राजनाथ: भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए मानसिकता बदलनी जरूरी
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केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए कानूनी और अन्य प्रक्रियागत सुधारों के साथ-साथ लोगों के स्वभाव और उनकी मानसिकता में बदलाव लाना भी जरूरी है। राजनाथ सिंह ने यह बात यहां जाने-माने अर्थशास्त्री विवेक देबरॉय की पुस्तक ‘ऑन द ट्रेल ऑफ द ब्लैक’ का विमोचन करते हुए कही। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सिर्फ प्रक्रियागत सुधरों से भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता है। बल्कि इस खतरे से निपटने के लिए लोगों को अपनी आदतें भी बदलनी होगी। इस दौरान नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत भी मौजूद थे।
केंद्रीय गृहमंत्री ने पुस्तक ‘ऑन द ट्रेल ऑफ द ब्लैक’ का विमोचन किया
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर कोई सवाल नहीं खड़े सकता है और प्रधानमंत्री मोदी ने खुद भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई शुरू की है। प्रधानमंत्री देश से इस बुराई के खात्मे के लिए ईमानदारी से कोशिश कर रहे हैं। बकौल राजनाथ, ‘हमारे व्यक्तिगत बातचीत में प्रधानमंत्री हमेशा भ्रष्टाचार खत्म करने पर जोर देते हैं। साथ ही वह इस बात पर जोर देते हैं कि हम कैसे गरीबी और अन्य मसलों के खिलाफ लड़ाई लड़ सकते हैं।’
'प्रधानमंत्री मोदी की भ्रष्टाचार खत्म करने की कोशिश जारी है'
भ्रष्टाचार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही काले धन की वापसी के लिए एसआईटी का गठन करने का फैसला किया था। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह सत्य है कि भ्रष्टाचार आज भी मौजूद है और इस पर अंकुश लाए बिना विकास के तय लक्ष्य को पाना संभव नहीं है। हमें इस सच्चाई को स्वीकार करने की जरूरत है।
'भ्रष्टाचार की कोई परिभाषा नहीं, यह किसी भी स्तर पर हो सकता है'
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है और यह किसी भी स्तर पर हो सकता है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए हमारी सरकार ने कई सुधारों की शुरुआत की है। लेकिन जब तक लोग यह नहीं समझेंगे कि जीवन में संतोष ही सबसे बड़ा धन है। तब तक इस पर पूरी तरह से अंकुश लगाया नहीं जा सकता है।