Rajasthan election: क्या कांग्रेस की चिरंजीवी योजना बनेगी गेम चेंजर? घोषणा पत्र में हर घर को छूने की कोशिश
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विस्तार
कांग्रेस ने राजस्थान के विधानसभा चुनाव से पहले अपना घोषणा पत्र जारी किया। घोषणा पत्र में कई महत्वपूर्ण वादों की झड़ी लगा दी गई। इसमें जो सबसे महत्वपूर्ण घोषणा कांग्रेस पार्टी की ओर से की गई, उसमें चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना का लाभ 25 लाख रुपये की जगह पर 50 लाख रुपये कर दिया गया। इसके अलावा घर की महिला मुखिया को दस हजार रुपये सालाना देने की भी घोषणा कांग्रेस ने की है। सियासी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में जो सबसे महत्वपूर्ण वादा है, वह चिरंजीव स्वास्थ्य योजना के तहत दी जाने वाली सुविधा को दोगुना करने का है। कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि अपने चुनावी घोषणा पत्र के साथ राजस्थान में सत्ता की वापसी होगी। हालांकि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में जो पिछले वादे किए गए थे वह भी अब तक पूरे नहीं हो सके हैं, इसलिए कांग्रेस के ये वादे उसे दोबारा सरकार में नहीं लाने वाले हैं।
राजस्थान में चुनाव भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच में ही हो रहा है। ऐसे में कांग्रेस की ओर से जारी की गई गारंटी वाली घोषणाओं से निश्चित तौर पर सियासी माहौल में करंट तो दौड़ा ही है। हालांकि राजनीतिक जानकार यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या वास्तव में इन गारंटियों के आधार पर ही राजस्थान में मतदान होगा और उसके परिणाम भी उसी अनुरूप पाएंगे। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक शर्मा बताते हैं कि चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना निश्चित तौर पर कांग्रेस के लिए बूस्टर डोज जैसी एक गारंटी है। अब इसमें कांग्रेस ने इसकी राशि को दोगुना कर दिया है, तो निश्चित तौर पर कांग्रेस के नेता इसका सियासी आंकलन राजनीतिक गलियारों में वोट और फिर से सत्ता में वापसी के तौर पर कर रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस की ओर से घोषणा पत्र में जिन गारंटियों का जिक्र किया है, उसमें दो रुपये किलो के लिहाज से गोबर की कीमत का जिक्र किया है। जबकि प्रत्येक घर की महिला मुखिया को सालाना दस हजार रुपये देने का भी जिक्र कर राजस्थान में सत्ता वापसी की उम्मीद लगाई है।
राजस्थान की सियासत को करीब से समझने वाले गुरमुख जुजेगा कहते हैं कि राजस्थान में किसानों के लिए और महिलाओं के लिए जो योजनाएं शुरू की गईं और फिर जो वादे किए गए, वह भी कांग्रेस पार्टी के लिए चुनाव में बहुत उम्मीद जगा रहे हैं। वह कहते हैं कि कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में पुरानी पेंशन बहाली के मामले में प्रमुखता से मुद्दा बनाकर सरकार में आ गई। राजस्थान के इस चुनाव में पुरानी पेंशन बहाली, जाति आरक्षण का मुद्दा कांग्रेस पार्टी को सियासी तौर पर मुनाफे वाला लग रहा है। मंगलवार को जारी घोषणा पत्र में पार्टी ने इसका जिक्र भी किया है। वह कहते हैं कि इसी तरह घर की मुखिया महिला को सालाना दस हजार रुपये और चार सौ रुपये में गैस सिलेंडर की घोषणा के साथ कांग्रेस ने हर घर को छूने की कोशिश तो की है। लेकिन इसका कितना फायदा चुनाव में होगा, यह मतदान और उसके बाद आने वाले परिणाम से पता चलेगा।
राजस्थान के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जब से इस योजना को शुरू किया गया है, तब से अब तक इसके तहत राजस्थान के एक करोड़ 25 लाख परिवारों ने अपना रजिस्ट्रेशन इसमें कराया है। जबकि पांच लाख से ज्यादा लोग इसके तहत कैशलेस बीमा का लाभ उठा चुके हैं। कांग्रेस की चुनावी घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी कांग्रेस कहते हैं कि जो गारंटियां उनकी पार्टी की ओर से राजस्थान के लिए दी गई हैं, वह सरकार बनने के बाद न सिर्फ उनकी प्राथमिकता में होंगी, बल्कि उससे राजस्थान का सर्वांगीण विकास होगा। उनका कहना है कि राजस्थान में वैसे भी कांग्रेस की सरकार बन रही है, लेकिन यह वह घोषणाएं हैं जो आम लोगों के जीवन को और बेहतर बनाएगी। राजस्थान में कांग्रेस के घोषणा पत्र पर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता गौरव भाटिया कहते हैं कि कांग्रेस ने जो घोषणा पहले की थी, उनको तो अभी तक जमीन पर नहीं उतारा जा सका है। ऐसे में नई घोषणाओं पर राजस्थान की जनता कांग्रेस के बहकावे में नहीं आने वाली है।