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Op Sindoor: राजनाथ सिंह ने कहा- मेड-इन-इंडिया रक्षा प्लेटफॉर्म पर बढ़ा भरोसा, उत्पादन में वृद्धि पर क्या बोले?

Sat, 04 Jul 2026 06:15 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 04 Jul 2026 06:15 PM IST
सार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज भारत में बनने वाले रक्षा उत्पाद, सैन्य उपकरण और कठिन ऑपरेशन के दौरान सैनिकों के पराक्रम पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद स्वदेशी यानी 'मेड-इन-इंडिया' रक्षा प्लेटफॉर्म पर विश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि उत्पादन और निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

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Rajnath Singh Op Sindoor trust on made-in-India defence production exports decisive military action hindi news
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (फाइल) - फोटो : वीडियो ग्रैब @DefenceMinIndia

विस्तार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद 'मेड-इन-इंडिया' रक्षा प्लेटफॉर्म पर विश्वास बढ़ा है। उन्होंने बताया कि आज देश का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। करीब आठ-नौ साल पहले यह लगभग 46,000 करोड़ रुपये था। यह बात उन्होंने राष्ट्रीय हिंदी दैनिक नवभारत टाइम्स के 80 वर्ष पूरे होने पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही।

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स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म पर भरोसे को लेकर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म में भरोसा बढ़ा है। 'ऑपरेशन सिंदूर' भारत की एक निर्णायक सैन्य कार्रवाई थी। यह मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी। इसमें भारत में बने कई रक्षा प्लेटफॉर्म ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सिंह ने कहा कि रक्षा निर्यात भी रिकॉर्ड 38,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। वर्ष 2013-14 में यह केवल 686 करोड़ रुपये था। आज यह 57 गुना बढ़ गया है। उन्होंने अनुमान लगाया कि वर्तमान में यह करीब 40,000 करोड़ रुपये के आसपास होगा। उन्होंने पिछले 12 वर्षों में भारत की विभिन्न क्षेत्रों में यात्रा का भी उल्लेख किया।
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भारत की विकास यात्रा और प्रौद्योगिकी कितनी बड़ी ताकत?
सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की यात्रा कमी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ी है। आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास और आत्मविश्वास से विकसित भारत के निर्माण की ओर प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि भारत तकनीकी विकास और अपनी परंपराओं का सम्मान दोनों पर जोर देता है। 'परंपरा और प्रौद्योगिकी' का यह संगम 21वीं सदी में देश की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव पर भी बात की।
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AI के विस्तार के बीच मानवीय संवेदनशीलता कितनी जरूरी?
राजनाथ सिंह ने रेखांकित किया कि AI ने आज मानव अस्तित्व के लगभग सभी पहलुओं को छू लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि AI डेटा पढ़ और विश्लेषण कर सकता है। लेकिन यह लोगों की 'नब्ज' नहीं पहचान सकता। यहीं पर मानवीय संवेदनशीलता की भूमिका आती है। सिंह ने बताया कि पत्रकारिता भी AI जैसी तकनीकी प्रगति से प्रभावित हुई है। हालांकि, ये मानव रचनात्मकता और बुद्धि को पीछे नहीं छोड़ पाएंगे।


पत्रकारिता में विश्वसनीयता का कितना महत्व?
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की भविष्य की सफलता AI की क्षमताओं और मानवीय सहानुभूति के बीच संतुलन पर निर्भर करेगी। AI पत्रकारिता को तेज और सटीक बनाएगा। लेकिन भावनात्मक बुद्धिमत्ता इसे मानवीय और विश्वसनीय बनाए रखेगी। केंद्रीय मंत्री ने फर्जी खबरों और गलत सूचनाओं के युग में पत्रकारिता में विश्वसनीयता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने मीडिया की भूमिका को पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बताया। खासकर जब विषय रक्षा बलों, राष्ट्रीय सुरक्षा या राष्ट्र सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वालों के सम्मान से संबंधित हो। मीडिया को हमेशा सटीकता, निष्पक्षता और तटस्थता के मूल्यों को बनाए रखना चाहिए।

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