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'हाकिम ही अदालती हुक्म न मानें तो क्या करें?'
राजिंदर सच्चर / पूर्व मुख्य न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय
Updated Tue, 15 Mar 2016 02:09 PM IST
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श्रीश्री रविशंकर
- फोटो : gettty
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आर्ट आफ लिविंग के विश्व सांस्कृतिक उत्सव के आयोजन और उस पर उठे विवाद में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के फैसले की आलोचना हो रही है। मैं इस तरह के किसी भी समारोह के आयोजन से सहमति नहीं रखता हूं। व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है कि इस तरह का आयोजन होना ही नहीं चाहिए था। यह एक निजी समारोह था मगर इसके आयोजन में जिस तरह सरकारी महकमा जुड़ गया, वो ठीक बात नहीं है।
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सबसे पहले तो इस तरह के आयोजन की इजाजत दी ही नहीं जानी चाहिए थी क्योंकि पिछले साल ही एनजीटी ने वर्ष 2015 में यमुना के किनारे पर किसी भी तरह के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया था।
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अति तो तब हो गई जब एक निजी संस्था ने डंके की चोट पर प्रतिबंध के बावजूद यमुना के किनारे इस तरह के समारोह का आयोजन किया। यमुना के तट पर तो सरकारी महकमे को भी किसी भी तरह का आयोजन करने की इजाजत नहीं होनी चाहिए।
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वैसे तो इस तरह के आयोजन का संज्ञान लेने के लिए एनजीटी ही सक्षम है क्योंकि यह उसके आदेश की अवहेलना है। वह इस बारे में खुद ही फैसला ले सकती है। मगर इस प्रतिबंध को लागू करने का सबसे बड़ा दायित्व है दिल्ली की सरकार का।
अफसोस इस बात का है कि दिल्ली की सरकार यमुना के किनारे हुए इस आयोजन का विरोध करने की बजाय कार्यक्रम के प्रायोजकों में से एक बन गई। दिल्ली सरकार के महकमे जैसे डीडीए, नगर पालिका, जिन पर एनजीटी के फैसले को लागू करने की जिम्मेदारी थी - उन्होंने विरोध नहीं किया।
सब एक ही थाली में नजर आए
ऐसी सूरत में जब एनजीटी ने आर्ट आफ लिविंग पर जुर्माना लगाया, वैसी सूरत में ना तो प्रधानमंत्री और ना ही उनके मंत्रियों को इस आयोजन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए था। वो इसलिए क्योंकि एक अदालत का फैसला था की आयोजन गलत है और इस वजह से जुर्माना लगाया गया।
सिर्फ केंद्र सरकार ही नहीं, समारोह में कई राज्यों के मंत्री और खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री अपने सहयोगियों के साथ मौजूद थे। इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण भला और क्या हो सकता है। अच्छी बात यह है कि एनजीटी ने पांच करोड़ रूपए का जुर्माना लगाया है।
इस रकम को कम नहीं किया गया है।सिर्फ इस रकम को किस्तों में भरने की आर्ट ऑफ लिविंग की गुहार को एनजीटी ने मान लिया है। सिर्फ एनजीटी पर इलजाम लगाना सही नहीं है क्योंकि विपक्षी दलों ने भी विरोध नहीं किया। इस मामले में सब एक ही थाली में नजर आए।
(बीबीसी संवाददाता सलमान रावी से बातचीत पर आधारित)
सिर्फ केंद्र सरकार ही नहीं, समारोह में कई राज्यों के मंत्री और खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री अपने सहयोगियों के साथ मौजूद थे। इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण भला और क्या हो सकता है। अच्छी बात यह है कि एनजीटी ने पांच करोड़ रूपए का जुर्माना लगाया है।
इस रकम को कम नहीं किया गया है।सिर्फ इस रकम को किस्तों में भरने की आर्ट ऑफ लिविंग की गुहार को एनजीटी ने मान लिया है। सिर्फ एनजीटी पर इलजाम लगाना सही नहीं है क्योंकि विपक्षी दलों ने भी विरोध नहीं किया। इस मामले में सब एक ही थाली में नजर आए।
(बीबीसी संवाददाता सलमान रावी से बातचीत पर आधारित)