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Monsoon 2024: सितंबर के आखिरी तक चलेगा बरसात का दौर, इन फसलों को मिलेगा फायदा तो इन्हें हो सकता है नुकसान!
Fri, 30 Aug 2024 09:38 PM IST
शिव शुक्ला
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Fri, 30 Aug 2024 09:38 PM IST
सार
सामान्य से अधिक बारिश किसानों के लिए संकट लेकर आई है। ये बरसात गर्मी में बोई गई खड़ी फसलों जैसे धान, कपास, सोयाबीन, मक्का और दलहन पर बुरा असर डाल सकती है।
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बारिश का असर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश में इस बार मानसून अपनी सक्रियता बनाए हुए है। राजधानी दिल्ली से लेकर उत्तर भारत के कई राज्यों में अभी भी रुक-रुक कर बरसात का दौर जारी है। जबकि गुजरात और महाराष्ट्र में तेज बारिश हो रही है। इस बीच मौसम विशेषज्ञों ने इस साल देश में मानसूनी बारिश लंबे समय तक होने का अनुमान लगाया है। उनका मानना है कि सितंबर के मध्य में कम दबाव का क्षेत्र बनने से मानसूनी बारिश सितंबर के आखिर तक खिंच सकती है।
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दरअसल, सामान्य से अधिक बारिश किसानों के लिए संकट लेकर आई है। ये बरसात गर्मी में बोई गई खड़ी फसलों जैसे धान, कपास, सोयाबीन, मक्का और दलहन पर बुरा असर डाल सकती है। क्योंकि सामान्यतया ये फसले सितंबर के मध्य तक कटने लगती हैं। फसल खराब होने से खाद्य महंगाई बढ़ सकती है। हालांकि इससे मिट्टी में नमी अधिक रहेगी और जाड़े के सीजन में बोई जाने वाली फसलों जैसे गेहूं, सरसों और चने के लिए सीजन बेहतर होने की उम्मीद है।
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कृषि वैज्ञानिक एस.एस.रमण का कहना है कि, दुनिया में भारत गेहूं, चीनी और धान के दूसरे सबसे बड़ा उत्पादक है। लेकिन भारत ने इन जिंसों के निर्यात पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। अगर ज्यादा बारिश से फसल को नुकसान होता है तो सरकार को प्रतिबंध आगे और बढ़ाने को बाध्य होना पड़ सकता है। सितंबर के तीसरे और चौथे सप्ताह और अक्टूबर की शुरुआत में भारी बारिश के कारण अगेती फसलों की बुआई प्रभावित हो सकती है जिसकी बुआई होने वाली है। अगर अक्टूबर के शुरुआती 15 दिन तक बारिश होती है तो इससे खेतों में पानी जमा होने से फसलें ज्यादा खराब हो सकती हैं।
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आमतौर पर मानसून की शुरुआत जून में होती है। देश के उत्तर पश्चिमी इलाकों से 17 सितंबर तक इसकी वापसी शुरू हो जाती है। अक्टूबर के मध्य तक बारिश खत्म हो जाती है। करीब 3.5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए मानसूनी बारिश अहम है। भारत में खेतों की सिंचाई व जलाशयों को भरने में 70 प्रतिशत योगदान मानसूनी बारिश का है। जून से सितंबर के दौरान होने वाली बारिश पर भारत में करीब आधी खेती निर्भर होती है। मौसम विभाग के जानकारों का कहना है कि, सितंबर-अक्टूबर में मानसूनी बारिश ला नीना से प्रभावित हो सकती है, जो अगले महीने होने की उम्मीद है। इसके पहले जब ला नीना मॉनसून सीजन के दूसरे हिस्से में विकसित हुआ है, इसकी वजह से मानसून की वापसी में देरी हुई है।