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रायसीना वार्ता: विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, अब राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग है स्वास्थ्य की रक्षा
Wed, 14 Apr 2021 03:56 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 14 Apr 2021 03:56 AM IST
सार
- रायसीना वार्ता के दौरान विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की ‘टीका मैत्री’ सभी देशों की टीके तक समान पहुंच का प्रयास है
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विदेश मंत्री एस जयशंकर (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि अब स्वास्थ्य सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा एक अटूट हिस्सा है। विदेश मंत्री ने साथ ही कहा कि कोरोना वायरस टीकों तक पूरे विश्व में समान पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत है, क्योंकि कोई भी तब तक सुरक्षित नहीं रहेगा, जबकि तक कि हर एक सुरक्षित नहीं हो जाता। साथ ही उन्होंने कहा कि टीकों तक समान पहुंच भारत जैसे देशों समेत सभी जगह इसके उत्पादन को बढ़ाकर ही सुनिश्चित की जा सकती है। यह बातें विदेश मंत्री जयशंकर ने रायसीना सम्मेलन के पहले दिन कही।
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उनका यह जवाब देश में कोविड-19 (कोरोना वायरस) के बचाव वाले टीकों की किल्लत के बीच इनके निर्यात को लेकर सरकार पर उठ रहे सवालों के दौरान आया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की ‘टीका मैत्री’ की पहल यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि कोई भी छूटने ना पाए। बता दें कि भारत अब तक टीका मैत्री के तहत 83 देशों को कोरोना टीकों की 6.45 करोड़ से ज्यादा खुराक उपलब्ध करा चुका है।
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विदेश मंत्री ने कहा कि ‘टीका मैत्री’ देश के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत को पेश करती है। महामारी के संकट से निपटने के लिए वैश्विक रुख के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा, मैं समझता हूं कि टीके तक समान रूप से पहुंच इस संकट से निपटने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। क्योंकि हम सभी जानते हैं कि जब तक सभी लोग सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक कोई सुरक्षित नहीं है।
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उन्होंने कहा कि ठीक इसी समय यह भी अस्वाभाविक नहीं है कि दुनिया के देशों में अपनी जरूरतों पर ध्यान देने की प्रवृति है। हालांकि छोटे देशों को पेश आ रही परेशानियों को ध्यान में रखते हुए व्यापक रुख अपनाने की जरूरत है। विदेश मंत्रालय और थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की साझेदारी में रायसीना सम्मेलन का यह छठा संस्करण 16 अप्रैल तक चलेगा। इस बार यह सम्मेलन वर्चुअल तरीके से आयोजित हो रहा है।
टीका निर्यात का किया बचाव
विदेश मंत्री ने महामारी से निपटने के भारत के तरीके, अपने दवा क्षेत्र की क्षमता और विभिन्न देशों को महामारी से निपटने के लिए दी गई सहायता का भी जिक्र किया। साथ ही इसके जरिये देश में टीकों की किल्लत के दौरान इनके निर्यात को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा, हमारे टीका उत्पादकों की कुछ अनुबंधित प्रतिबद्धताएं हैं। उनकी 'कोवाक्स' (कोविड-19 वैक्सीन ग्लोबल एक्सेस फैसेलिटी) के साथ प्रतिबद्धताएं जुड़ी हैं। बता दें कि अमेरिका, भारत समेत कई देशों ने नए कोरोना टीकों का विकास तेज करने, उत्पादन बढ़ाने और दुनिया के सभी देशों तक इनका समान वितरण सुनिश्चित कराने के लिए वैश्विक साझेदारी के तौर पर 'कोवाक्स' का गठन किया है।
दक्षिण-दक्षिण सहयोग और मानवीय सहायता पर जोर
विदेश मंत्री ने दक्षिण-दक्षिण सहयोग, मानवीय सहायता और आपदा राहत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, कुछ समय के लिए दक्षिण-दक्षिण सहयोग रहा है। वैश्वीकरण बढ़ने के साथ यह बेहद अहम है कि उन दिखावे के शब्दों को कुछ व्यवहारिक पहलों में बदला जाए। उन्होंने कहा, महामारी से पहलेही भारत सभी को मानवीय सहायता और आपदा राहत उपलब्ध करा रहा था। पूरा विश्व एक परिवार है और हम इस यकीन को ज्यादा व्यवहारिक तरीके से दिखाते हैं।