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Rajasthan: सिर्फ 33 सीटों से कांग्रेस ने दिए इतने संकेत! राजस्थान के साथ लोकसभा चुनाव के लिए भी छिपा है संदेश

Sun, 22 Oct 2023 02:36 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Sun, 22 Oct 2023 02:36 PM IST
सार

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजस्थान में पहले चरण में कांग्रेस ने जिन 33 सीटों पर टिकट घोषित किए हैं उसके एक साथ कई संदेश पार्टी ने दिए हैं। पहला संदेश तो यही है कि सचिन पायलट और सीएम अशोक गहलोत के किसी भी समर्थक का टिकट नहीं काटा गया है।

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Ashok Gehlot, Sachin Pilot - फोटो : Social Media

विस्तार

कांग्रेस ने राजस्थान में जिन 33 प्रत्याशियों की सूची जारी की है उससे राजस्थान में पार्टी की सियासत का तो अंदाजा हो ही रहा है। बल्कि आला कमान को आंखें तरेरने वाले नेताओं को "होल्ड" कर भी पार्टी ने एक बड़ा संदेश राजस्थान के मार्फत सभी राज्यों को दिया है। दरअसल कांग्रेस ने राजस्थान में हुई बगावत के दौरान उसमें सबसे आगे रहने वाले नेताओं के टिकट को होल्ड करके यह संदेश दिया है। जो सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि आने वाले दिनों में देश के अलग-अलग राज्यों में एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा पार्टी में इन्हीं टिकट के माध्यम से लोकसभा के चुनावों के रोड मैप का खाका खींच दिया है।
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राजस्थान के सियासी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान में टिकट बंटवारे में जिस तरीके की सधी हुई सियासत दिखाई है। वह पार्टी के लिए आने वाले अन्य राज्यों में भी बड़ी फायदेमंद साबित हो सकती है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अरुण शर्मा कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने सबसे पहले बगावत करने वाले नेताओं को होल्ड पर रख दिया। इन नेताओं में शांति धारीवाल, डॉ महेश जोशी और धर्मेंद्र राठौर जैसे नेताओं का कहीं कोई जिक्र ही नहीं है। शर्मा कहते हैं कि जब पहले चरण की सूची में ही कांग्रेस ने अपने सभी बड़े नेताओं के नाम घोषित कर दिए तो इन नेताओं के नाम ना घोषित करना एक बड़े और कड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। शर्मा कहते हैं कि हालांकि अब इनमें किसको टिकट मिलेगा या किसको टिकट नहीं मिलेगा, यह तो आने वाली सूची तय करेगी। लेकिन माना यही जा रहा है कि आलाकमान से बगावत करने और आंखें तरेरने के चलते ही इन लोगों के टिकट फंस गए हैं।
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राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजस्थान में पहले चरण में कांग्रेस ने जिन 33 सीटों पर टिकट घोषित किए हैं उसके एक साथ कई संदेश पार्टी ने दिए हैं। पहला संदेश तो राजस्थान के लिए यही है कि सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के किसी भी समर्थक का टिकट नहीं काटा गया है। राजनीतिक विश्लेषक डीएस मीना कहते हैं कि दूसरा संदेश पार्टी ने भरोसा करने वालों और जिताऊ कैंडिडेट होने के साथ-साथ किसी राजनीति और पचड़े में पड़े बगैर सीधे तौर पर जनता से मुखातिब रहने वालों को टिकट देकर किया है। डीएस मीना कहते हैं कि तीसरा और अहम संदेश यह है कि पार्टी के भीतर आपसी खींचतान भले हो। लेकिन उसको तूल देने वाले किसी नेता को पार्टी फिलहाल समायोजित करने के मूड में नहीं दिख रही है। वह कहते हैं कि यही तीसरा संदेश सबसे अहम और देश के सभी राज्यों में कांग्रेस के नेताओं के लिए लागू होता है। हालांकि उनका मानना है कि कांग्रेस अभी ज्यादातर राज्यों में सीधे तौर पर सत्ता में नहीं है। इसलिए आपसी विवाद भी उतना खुलकर सभी राज्यों में नहीं दिख रहा। लेकिन पार्टी के रणनीतिकार यह इशारा जरूर कर रहे हैं कि जहां-जहां पर सत्ता है।।वहां पर इस तरीके के विवाद पैदा करने वाले और उनको तूल देने वाले नेताओं के लिए सियासी संकट भविष्य में खड़ा हो सकता है।
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राजस्थान कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि पार्टी ने मालवीय नगर, सांगानेर और मांडलगढ़ में हारे हुए प्रत्याशियों पर भी दांव लगाकर यह संदेश दिया है कि उनके लिए जनता के बीच में रहने वाला नेता ही महत्वपूर्ण है। भले ही वह नेता नेता पिछला चुनाव क्यों ना हार गया हो। सियासी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी ने टिकट वितरण के साथ सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के उन सभी राज्यों साथ लोकसभा चुनाव की भी पूरी सियासी पिच तैयार करने की कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषक अरुण शर्मा कहते हैं कि कांग्रेस ने जिस तरीके से 33 सीटों में 27 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया है, उससे आने वाले लोकसभा के चुनावों के मुद्दों का भी एहसास होता है। वह कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी महिलाओं के आरक्षण मुद्दे को लेकर लगातार आक्रामक होकर केंद्र सरकार पर हमलावर है। अगर वह राज्यों के विधानसभा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी 27 फ़ीसदी के अनुपात में करती है। तो आने वाले लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को संदेश देने के लिए कांग्रेस इस मुद्दे पर मजबूती के साथ काउंटर कर सकती है।
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