राज्यसभा में दिवालिया कानून से जुड़ा संशोधन विधेयक पारित, जानें इसे क्यों लाया गया
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संसद के मानसून सत्र का शनिवार को छठा दिन है। राज्यसभा में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिवाला और और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 में संशोधन के लिए विधेयक पेश किया। जिस पर चर्चा के बाद राज्यसभा में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (दूसरा संशोधन) अध्यादेश, 2020 को पास कर दिया गया।
अभूतपूर्व स्थिति के कारण लाना पड़ा अध्यादेश : निर्मला
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को राज्यसभा में कहा कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (दूसरा संशोधन) अध्यादेश कोविड-19 महामारी के कारण पैदा हुई अभूतपूर्व स्थिति के कारण लाया गया था। उन्होंने कहा कि महामारी के कारण बनी स्थिति की वजह से समय की मांग थी कि तत्काल कदम उठाए जाएं और उसके लिए अध्यादेश का तरीका चुना गया।
वित्त मंत्री ने कहा कि अध्यादेश को कानून बनाने के लिए सरकार अगले ही सत्र में विधेयक लेकर आ गई। वह दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (दूसरा संशोधन), 2020 पर हुई चर्चा का जवाब दे रही थीं।
उनके जवाब के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके साथ ही सदन ने माकपा सदस्य केके रागेश द्वारा पेश उस संकल्प को नामंजूर कर दिया जिसमें दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (दूसरा संशोधन) अध्यादेश, 2020 को अस्वीकार करने का प्रस्ताव किया गया था। इससे पहले विधेयक पर हुई चर्चा में कई सदस्यों ने अध्यादेश को लेकर सरकार की आलोचना की थी।
कोविड-19 महामारी के कारण लागू किए गए लॉकडाउन के संदर्भ में निर्मला सीतारमण ने कहा कि उस समय आजीविका से ज्यादा जरूरी जान की हिफाजत करना था। उन्होंने कहा कि इसका असर लोगों के साथ ही अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। लेकिन, आम लोगों की जान बचाना ज्यादा महत्वपूर्ण था। हालांकि उन्होंने कहा कि लोगों को हुई परेशानी पर संज्ञान लिया गया और सरकार ने कई कदम उठाए।
उन्होंने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता का जिक्र करते हुए कहा कि यह अच्छा काम कर रही है और अपने मकसद को पूरा करने में सफल रही है।
Rajya Sabha passes the Insolvency and Bankruptcy Code (Second Amendment) Bill 2020 pic.twitter.com/tmoMeB65wN
— ANI (@ANI) September 19, 2020
भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की राज्यसभा में उठी मांग
राज्यसभा में शनिवार को भाजपा के एक सदस्य ने भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग करते हुए कहा कि करीब 50 साल से की जा रही इस मांग को पूरा करने के लिए सरकार को तत्काल विधेयक लाना चाहिए।
भाजपा के नीरज शेखर ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में भोजपुरी बोलने वालों की संख्या करीब 20 करोड़ है और विदेशों में करीब आठ करोड़ लोग भोजपुरी बोलते हैं।
उन्होंने कहा कि मॉरीशस, सूरीनाम, नेपाल और युगांडा में भोजपुरी भाषा बोलने वालों की बड़ी संख्या है। मॉरीशस और नेपाल में इस भाषा को संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। शेखर ने कहा कि 'भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में डाले जाने की मांग 1969 से की जा रही है। सरकार को चाहिए कि पिछले करीब 50 साल से चली आ रही इस मांग को पूरा करने के लिए वह तत्काल एक विधेयक लाए।'