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Pending Bills In Parliament: राज्यसभा में दशकों से अटके हैं विधेयक, 19 की सूची; 34 साल पुराना बिल भी शामिल
Sat, 17 Jan 2026 06:03 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 17 Jan 2026 06:03 PM IST
सार
राज्यसभा में 19 विधेयक आज भी मंजूरी का इंतजार कर रहे है। इन विधेयक में कई तो दशकों पुराने है। इनमें सबसे पुराना 1992 का जनसंख्या नियंत्रण बिल है, जिसमें 'दो बच्चों की नीति' का प्रस्ताव था।
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संसद भवन
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारतीय संसदीय व्यवस्था में राज्यसभा एक 'स्थायी सदन' की भूमिका निभाती है। वर्तमान में यहां 19 सरकारी विधेयक लंबित हैं। इनमें से कुछ तो दशकों पुराने हैं। इसमें सबसे पुराना विधेयक जनसंख्या नियंत्रण से जुड़ा हुआ है, जिसे साल 1992 में पेश किया गया था। चूंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता। इसलिए यहां पेश किए गए विधेयक स्वतः समाप्त नहीं होते। राज्यसभा के एक तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं, जबकि लोकसभा के भंग होने पर वहां लंबित सभी विधेयक खत्म नहीं होता।
कौन-कौन से बिल है लंबित?
सदन के एक बुलेटिन के मुताबिक, सबसे पुराना 'संविधान (79वां संशोधन) विधेयक 1992' है। इस बिल में छोटे परिवार के नियम को बढ़ावा देने और इसे मौलिक कर्तव्य बनाने की बात कही गई थी। इसमें यह भी प्रस्ताव था कि अगर किसी सांसद या विधायक के दो से ज्यादा बच्चे हों, तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाए।
ये भी पढ़ें: Parliamentary Report: संसद में 30 प्रतिशत से भी कम समय विधायी कामकाज पर हुआ खर्च, प्रश्नकाल भी रहा प्रभावित
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ये बिल भी है लंबित
लंबित विधेयकों में 'दिल्ली किराया (संशोधन) विधेयक 1997' भी है। इसे किराया कानूनों को आधुनिक बनाने के लिए लाया गया था, लेकिन मकान मालिकों और किराएदारों ने इसका काफी विरोध किया। इसके अलावा 'बीज विधेयक 2004' भी अटका है, जिसका मकसद बीजों की गुणवत्ता सुधारना था। सरकार अब इसकी जगह बीज विधेयक 2025 लाने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जब श्रम मंत्री थे, तब 2011 में प्रवासी मजदूरों से जुड़ा एक बिल पेश हुआ था, वह भी अभी पास नहीं हुआ है। यूपीए सरकार के समय 2013 में पेश किए गए निर्माण मजदूरों, रोजगार कार्यालय और एससी-एसटी प्रतिनिधित्व से जुड़े बिल भी लंबित हैं।
ये भी पढ़ें: UP: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का बड़ा हमला, बोले-भाजपा अपने घटक दलों को खत्म कर रही है
एनडीए के भी बिल हैं लंबित
मौजूदा एनडीए सरकार के समय पेश किए गए लंबित विधेयकों में संविधान (एक सौ पच्चीसवां संशोधन) विधेयक 2019 प्रमुख है, जिसका उद्देश्य असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में स्वायत्त परिषदों की वित्तीय और कार्यकारी शक्तियों को बढ़ाना तथा पूर्वोत्तर में आदिवासी स्वायत्तता को मजबूत करना है। इसी श्रेणी में अनिवासी भारतीयों के विवाह के पंजीकरण से जुड़ा विधेयक 2019 भी शामिल है। राज्यसभा में सबसे नया लंबित विधेयक कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 है, जो देश में कीटनाशकों के नियमन और सुरक्षित उपयोग से संबंधित है।
अन्य वीडियो-
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कौन-कौन से बिल है लंबित?
सदन के एक बुलेटिन के मुताबिक, सबसे पुराना 'संविधान (79वां संशोधन) विधेयक 1992' है। इस बिल में छोटे परिवार के नियम को बढ़ावा देने और इसे मौलिक कर्तव्य बनाने की बात कही गई थी। इसमें यह भी प्रस्ताव था कि अगर किसी सांसद या विधायक के दो से ज्यादा बच्चे हों, तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाए।
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ये बिल भी है लंबित
लंबित विधेयकों में 'दिल्ली किराया (संशोधन) विधेयक 1997' भी है। इसे किराया कानूनों को आधुनिक बनाने के लिए लाया गया था, लेकिन मकान मालिकों और किराएदारों ने इसका काफी विरोध किया। इसके अलावा 'बीज विधेयक 2004' भी अटका है, जिसका मकसद बीजों की गुणवत्ता सुधारना था। सरकार अब इसकी जगह बीज विधेयक 2025 लाने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जब श्रम मंत्री थे, तब 2011 में प्रवासी मजदूरों से जुड़ा एक बिल पेश हुआ था, वह भी अभी पास नहीं हुआ है। यूपीए सरकार के समय 2013 में पेश किए गए निर्माण मजदूरों, रोजगार कार्यालय और एससी-एसटी प्रतिनिधित्व से जुड़े बिल भी लंबित हैं।
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एनडीए के भी बिल हैं लंबित
मौजूदा एनडीए सरकार के समय पेश किए गए लंबित विधेयकों में संविधान (एक सौ पच्चीसवां संशोधन) विधेयक 2019 प्रमुख है, जिसका उद्देश्य असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में स्वायत्त परिषदों की वित्तीय और कार्यकारी शक्तियों को बढ़ाना तथा पूर्वोत्तर में आदिवासी स्वायत्तता को मजबूत करना है। इसी श्रेणी में अनिवासी भारतीयों के विवाह के पंजीकरण से जुड़ा विधेयक 2019 भी शामिल है। राज्यसभा में सबसे नया लंबित विधेयक कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 है, जो देश में कीटनाशकों के नियमन और सुरक्षित उपयोग से संबंधित है।
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