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Rajouri Encounter: घाटी में अफगानिस्तान फ्रंट पर प्रशिक्षित दहशतगर्द बने चुनौती, छिपे हैं 70 पाकिस्तानी आतंकी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 23 Nov 2023 07:15 PM IST
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सार
Rajouri Encounter: राजौरी में चल रही मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए हैं, जिनमें से एक पाकिस्तानी आतंकी 'क्वारी' भी है। वह पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'लश्कर ए तैयबा' का हाई रैंक आतंकी है। इस आतंकी को पाकिस्तान/अफगानिस्तान फ्रंट पर प्रशिक्षित किया गया था...
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Rajouri Encounter: Trained LeT terrorist in Afghanistan front becomes a challenge in the valley
Rajouri Encounter - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के राजौरी के बाजीमाल इलाके में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में सेना के कैप्टन एमवी प्रांजल, कैप्टन शुभम और हवलदार माजिद सहित चार शहादतें हुई हैं। एक अन्य अधिकारी और जवान भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। राजौरी में चल रही मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए हैं, जिनमें से एक पाकिस्तानी आतंकी 'क्वारी' भी है। वह पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'लश्कर ए तैयबा' का हाई रैंक आतंकी है। इस आतंकी को पाकिस्तान/अफगानिस्तान फ्रंट पर प्रशिक्षित किया गया था। क्वारी पिछले साल से ही राजौरी क्षेत्र में सक्रिय था। वह ट्रेंड स्नाइपर और आईईडी तैयार करने में भी एक्सपर्ट था। सूत्रों का कहना है कि इस वर्ष जेएंडके में जितनी भी बड़ी मुठभेड़ हुई हैं, उनमें ज्यादातर हाई रैंक वाले ट्रेंड आतंकी मारे गए हैं। इन आतंकियों ने सुरक्षा बलों को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में 70 पाकिस्तानी आतंकी छिपे हैं। इनमें से अधिकांश दहशतगर्दों की ट्रेनिंग अफगानिस्तान फ्रंट पर हुई है। इन सभी आतंकियों तक पहुंचाना, सुरक्षा बलों के लिए यह किसी चुनौती से कम नहीं है।

दो दर्जन से अधिक स्थानीय दशहतगर्द

इससे पहले सितंबर में अनंतनाग जिले के कोकेरनाग क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल 'आरआर' के कमांडिंग अफसर (कर्नल) मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष और जम्मू कश्मीर पुलिस के डीएसपी हुमायूं भट्ट शहीद हो गए थे। इस मुठभेड़ में दो अन्य जवानों ने भी शहादत दी। साल 2020 के बाद जम्मू-कश्मीर में यह पहली घटना थी, जिसमें सेना के कमांडिंग अफसर शहीद हुए थे। मुठभेड़ में दो आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया। जम्मू-कश्मीर में इस साल सुरक्षा बलों की मुठभेड़ में कुल 60 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं। खास बात ये है कि मारे गए दहशतगर्दों में करीब डेढ़ दर्जन स्थानीय और 48 विदेशी आतंकी थे। सूत्रों के मुताबिक, पीर पंजाल की गुफाओं सहित जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में 70 विदेशी यानी पाकिस्तान मूल के आतंकी छिपे हैं। इनके अलावा दो दर्जन से अधिक लोकल दशहतगर्द भी मौजूद हैं।

मुश्किल लोकेशन पर बैठे रहते हैं आतंकी

भले ही सीमा पर कोई बड़ी घुसपैठ नहीं हुई है, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान की तरफ से बॉर्डर पार कर आतंकी, जेएंडके में पहुंचे हैं। सुरक्षा बलों द्वारा बॉर्डर पर घुसपैठ के कई प्रयास असफल किए गए हैं। नेपाल का मार्ग, आतंकियों के भारत में प्रवेश करने का एंट्री प्वाइंट तो नहीं बन रहा, ये बात सुरक्षा एजेंसियों के दिमाग में है। जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों के ज्वाइंट ऑपरेशन में इस वर्ष लगभग सत्तर आतंकी मारे गए हैं। मौजूदा समय में सौ से अधिक आतंकी सक्रिय बताए जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस वर्ष हुई ज्यादातर मुठभेड़, सामान्य नहीं रही हैं। आतंकी मारे गए हैं, लेकिन उन्होंने सुरक्षा बलों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। मारे गए कई आतंकी, अफगानिस्तान के लड़ाकों की तर्ज पर प्रशिक्षित किए गए थे।

उनके पास सुरक्षा बलों की आवाजाही से लेकर कई दूसरे इनपुट तक मौजूद रहे हैं। कोकेरनाग क्षेत्र में छिपे दो आतंकियों तक पहुंचने में सुरक्षा बलों को लंबा वक्त लगा था। आतंकियों ने अपने छिपने के लिए ऐसी लोकेशन तैयार की थी, जहां तक सुरक्षा बलों का पहुंचना, आसान नहीं था। इस तरह की रणनीति लोकल आतंकी तैयार नहीं कर सकते।  

कई वर्षों से घाटी में छिपे हैं दहशतगर्द

जेएंडके में 2022 के दौरान 187 आतंकी मारे गए थे। इनमें से स्थानीय आतंकी 130 थे, जबकि विदेशी आतंकियों की संख्या 57 थी। साल 2021 में 180, 2020 में 221, 2019 में 157 और 2018 में 257 आतंकी मारे गए थे। पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी आईएसआई, अपने गुर्गे आतंकी संगठनों की मदद से जम्मू कश्मीर में हाइब्रिड आतंकियों की भर्ती कर रही है। घाटी में हाल-फिलहाल में कोई बड़ी घुसपैठ नहीं हुई है। संभव है कि सभी विदेशी आतंकी कई वर्षों से घाटी में कहीं पर छिपे हों। सुरक्षा बलों की वहां तक पहुंच न हो सकी हो। जम्मू कश्मीर पुलिस, आईबी, आर्मी एवं अन्य एजेंसियां आतंकियों के ठिकाने तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। इन आतंकियों को घाटी में किसी न किसी तरह की मदद तो मिल ही रही है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता। सीमा पार के आतंकी संगठन, पाकिस्तानी आतंकियों को बचाना चाहते हैं। वे ज्यादा से ज्यादा हाइब्रिड आतंकी तैयार कर रहे हैं। हाइब्रिड आतंकियों की मदद से ही टारगेट किलिंग की वारदात को अंजाम दिया जाता है। सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ की रणनीति, अफगानिस्तान के लड़ाकों की तर्ज पर प्रशिक्षित हुए टॉप कैडर आतंकियों द्वारा बनाई जाती है।  

'पीएएफएफ' और 'टीआरएफ' का फैला है जाल

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा' (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने जम्मू-कश्मीर में अपने सहयोगी समूह 'प्रॉक्सी विंग' खड़े किए हैं। जैश-ए-मोहम्मद की प्रॉक्सी विंग, 'पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट' (पीएएफएफ) है, जबकि 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ), 'लश्कर-ए-तैयबा' की 'प्रॉक्सी विंग' है। खास बात है कि इन दोनों 'प्रॉक्सी विंग' को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आतंकी संगठनों की सूची में शामिल कर रखा है। इन दोनों समूहों के लिए काम कर रहे ओवर ग्राउंड वर्करों को पकड़ने के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस और एनआईए सक्रिय हैं। एनआईए ने आतंकी फंडिंग और ओवर ग्राउंड वर्करों की जड़ों तक पहुंचने के लिए कई बार घाटी में छापेमारी की है। इसके तहत कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं। तकनीकी उपकरण भी बरामद किए गए हैं।

आतंकियों को आसानी से ट्रैक नहीं कर सकते

जम्मू कश्मीर में 'जी-20' की बैठक से कुछ दिन पहले आतंकियों ने भारतीय सेना के वाहन पर हमला किया था। उसमें पांच जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद राजौरी के कंडी जंगलों में बनी गुफाओं में छिपे आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में भी सेना के पांच जवानों ने शहादत दी। पहले आईईडी ब्लास्ट और फिर जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग की गई। 'पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट' (पीएएफएफ) के प्रवक्ता तनवीर अहमद राथर ने अपने बयान में इन हमलों की जिम्मेदारी ली थी। पीएएफएफ ने इन हमलों का एक वीडियो भी जारी किया था। उसमें कहा गया कि सुरक्षा बलों को वे यानी आतंकी जैसा चाहते हैं, वैसा ही करने के लिए मजबूर कर देते हैं। सुरक्षा बल, उनके ट्रैप में आ जाते हैं। सुरक्षा बलों से जुड़े एक अधिकारी बताते हैं, पाकिस्तान से आए आतंकी, जम्मू कश्मीर के जंगलों में छिपे हैं। वे सामान्य फोन से बातचीत नहीं करते। यही वजह है कि उन्हें आसानी से ट्रैक नहीं किया जा सकता। सुरक्षा बलों को ज्यादातर सूचनाएं मुखबिरों के माध्यम से ही मिलती हैं। हालांकि मुखबिरों की सूचना को क्रॉस चेक किया जाता है, लेकिन कई बार इंटेल इनपुट, पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होता। उस स्थिति में जोखिम या नुकसान की संभावना बनी रहती है।

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