राजस्थान: सचिन पायलट ने कांग्रेस हाईकमान को सौंपी रिपोर्ट, मंत्रिमंडल में शामिल होने के साथ संगठन में मिल सकती है जिम्मेदारी!
rajasthan cabinet expansion: शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ हुई पायलट की मुलाकात को संगठन में नई जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जाता है कि मंत्रिमंडल विस्तार का फॉर्मूला तय होने के बाद पायलट की भूमिका भी तय हो जाएगी। सचिन बुधवार को ही कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मिलकर अपनी बात रख चुके हैं...
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राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सियासी उठापटक जारी है। दिल्ली दरबार में सीएम अशोक गहलोत के बाद अपनी मांगों को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट भी हाजिरी लगा चुके हैं। हाईकमान दोनों गुटों की बात सुनने के बाद जल्द कोई फैसला ले सकता है। शुक्रवार दोपहर सचिन पायलट ने राजस्थान कांग्रेस से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से करीब 40 मिनट मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष को कुछ रिपोर्ट्स भी सौंपी, वहीं अपने समर्थकों की मंत्रिमंडल और सरकार में हिस्सेदारी को लेकर अपनी बात रखी। पायलट ने कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने पार्टी के लिए खून-पसीना बहाया है, उन्हें मान-सम्मान मिलना चाहिए। विधानसभा चुनाव अब बहुत दूर नहीं हैं।
अमर उजाला को मिली जानकारी की अनुसार, कांग्रेस आलाकमान अब राजस्थान में गहलोत और पायलट के बीच सुलह-समझौता में किसी तरह की देरी नहीं करना चाहता है। मंत्रिमंडल विस्तार में देरी अब तक दोनों गुटों में खींचतान की सबसे बड़ी वजह थी। जिसे अब दूर करने के लिए सभी मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। इसलिए कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों में शेयरिंग फॉर्मूला लागू करना चाहता है। ताकि गहलोत और पायलट खेमे के नेताओं के बीच खींचतान कम हो सके। आलाकमान एक व्यक्ति एक पद का फॉर्मूला भी लागू करने पर विचार कर रहा है। ताकि ज्यादा लोगों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सके। अगर ये फॉर्मूला लागू होता है तो गहलोत तीन करीबी मंत्रियों को कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है।
आलाकमान तय करेगा पायलट की भूमिका
राजस्थान में मंत्रिमंडल फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों के अलावा पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की भूमिका भी कांग्रेस हाईकमान को तय करनी है। पायलट को कांग्रेस संगठन में कोई अहम जिम्मेदारी देने पर लंबे समय से चर्चा है, लेकिन यह पद प्रदेश कांग्रेस में होगा या बाहर इस पर भी निर्णय कांग्रेस नेतृत्व करेगा। शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ हुई पायलट की मुलाकात को संगठन में नई जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जाता है कि मंत्रिमंडल विस्तार का फॉर्मूला तय होने के बाद पायलट की भूमिका भी तय हो जाएगी। सचिन बुधवार को ही कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से मिलकर अपनी बात रख चुके हैं।
सीएम गहलोत सौप चुके हैं अपनी रिपोर्ट
राजस्थान के मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में पायलट का खेमा बराबर की हिस्सेदारी चाहता है। पायलट का गुट शुरू से ही इस बात को बहुत जोरशोर से उठाता भी आया है। इस मांग को पायलट ने सुलह कमेटी के समक्ष भी रखा था। जिसके बाद ही हाईकमान ने दोनों गुटों को शांत करने के लिए मंत्रिमंडल और अन्य नियुक्तियों में शेयरिंग का फॉर्मूला तैयार किया है। इस बीच सीएम गहलोत ने भी हाईकमान को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। उन्होंने सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद कहा था कि मंत्रिमंडल फेरबदल पर मुझसे जो रिपोर्ट मांगी उसे मैंने ब्रीफ कर दिया है। सारा फैसला हमने कांग्रेस नेतृत्व पर छोड़ दिया है। आलाकमान जो फैसला करेगा वह मंजूर होगा।