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Raisina Dialogue: ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री बोलीं- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत अहम, एस जयशंकर ने कही ये बात

Fri, 03 Mar 2023 10:43 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 03 Mar 2023 10:43 AM IST
सार

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि रूस जो कर रहा है, हम उसे वह करने की इजाजत देते हैं तो इससे दुनिया भर के आक्रामक देशों को संदेश जाएगा कि वह जो भी करेंगे, उससे बच जाएंगे। 

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रायसीना डायलॉग में शामिल क्वाड देशों के विदेश मंत्री - फोटो : ANI

विस्तार

क्वाड के विदेश मंत्रियों की आज दिल्ली में अहम बैठक होगी। इस बैठक की अध्यक्षता भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर कर करेंगे। क्वाड की बैठक से पहले दिल्ली में रायसीना डायलॉग 2023 की बैठक हो रही है। इस बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन, जापान के विदेश मंत्री योशीमासा हयाशी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी योंग शामिल हुईं। रायसीना डायलॉग 2023 बैठक के दौरान ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी योंग ने बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र में भारत के बिना पुनर्गठन का कोई काम नहीं किया जा सकता। 

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कैप्टन मोदी के साथ सुबह छह बजे शुरू होती है नेट प्रैक्टिस: जयशंकर
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, कैप्टन (पीएम) मोदी के साथ नेट प्रैक्टिस सुबह 6 बजे शुरू होती है और काफी देर तक चलती है। वह आपसे उम्मीद करते हैं कि आप विकेट को लेंगे जब वह आपको मौका देते हैं। 
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हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र में भारत सबसे अहम
ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री ने कहा कि भारत एक अहम और महान ताकत है। भारत एक सभ्यता महाशक्ति भी है, जो आज की चुनौतियों से निपटने के लिए एक अलग नजरिया पेश करता है। बैठक के दौरान अमेरिका के विदेश मंत्री ने कहा कि हमारे लिए हिंद प्रशांत महासागर का क्षेत्र भविष्य के लिए बेहद अहम है। यूक्रेन में जो कुछ हो रहा है, हमारा उस पर पूरा ध्यान है, अगर रूस जो कर रहा है, हम उसे वह करने की इजाजत देते हैं तो इससे दुनिया भर के आक्रामक देशों को संदेश जाएगा कि वह जो भी करेंगे, उससे बच जाएंगे। 

अमेरिकी विदेश मंत्री का बड़ा बयान
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे देशों को मानवीय मदद पहुंचाने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे। हम उन चीजों पर मिलकर काम कर रहे हैं, जो बेहद अहम हैं। यह कोई सैन्य संगठन नहीं है। अमेरिका के विदेश मंत्री का यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि चीन द्वारा लगातार क्वाड का विरोध किया जा रहा है। चीन का आरोप है कि उसे घेरने के लिए क्वाड का गठन किया गया है। ऐसे में अमेरिकी के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन का यह बयान कि क्वाड कोई सैन्य संगठन नहीं है तो इसके बड़े मायने हैं।

बैठक के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि क्वाड 2023 में काम कर रहा है तो इसकी वजह ये है कि हमारे नेतृत्व पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है। हम आतंकवाद के खिलाफ काउंटर टेरेरिज्म वर्किंग ग्रुप और इसके स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर पर भी चर्चा की। क्वाड के चारों देशों ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों का समर्थन किया। 

भारत की मौजूदा स्थिति पहले से कहीं ज्यादा शक्तिशाली: ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री
रायसीना डायलॉग -2023 बैठक में सिरकत करते हुए ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा, आज असली चुनौती यह है कि बदलती भू-राजनीति को कैसे समझा जाए, और उस स्थिति में भारत बिल्कुल अहम है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारत की प्रगति उल्लेखनीय रही है। भारत की मौजूदा स्थिति संभावित रूप से पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर है।

उन्होंने आगे कहा, यह सोचना बेतुका है कि भारत (यूएनएससी का) स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन आप अन्य देशों के लिए भी ऐसा कह सकते हैं। पश्चिम के पास सत्ता साझा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। सवाल यह है कि इस नई दुनिया में कूटनीति की समझ कैसे बनाई जाए।

विदेश से हथियारों की आपूर्ति पर निर्भर न रहना यूक्रेन युद्ध का सबसे बड़े सबक: सीडीएस 
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि यूक्रेन युद्ध से भारतीय सशस्त्र बल जो सबसे बड़ा सबक सीख सकते हैं, वह यह है कि उन्हें विदेशों से हथियारों और सैन्य हार्डवेयर की आपूर्ति पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। रायसीना डायलॉग में एक परिचर्चा सत्र में जनरल चौहान ने यह भी कहा कि 'रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता' सुनिश्चित करने की सरकार की पहल बड़ी मात्रा में प्रमुख मंचों और हथियार प्रणालियों के उत्पादन का विकल्प प्रदान कर रही है।


उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन युद्ध ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देशों को छोटे युद्धों के लिए क्षमताएं विकसित करनी चाहिए या उन्हें लंबी रेस के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा, भारत के मामले में वास्तव में हमें देखना होगा कि भविष्य में हमें किस तरह की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, हमें आत्मनिर्भर होने की जरूरत है, यह हमारे लिए (यूक्रेन युद्ध) सबसे बड़ा सबक है। हम बाहर से अपने हथियारों की आपूर्ति पर निर्भर नहीं रह सकते। इस संघर्ष से हम यही एक बड़ा सबक लेते हैं।

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