी।
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